यह भयानक है। अगर देश में ईमानदार जाँच व्यवस्था होती तो एक दिन में जाँच हो जाती मगर वो तो अयोध्या में भी नहीं है। देश का हर संस्थान पीएम केयर फंड जैसा हो गया है।
विश्व पर्यावरण दिवस के मौक़े पर राहुल गांधी ने निकोबार पर अपनी डॉक्यूमेंटरी रिलीज़ की। इसमें राहुल गांधी ने इस बात पर ज़ोर दिया है ���ि मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का रक्षा रणनीति से लेना देना नहीं है, लेकिन ये इकोलॉजी को बिगाड़ने वाला ज़रुर है।
3 मई को देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा NEET - UG हुई थी।
मगर 8 दिन तक किसी खूफिया एजेंसी, जांच एजेंसी को पता नहीं चला की यह परीक्षा पेपर लीक करवा कर हुई है।
11 मई को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बारे में सार्वजनिक चिंता जाहिर क���।
तब सरकार जागी और आज 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी।
आजकल जब तक राहुल नहीं कहें कुछ भी पता नहीं चलता है।
खुफिया और जांच एजेंसियां करती क्या हैं?
उन्हें विपक्ष के नेताओं के पीछे लगा रखा है।
हद तो तब हो गई जब देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी NIA जिसका काम केवल आतंकवाद के खिलाफ था उसकी बंगाल चुनाव में ड्यूटी लगा दी।
बाकी लाखों अन्य अर्ध सैनिक बल पहले से वहां तैनात थे।
जांच एजेंसियों को एक और काम जो इनकी चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा आधार है हिंदू मुसलमान करवाना उसमें तो सबसे ज्यादा यूज करते ही हैं।
बाकी यह सब परीक्षाएं, पहलगाम का आतंकवादी हमला इन सब पर ध्यान देने का एजेंसियों को ना समय मिलता है और ना ही अब उनकी प्राथमिकता रहने दी गई है।
NEET का एग्जाम देने वाले लाखों बच्चों की मेहनत बेकार गई।
करीब 22 लाख बच्चों ने इम्तिहान दिया था।
और उनके मां-बाप?
क्या गुजर रही होगी उन पर। फिर तैयारी फिर इम्तिहान फिर खर्चा।
कोई सोचता है इस पर कि यह सरकार क्या कर रही है?
इस बार NEET की परीक्षा के लिए केंद्रीय बलों के 2.4 लाख जवानों को तैनात करना चाहिए। सभी DG को परीक्षा केंद्र का प्रभारी बना देना चाहिए। चुनाव आयोग को निगरानी का काम दे देना चाहिए। शर्मनाक है कि एक परीक्षा नहीं करा सकते। मालूम नहीं चोरी से कितने लोग डॉक्टर बन कर अस्पतालों में काम कर रहे हैं और राष्ट्रवादी राजनीति के पीछे छुपे हु�� हैं।
देश में धर्म और राष्ट्रवाद की राजनीति का तूफ़ान भी चल रहा है और लोग चोरी से डॉक्टर भी बन रहे हैं । यह कैसे हो सकता है।
देश की अर्थव्यवस्था का भी SIR हो गया है। पता नहीं किसका नाम कटा है और क्यों कटा है। सही तस्वीर किसी को नहीं पता। क्या प्रधानमंत्री जी को बंगाल के नतीजे के बाद यह सब पता चला? उन्हें कब लगा कि इस तरह की अपील करने की नौबत आ गई है? क्या प्रधानमंत्री गुवाहाटी का शपथ ग्रहण वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से करना चाहेंगे? बंगाल के लिए कितने चार्टेड प्लेन हायर किए गए थे? दूसरे राज्यों के सीएम की क्या ज़रूरत थी अगर देश की हालत इतनी ख़राब है ।
आधार, बैंक, राशन, छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं के लिए OTP अनिवार्य है, लेकिन बिना रिचार्ज गरीबों को OTP नहीं मिलती। क्या सिर्फ OTP के लिए हर महीने रिचार्ज करवाना मजबूरी है? केंद्र सरकार से मांग है OTP सेवा सभी नागरिकों के लिए मुफ्त होनी चाहिए। @TRAI@DoT_India@UIDAI@GoI_MeitY
आधार, राश���, बैंक, छात्रवृत्ति, स्कूल एडमिशन, परीक्षा फॉर्म, बीमा, मनरेगा, किसान योजनाएँ और लगभग सभी सरकारी सेवाएँ आज मोबाइल OTP से जुड़ी हुई हैं।
अगर किसी गरीब व्यक्ति के मोबाइल में रिचार्ज नहीं है तो उसे OTP कैसे मिलेगी? क्या सिर्फ OTP पाने के लिए हर महीने रिचार्ज करवाना गरीबों की मजबूरी बना दी गई है?
ऊपर से टेलीकॉम कंपनियों की 28 दिन में सेवा समाप्त करने की मनमानी व्यवस्था ने लोगों पर और ��ोझ डाल दिया है।
पहले महीने 30 दिन का होता था, लेकिन अब 28 दिन के रिचार्ज से साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करवाना पड़ता है। इसका सीधा असर गरीब, मजदूर, किसान और छात्रों पर पड़ रहा है।
जब सरकार खुद आधार, बैंक, राशन और सरकारी योजनाओं के लिए OTP अनिवार्य कर रही है, तो कम से कम OTP सेवा को सभी नागरिकों के लिए मुफ्त किया जाना चाहिए। डिजिटल इंडिया का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि गरीबों पर हर महीने नया आर्थिक बोझ ड��ल दिया जाए।
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हरियाणा के अंबाला स्थित एयरफोर्स स्टेशन की जानकारी पाकिस्तान को देने वाले सुनील कुमार को गिरफ्तार किया गया
◆ वो हनीट्रैप में फंसकर सोशल मीडिया के जरिए सेना की संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा था
◆ पुलिस और एसआइटी उसकी मोबाइल डाटा और पाकिस्तानी संपर्कों की जांच में जुटी है
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