राहुल गांधी की भाषा और राजनीतिक आचरण का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री और इटली की राष्ट्राध्यक्ष जैसी संवैधानिक एवं सम्मानित शख्सियतों के लिए जिस तरह की आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है, वह किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक और राजनीतिक संस्कृति के लिए शर्मनाक है।
राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन अशोभनीय भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणी और संवैधानिक पदों का अपमान राजनीति नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कारों के पतन का प्रमाण है।
यह भारत की महान लोकतांत्रिक परंपरा की भाषा नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति पर सीधा प्रहार है, जिसने हमेशा असहमति के बावजूद मर्यादा और सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया है।
देश की जनता सब देख रही है, शब्द भी, संस्कार भी और सोच भी। यही कारण है कि जनता ने बार-बार राहुल गांधी की राजनीति को नकारा है और आगे भी उनके अहंकार, अमर्यादित भाषा और नकारात्मक राजनीति को करारा जवाब देती रहेगी।
Sir I want share an idea to make a film on Naib Subedar Bana Singh (PVC), who led the Operation called Ops. Rajiv on Siachen Glacier and recaptrued the strategic quaid post later known as BANA TOP. The movie name must be BANA TOP
@AdityaDharFilms
@CJP_for_India तुम्हारे जैसे एंटी नेशनलिस्ट कॉकरोचों की कमी नहीं है इस देश में। जब देखो तब गंदी नाली से बाहर आकर गंध फैलाने लगते हैं इस देश में। लेकिन हम सनातनियोंने भी ठान लिया है कि तुम जैसे कॉकरोचों को उसी गंदे नाले में वापस भेज देंगे।।