ये रितिका चोपड़ा हैं।इंडियन एक्सप्रेस की शानदार पत्रकार। जिन्होंने ज��ञानेश कुमार की पोल खोल दी।
रितिका चोपड़ा ने मीडिया नाम की मरती हुई संस्था को ज़िंदा कर दिया है।
इनके सम्मान में दो शब्द तो लिख दीजिए प्लीज़।
इंडियन एक्सप्रेस के इस खुलासे से बड़ा सबूत और क्या होगा कि CEC ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की अपनी बपौती समझ रखा है .
दो चुनाव आयुक्तों ने अपने ही आयोग के फैसलों और तौर तरीकों पर दस महीने में 14 बार आपत्ति जताई. आयोग के फैसलों को Illegal और unauthorised बताया. कैबिनेट सेक्रेटरी का दरवाजा खटखटाया.
फिर भी ज्ञानेश कुमार की मनमानी चलती रही . ऐसे CEC को अपने पद पर रहने का हक नहीं है . चुनाव आयोग उनके पिता जी की जायदाद नहीं है .
मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।
👉 इस बारे में खुद दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है।
▪️ शिकायत में साफ कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्त - सु���बीर सिंह संधू और विवेक जोशी को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी जाती। उनसे सलाह नहीं ली जाती। उनसे बिना पूछे या बताए हुए फैसले लिए जा ��हे हैं।
▪️ ये 14 शिकायतें मुख्य तौर से - SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर है।
इन शिकायतों से साफ होता है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में सिर्फ ज्ञानेश कुमार की चल रही है।
ज्ञानेश अपने बॉस मोदी की तरह तानाशाही कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए 'वोट चोरी' का काम कर रहे हैं।
हम पहले भी कहते आए हैं - मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर रखा है। ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है। इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट से ये बात साबित होती है।
मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
लेकिन ये बात याद रखना - वक्त आने पर सबका हिसाब होगा, जवाबदेही तय होगी। इस अपराध की सजा जरूर मिलेगी।
🎯चुनाव आयोग के अंदर किसकी मनमर्जी चल रही है?
🎯दो चुनाव आयुक्तों ने नियम पालन न होने की शिकायत क्यों की?
🎯नए वोटर जोड़ने की प्रक्रिया में कैसे अड़चन पैदा की गई?
🎯फ़ॉर्म 6 के मामले में सरकार की शक्तियों को ठेंगा क्यों दिखाया गया?
🎯आयोग के जिन अधिकारियों को वोटर जोड़ने और हटाने का हक़ है, उनके हाथ क्यों बांध दिए गए?
🎯देशभर के वोटरों के डेटा को दिल्ली से कंट्रोल करने का चलन क्यों शुरू किया गया?
🎯क्यों 10 महीनों में कम से कम 14 बार और एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज करनी पड़ी?
🎯आपत्तियों के ���ाद फैसले कैसे ले लिए गए?
🎯और ऐसी नौबत क्यों आई कि चुनाव आयुक्तों के कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत करनी पड़ी?
जानिए इन सभी सवालों के जवाब. हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में. वीडियो देखने के लिए आएं इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
1995 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि चुनाव आयोग एक बहुमत की संस्था है।
⦿ बहुत समय पहले एक कानूनी प्रश्न उठा था कि क्या चुनाव आयोग में CEC सर्वोपरि हैं और EC बराबर का हक नहीं रखते?
इसका स्पष्ट उत्तर ये दिया गया था-
⦿ सभी EC बराबर हैं। चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC), EC के ऊपर नहीं हैं। वो First among equals हैं।
ऐसे में आज के खुलासे से साफ होता है कि CEC ने सिर्फ देश के संवैधानिक मूल्यों पर हमला नहीं किया, उन्होंने चुनाव आयोग को हाईजैक कर अपने Colleagues को भी भ्रमित किया है।
: @DrAMSinghvi जी, चेयरमैन (AICC Law, RTI & HR Dept.)
📍 दिल्ली
अजमेर ��े शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल स्टाफ ने ही ग्रामीणों को भड़काकर अपने प्रधानाचार्य के चेहरे पर कालिख पुतवा दी थी।
इस हिंसक कृत्य पर सख्त ��क्शन लेते हुए, जिला शिक्षा अधिकारी ने अध्यापिका रोशन दीप श्रीमाली और लैब असिस्टेंट हिया सोलंकी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया
#AjmerNews #RajasthanEducation #EducationNews #TeacherSuspended
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव में बेईमानी और बेशर्मी की सारी हदें भाजपा सरकार ने पार कर दीं। नगरीय निकायों में अपने बोर्ड बनाने के लिए सारी मर्यादाओं और नियम-���ानूनों को भाजपा सरकार ने तार-तार कर दिया। पूरा प्रदेश स्तब्ध है, राजस्थान में कभी ऐसा होगा यह सोचा भी नहीं जा सकता था। भाजपा सरकार ने सरकारी मशीनरी, पुलिस और पूरा प्रशासन लगाकर ��ोकतंत्र की खुलेआम लूट की है। शायद ही कोई निकाय बचा हो जहाँ भाजपा ने सत्ता और धनबल के दम पर जनमत को कुचलने का प्रयास न किया हो।
राजस्थान में एक-एक पार्षद के लिए 2-2 करोड़ रुपये तक की बोली लगाई गई। कांग्रेस पार्षदों को कभी उनके घर को अवैध बताकर नोटिस भेजा गया, कभी उनके प्रतिष्ठानों को सील किया गया, नए-नए मुकदमे दायर कर पुलिस के सामने पेश होने के नोटिस थमाए गए, बाड़ेबंदी में रुके पार्षदों के कैंप मे��� पुलिस भेजकर उन्हें जबरन उठाया गया। भाजपा सरकार के इन कुकर्मों के कारण कल रात 12 बजे तक राजस्थान हाईकोर्ट को सुनवाई कर चुनाव से जुड़ी याचिकाओं का निस्तारण करना पड़ा, जिसमें भाजपा सरकार को अदालत से करारा तमाचा लगा।
यह सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस के जरिए भी यहाँ के निर्वाचित पार्षदों को भाजपा के पक्ष में ले जाने का काम किया गया। अब ��क जिस तरह की हॉर्स ट्रेडिंग और एजेंसियों के दुरुपयोग की तस्वीरें हम पश्चिम बंगाल में देख रहे थे, वही घिनौना खेल अब राजस्थान के अपने निकाय चुनावों में खुलकर सामने आ गया है।
आज नगरीय निकाय चुनाव के दिन भी मथानिया, पावटा, तिजारा, कुचेरा, हनुमानगढ़, गंगानगर, अलवर, निम्बाहेड़ा समेत पूरे राजस्थान से जो दृश्य सामने आए, वे चीख-चीखकर लोकतंत्र की हत्या की गवाही दे रहे हैं। जब नगरीय निकाय चुनावों में य�� हाल है, तो साफ है कि आने वाले पंचायत चुनावों में भाजपा सरकार इससे भी आगे जाकर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर सकती है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, आपसे प्रदेश को ऐसे कृत्यों की उम्मीद नहीं थी। अब आपका और आपकी सरकार का नाम राजस्थान के इतिहास में लोकतंत्र की हत्या करने वाले मुख्यमंत्री और सरकार के रूप में दर्ज हो चुका है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि राजनीतिक मामलों में काफी हद तक निष्पक्ष माने जाने व���ले राजस्थान के ��ौकरशाह और पुलिस के कई अधिकारी भी पहली बार भाजपा सरकार के साथ मिलकर इस पाप में शामिल हो गए। संविधान की शपथ लेने वाले अधिकारियों को विचार करना चाहिए कि क्या ऐसे कुकृत्यों में शामिल होने के लिए वे राजकीय सेवा में आए थे? समय आने पर हर एक की जवाबदेही तय होगी, ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
बोर्ड बनाने और मेयर की कुर्सी हथियाने के लिए भाजपा कैसे-कैसे हथकंडे अपनाएगी ?
बीकानेर में मेयर चुनाव से ठीक पहले भाजपा के सरकारी नोटिसों की झड़ी लग गई है। पहले कांग्रेस पार्षद मनोज विश्नोई जी को BDA का नोट��स भेजा, और अब कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद जी को वर्षों पुराने मामले में 20 सितंबर को थाने में पेशी का आदेश भेजा गया है।
21 सितंबर को मेयर चुनाव.. और 20 बुलावा.. भाजपा ये कैसी राजनीति पर उतर आई है। सत्ता कितना भी जोर लगा ले, कांग्रेस का सिपाही न डरेगा, न दबेगा.. लोकतंत्र के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।
सत्ता का अहंकार देख लीजिए। जनता ने सड़क क्या मांग ली, 'राजा जी' भड़क गए।
कहने लगे - मेरे सामने ऐसी भाषा का प्रयोग ना करना, मुझसे निवेदन करो।
जनता इनके अहंकार को जल्द ठिकाने लगाएगी।
निकाय चुनावों में शहरी वार्डों में हुई किरकिरी और लगातार खिसकते जनाधार से बौखलाई भाजपा अब पंचायत चुनावों से बचने के रास्ते तलाश रही है।
17 और 18 सितंबर को प्रस्तावित पंचायत राज संस्थाओं की आरक्षण/लॉटरी प्रक्रिया को स्थगित करने का आदेश साफ़ बताता है कि भाजपा चुनाव से भागकर हार से बचना चाहती है।
एक तरफ भाजपा "एक राज्य, एक चुनाव" का ढिंढोरा पीटती है, और ��ूसरी तरफ निकाय चुनाव के साथ पंचायत चुनाव तक नहीं करवा पाती। इतना ही नहीं गांवों में जनता के आक्रोश से घबराई भाजपा पंचायत चुनाव तो दूर प्रक्रिया तक टालने में लगी है।
आखिर.. चुनाव से कब तक भागेगी भाजपा? लोकतंत्र को कब तक बंधक बनाएगी? जनता के जनादेश से बचने के लिए तारीखें टाली जा सकती हैं, लेकिन जनता का सामना नहीं टाला जा सकता। निकाय चुनाव में मिले झटके के बाद अब पंचायतों में भी जनता BJP को जवाब देने के लिए तैयार है।
लूणकरणसर व खाजूवाला में कांग्रेस की हार का विश्लेषण
लूणकरणसर में पूर्व मंत्री ,प्रधान तथा बुजुर्ग कार्यकर्ताओं को चुनाव में शामिल नहीं करना
मनमाने तरीके से सीटे देना
बड़ों की नहीं सुनना सबसे बड़ी कमजोरी है
हार का मुख्य कार��� है
@GovindDotasra
@Jeetuburdak
खाजूवाला में गोविंद राम जी का टिकिट वितरण सही प्रकार से नहीं करना
यह सिर्फ इतना ही चाहते है कि मेरा परिवार ही लायक है प्रधान चेयरमैन जिला प्रमुख सब बन जाए
चुनाव में सक्रिय नहीं होना
यह अपनी ही पार्टी की टांग खींच रहे हैं
यही हालात पंचायती राज में होने वाला है
@Jeetuburdak
@GovindDotasra@BishnaramSiyag खाजूवाला में गोविंद राम जी का टिकिट वितरण सही प्रकार से नहीं करना
यह सिर्फ इतना ही चाहते है कि मेरा परिवार ही लायक है प्रधान चेयरमैन जिला प्रमुख सब बन जाए
चुनाव में सक्रिय नहीं होना
यह अपनी ही पार्टी की टांग खींच रहे हैं
यही हालात पंचायती राज में होने वाला है
@GovindDotasra
लूणकरणसर व खाजूवाला में कांग्रेस की हार का विश्लेषण
लूणकरणसर में पूर्व मंत्री ,प्रधान तथा बुजुर्ग कार्यकर्ताओं को चुनाव में शामिल नहीं करना
मनमाने तरीके से सीटे देना
बड़ों की नहीं सुनना सबसे बड़ी कमजोरी है
हार का मुख्य कारण है
@GovindDotasra@BishnaramSiyag