पाकिस्तान में जाकर इतना साफ़-साफ़ बोल देना ? ये आप ही कर सकते हैं @Javedakhtarjadu साहेब । हर बात साफ़, निर्भय होकर बोलना। जगह के मायनों से बाहर ❤️🇮🇳🙏
“वो शख़्स काम का है दो ऐब भी हैं उसमें,
इक सर उठान�� दूजा मुँह में ज़बान रखना..!”
मिस्टर अम्बेडकर!
तुम्हारी किताब में
ये काफ़ी
खतरनाक विचार हैं
कि
पूरी आदम जात का एक आधार है।
कि
कोई किसी भी
जुल्म न करे,
जो जिससे मर्जी
प्रेम करे-
कि
हक मिले हर
हकदार को-
खेत मिले
हर हलदार को।
जड़ और जंगल मिले
वहाँ के वासी को-
रोटी मिले
हर निवासी को।
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कभी कभी तेरी आवाज़ पर रुकूं भी नहीं
कि तू पुकारे मुझे और मैं सुनूं भी नहीं
इस इन्तेज़ार में ज़िद का भी एक पहलू है
किवाड़ खोल दूं और रास्ता तकूं भी नहीं
वो दूर हो तो लगे उस से कोई रिश्ता है
क़रीब आए तो मैं उसका कुछ लगूं भी नहीं
- शकील आज़मी
वीडियो देखकर रोम रोम सिहर गया। यदि ये सत्य है तो सिर्फ सीमा पात्रा को नहीं, जितने लोगों को ये बात पता थी लेकिन उन्होंने मुंह बंद रखा या छुपाया, उन सब को भी सजा होनी चाहिए। निष्पक्ष जांच हो
@rashtrapatibhvn
रिश्ते नातों का मेल है ज़िंदगी
चंद दिनों का खेल है ज़िंदगी
कि जिसमें मरघट तक जाना है
वही सफ़र, वही रेल है ज़िंदगी
- पवन चौल्डा 'समीर'
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#Sameera
अकेला जब भी रहता हूँ तुम्हारी याद आती है
मैं जब भी प्रेम लिखता हूँ तुम्हारी याद आती है
भले ही कितनी दूरी हो तुम्हारे और मेरी बीच
जब आँखे बंद करता हूँ तुम्हारी याद आती है
~ पवन चौल्डा 'समीर'
बनेगी वो अब दुल्हन, मुबारक हो!
जलायेगी अन्तर्मन, मुबारक हो!
इस दिवाने से बहुत दूर जाकर
कहीं खिलायेगी चमन,मुबारक हो!
वो अपनी ख़ुशबू से मोहित करके
सब का छू लेगी मन, मुबारक हो!
अब उसके विरह में मदमस्त होकर
गीत लिखता है पवन, मुबारक हो!
- पवन चौल्डा 'समीर' ����
सुबह - सुबह चाय के साथ अख़बार पढ़ने बैठो
और ख़ुद की ही कविता पढ़ने को मिल जाए, इससे ज़्यादा ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है 😊☕
आज राजस्थान पत्रिका के परिवार अंक में मेरी कविता ' मेघा बरसेंगे आँगन में ' प्रकाशित हुई! 🌻🌻❤️❤️
@AalokTweet@umda_panktiyan