सरकारी स्कूलों की हालत देखकर लगता है कि सरकार की मंशा ही इन्हें चलाने की नहीं है।
न ढंग की बिल्डिंग, न पर्याप्त शिक्षक, न पीने का पानी और न ही बुनियादी टॉयलेट की सुविधा।
फिर सवाल ये है—बच्चे पढ़ेंगे कैसे और देश आगे बढ़ेगा कैसे?
स्कूल चल रहे हैं, लेकिन सिर्फ़ खानापूर्ति के लिए!
सड़क पर पैदल चलना हो तो नज़रें सबसे पहले फ़ुटपाथ को ढूंढती हैं ताकि हम अपना सफ़र ट्रैफ़िक से सुरक्षित रहते हुए पूरा कर लें.
लेकिन कई बार फ़ुटपाथ चलने के लायक ही नहीं होते या कहीं फ़ुटपाथ पर छोटी-छोटी दुकानें दिखती हैं.
इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि पैदल चलने वालों को ऐसे फ़ुटपाथ मिले, जिन पर कोई कब्ज़ा न हो.
लेकिन भारत में फ़ुटपाथों की स्थिति कैसे बेहतर हो सकती है? देखिए, बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित (@jugalrp ) की ये रिपोर्ट.
शूट और एडिट: दीपक जसरोटिया (@DeepakJ0710 )
Govt School की हालत देखिए 👇🏻
इनकी यह हालत इस लिए है, क्यूंकि प्राइवेट स्कूल नेताओं के है, अगर सरकारी स्कूल ठीक हो जाएगा तो फिर प्राइवेट स्कूल में कौन जाएगा।
Brave of @HindiNews18 to host and air this.
Audience applause indicates that change is coming, and ranting and mumbling from the ramparts of Lal Qila will only further damage a much tainted image.