भगवान शिव के बारे में दस अज्ञात तथ्य..
1. शिव की उत्पत्ति: शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव एक धधकते प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए, जिसका न तो ब्रह्मा और न ही विष्णु आदि और न ही अंत जान पाए।
🔹अद्भुत , अलौकिक भोग🔹
🔸प्रभु भाव के भूखें हैं🔸
एक गाँव के बाहर छोटा सा शिव मंदिर था, जिसमें एक वृद्ध पुजारी रहते थे।
एक दिन एक गरीब माँ अपने नन्हे से बालक को मंदिर के द्वार पर छोड़कर चली गई।
बहुत खोजने पर भी पुजारी जी को बालक के परिवार का कुछ भी पता न चला।
जब गाँव का भी कोई व्यक्ति उस बालक का लालन-पालन करने को तैयार न हुआ तो पुजारी जी ने भगवान् शिव की इच्छा समझकर उसे अपने पास रख लिया और उसका नाम भोला रख दिया।
गाँव के श्रद्धालु भक्तों से जो कुछ प्राप्त होता, उसी से भगवान् शिव का, पुजारीजी का और बालक भोला का किसी तरह गुजारा चलता।
अभयदान....
"राजा शिवि" पुरुवंशी नरेश शिवि उशीनगर देश के राजा थे। वे बड़े दयालु-परोपकारी शरण में आने वालों की रक्षा करने वाले एक धर्मात्मा राजा थे। इसके यहाँ से कोई पीड़ित, निराश नहीं लौटता था।
'भक्तमाली' और लड्डू गोपाल जी का अद्भुत भक्तिमय प्रसंग...
पण्ड़ित श्री जगन्नाथ प्रसाद जी 'भक्तमाली' के भक्तिभाव के कारण वृंदावन के सभी संत उनसे बहुत प्रभावित थे और उनके ऊपर कृपा रखते थे। सन्तों की कौन कहे स्वयं 'श्रीकृष्ण' उनसे आकृष्ट होकर जब तब किसी न किसी छल से उनके ऊपर कृपा कर जाया करते थे।
परमात्मा ने हमें यह मनुष्य शरीर देकर अपना दायित्व एक बार में ही पूरा कर दिया है।
अब हमारी बारी है, अब हमें उसे नित प्रतिदिन याद करना है। उसका सुमिरन करना है। हमारे पास उसका धन्यवाद करने का केवल एक मात्र यही मार्ग है। इसलिए हर पल, हर क्षण, हर घड़ी केवल और केवल उसका नाम आपके हृदय में चलते रहना चाहिए।
"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे"
"हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे"
श्री रामलीला की अद्भुत कहानी..!!
बात 1880 के अक्टूबर-नवम्बर की है बनारस की एक रामलीला मण्डली रामलीला खेलने तुलसी गांव आयी हुई थी,मण्डली में 22-24 कलाकार थे जो गांव के ही एक आदमी के यहाँ रुके थे...
एक बार पढ़िएगा जरुर.....
एक बार एक गरीब पिता ने अपनी इकलौती पुत्री की सगाई करवाई...
लड़का बड़े अच्छे घर से था, इसलिए माता-पिता दोनों बहुत खुश थे ।
लड़के के साथ लड़के के पूरे परिवार का स्वभाव भी बड़ा अच्छा था।
"महाराज अज और रावण"
रामकथा का एक प्रसंग....!!
महाराज दशरथ का जन्म बहुत ही एक अद्भुत घटना है पौराणिक धर्म ग्रंथों के आधार पर बताया जाता है कि एक बार राजा अज दोपहर की वंदना कर रहे थे। उस समय लंकापति रावण उनसे युद्ध करने के लिए आया और दूर से उनकी वंदना करना देख रहा था।
मैं बचपन से देखता आया हूँ कि...
मेरे पिताजी भोजन ग्रहण करने बैठते तो एक निवाला तोड़ कर थाली के चारों ओर घूमाते और फिर उसे किनारे रख कर थाली को प्रणाम करते और खाना शुरू करते।
महादान किसे कहते हैं....
महाराज युधिष्ठिर का संकल्प था कि वे अपनी प्रजा को सदा दान देते
रहेंगे ।उनके पास अक्षय पात्र था जिस की विशेषता थी कि उससे जो भी
मांगा जाए तुरंत प्रस्तुत कर देता था। युधिष्ठिर ने अपने दान के बल पर
शिवि, दधिचि और हरिश्चंद्र को भी पीछे छोड़ने का अभिमान पाल रखा था।
सच्चा प्रेम.....
एक बार नारद जी ने द्वारकाधीश से पूछा- प्रभु क्या कारण है की सर्वत्र
संसार में राधे-राधे हो रहा है। आपकी महापटरानी 'रुकमणी' और अन्य
रानियों को तो ब्रज तक में कोई याद नहीं करता।
🚩श्री लक्ष्मीनारायणाय नमो नमः🚩
यदि आपके पूजा घर में भगवान विष्णु का लेटी हुई अवस्था में और उनके चरणों की सेवा करती हुई माता लक्ष्मी का चित्र है, तो यह माना जाता है कि परिवार में पति-पत्नी के बीच का व्यवहार, बच्चों का परिवार और माता-पिता के प्रति व्यवहार और धन-धान्य की पूर्णता बनी रहती है। यहाँ तक कि अगर सीमित आय के साधन भी हों, तो भी किसी कमी का अनुभव नहीं होगा।
लेकिन सिर्फ घर में यह चित्र रखना ही नियम नही है, नियमित रूप से भावपूर्ण पूजा, वह भी सुबह और शाम, होनी चाहिए। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के स्तोत्रों का पाठ भी मधुर स्वरों में उनकी निश्चित ध्वनि/मीटर/छ्न्द के साथ किया जाना चाहिए। साथ ही, परिवार के बुजुर्गों, बच्चों और सभी सदस्यों को आपस में संयम, प्रेम और सम्मान से भरा हुआ व्यवहार करना चाहिए।
सबसे बड़ा पुण्य......!!
एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था. वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था .
निष्काम कर्म का फल.....!!!
एक गरीब विधवा के पुत्र ने एक बार अपने राजा को देखा। राजा को देख कर उसने अपनी माँ से पूछा- माँ! क्या कभी मैं राजा से बात कर पाऊँगा?