परहित सरिस धर्म नहिं भाई - संघ स्वयंसेवक ने अपने प्राण देकर दो की जान बचाई
प्रयागराज।
गंगापार स्थित कौड़िहार के कुरेसर घाट पर हुई घटना ने मानव धर्म और संघ संस्कारों को जीवंत किया। कौड़िहार निवासी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक खण्ड शारीरिक शिक्षण प्रमुख सुरेश केशरवानी जी अपने प्राण न्यौछावर कर गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित चौपाई 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई' को चरितार्थ किया।
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“भारत बहुत तेजी से बढ़ रहा है....
दुनिया की ताकतें चाहती हैं कि उनका ही आधिपत्य बना रहे, लेकिन भारत जैसा देश आगे बढ़ेगा तो, दुनिया में सुख शांति होगी।
कुछ ताकतें भारत को अस्थिर करना चाहती हैं, हमें उनसे सावधान रहना चाहिए, सतर्क रहना चाहिए।
: रामलाल जी, अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख RSS
माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!!
राष्ट्र की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा के प्रति आपकी प्रतिबद्धता तथा सहकारिता के माध्यम से जनकल्याण के प्रयास राष्ट्रहित के लिए हम सभी को प्रेरित करते हैं!!
#HBD#AmitShah
नागपुर में शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के अवसर पर परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के सशक्तिकरण सहित कई विषयों पर विस्तार से अपनी बातें रखी हैं।
सेवा और राष्ट्र निर्माण पर उन्होंने पूरा बल दिया है, जो संघ के सभी स्वयंसेवकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है।
उन्होंने पंच परिवर्तन का भी उल्लेख किया है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
@RSSorg@DrMohanBhagwat
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LIVE: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @NitinNabin जी की नई दिल्ली में "भारतीय जनसंघ के 75वें स्थापना दिवस" के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता https://t.co/Z60jTmByVR
जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी तक: एक अनवरत वैचारिक यात्रा! 🪔 🪷
21 अक्टूबर 1951 को श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई थी, जो एक ऐसे दौर में शुरू हुई जब देश विभाजन की त्रासदियों और विस्थापितों की समस्याओं से जूझ रहा था।
“एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” की दृढ़ हुंकार के साथ कश्मीर में परमिट सिस्टम के विरोध में डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा और देश की एकता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
डॉ. मुखर्जी के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी और नानाजी देशमुख जैसे महान नेताओं ने संगठन को एकात्म मानववाद और राष्ट्रवाद की नई शक्ति दी।
1975 के आपातकाल के कठिन दिनों में जनसंघ ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाई और 1980 में जनता पार्टी के विघटन के बाद भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi और गृह मंत्री श्री @AmitShah के नेतृत्व में, साल 2019 में अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपनों को पूर्ण किया गया।
‘राष्ट्र प्रथम’, ‘अंत्योदय’ और ‘एकात्म मानववाद’ के सिद्धांतों पर आधारित यह 75 वर्षों की लंबी और गौरवशाली यात्रा आज गरीब कल्याण, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास और हर घर जल जैसी योजनाओं के जरिए हर नागरिक के जीवन में उजाला फैला रही है।
राष्ट्र सेवा को समर्पित यह यात्रा अनवरत जारी है! 🇮🇳
ॐ सिद्धिदात्र्यै नम: ॥
शारदीय नवरात्रि के नवम् दिवस पर माँ सिद्धिदात्री को बारम्बार नमस्कार। माँ सिद्धिदात्री अपने सभी भक्तों पर कृपा करें एवं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें।
जय माता दी!
आप सभी देशवासियों को महानवमी (दुर्गा नवमी) की हार्दिक शुभकामनाएं और बहुत-बहुत बधाई!!
माँ सिद्धिदात्री आप और आपके परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का संचार करें,माता रानी से यही प्रार्थना हैं!!
#नवरात्रि#navratrispecial
एक आकस्मिक फोन कॉल, जब पीएमओ से श्रीगुरुजी को आया बुलावा
यह 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव राव 'गुरुजी' गोलवलकर के बीच हुए उस ऐतिहासिक संवाद और समन्वय की कहानी है, जिसने राष्ट्र को संकट के समय एक सूत्र में पिरो दिया था।
सितंबर 1965 की एक दोपहर, श्रीगुरुजी भोजन के पश्चात विश्राम कर रहे थे। तभी एक संदेशवाहक ने सूचना दी कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) उनसे सम्पर्क करना चाहता है। मामले की गम्भीरता को देखते हुए गुरुजी तुरन्त फोन पर आए। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे। शास्त्री जी ने संक्षिप्त शब्दों में राष्ट्र की परिस्थिति बतायी और कहा, "युद्ध चल रहा है, मुझे आपकी सहायता चाहिए। कल सुबह सर्वदलीय बैठक है, आप उसमें सादर आमंत्रित हैं।"
• "मैं राजनीतिज्ञ नहीं, कार्यकर्ता हूँ" : श्रीगुरुजी का स्पष्ट उत्तर
शास्त्री जी के निमंत्रण पर श्रीगुरुजी ने विनम्रता से उत्तर दिया, "शास्त्री जी, मैं किसी राजनीतिक दल का नेता नहीं हूँ, मात्र एक संस्था का कार्यकर्ता हूँ।" शास्त्री जी ने उनकी बात स्वीकार की, लेकिन जोर देकर कहा कि देश इस समय एक ऐसे दौर में है जहाँ उन्हें श्रीगुरुजी के मार्गदर्शन और संघ के सहयोग की आवश्यकता है। श्रीगुरुजी ने तुरन्त सहमति दी, लेकिन नागपुर से सुबह तक दिल्ली पहुँचने की चुनौती थी। शास्त्री जी ने इसका प्रबन्ध पहले ही कर रखा था और उन्हें तुरन्त बॉम्बे (मुंबई) के लिए रवाना होने को कहा, जहाँ से उनके दिल्ली आने की विशेष व्यवस्था की गयी थी।
• सर्वदलीय बैठक : 'आपकी सेना' नहीं, 'हमारी सेना' कहिए
7 सितंबर की उस ऐतिहासिक बैठक में एक दिलचस्प वाकया हुआ। बैठक में उपस्थित एक राजनैतिक दल के नेता बार-बार भारतीय सेना को 'आपकी सेना' (प्रधानमंत्री की सेना) कहकर संबोधित कर रहे थे। श्रीगुरुजी को यह बात खटक गयी। उन्होंने उस नेता को तब तक बीच में टोका, जब तक कि उन्होंने 'हमारी सेना' कहना शुरू नहीं किया। श्रीगुरुजी का मानना था कि युद्ध केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का होता है।
• राष्ट्र के नाम अपील : स्वयंसेवकों का रणघोष
बैठक के अगले ही दिन, 8 सितंबर को श्रीगुरुजी ने देशवासियों और स्वयंसेवकों के नाम एक संदेश जारी किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस संकट की घड़ी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, घायलों की सेवा करने और जनता का मनोबल ऊंचा रखने के लिए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करें। उन्होंने आह्वान किया कि जीत की इच्छाशक्ति हर नागरिक के भीतर जगनी चाहिए।
• युद्ध के मैदान में 'दूसरी सेना' : संघ का समर्पण
संघ स्वयंसेवक नागरिक प्रशासन की मदद में जुट गये साथ ही जब दिल्ली की पुलिस सीमावर्ती कार्यों में व्यस्त हुई, तो संघ के स्वयंसेवकों ने पूरी मुस्तैदी से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभाली।
• हवाई पट्टियों की सफाई
कश्मीर में बर्फबारी के बीच हवाई पट्टियों से बर्फ हटाने का कठिन कार्य स्वयंसेवकों ने किया ताकि सैन्य विमान उड़ान भर सकें।
• रसद और सेवा
सैनिकों के लिए भोजन के पैकेट तैयार करने से लेकर अस्पतालों में रक्तदान करने तक, स्वयंसेवक हर मोर्चे पर सक्रिय रहे।
• ताशकंद और शास्त्री जी को अन्तिम विदाई
युद्ध विराम के बाद जब शास्त्री जी रूस के ताशकंद जा रहे थे, तो गुरुजी ने उन्हें पत्र लिखकर समझौते के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपने सुझाव भेजे लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ताशकंद में शास्त्री जी के निधन की खबर मिलते ही गुरुजी सीधे गुवाहाटी से दिल्ली पहुँचे और अपने प्रिय प्रधानमंत्री को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
1965 का यह कालखंड भारतीय इतिहास में 'जय जवान, जय किसान' के साथ 'राष्ट्रीय एकजुटता' का भी प्रतीक बना, जहाँ वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर नेतृत्व और संगठन ने राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।।
#RSS100Years
दुर्गाष्टमी के पावन पर्व पर देश के सभी परिवारजनों को जय माता दी!!
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माँ दुर्गा की असीम कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करें तथा सभी के कष्टों को दूर कर जीवन को खुशियों और सकारात्मक ऊर्जा से भर दें!!
#नवरात्रि
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
माँ भगवती के महागौरी स्वरूप को समर्पित शारदीय नवरात्र की 'महाअष्टमी' पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर गंदे टॉयलेट की फोटो भेजने पर यात्रियों को मिलेंगा हजार रुपए का FASTag रिचार्ज
◆ यात्रियों को RajmargYatra ऐप पर गंदे टॉयलेट की फोटो के साथ शिकायत करनी होगी
#NationalHighway | National Highway | #FASTag | FASTag
संगठन के साथी, राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी जी की माताजी के देहावसान पर बस्ती स्थित उनके पैतृक आवास पहुँचकर दिवंगत माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति तथा परिजनों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य प्रदान करें।
@HarishD_BJP
!!ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः!!
जगतजननी माता के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि देवी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम!!
आपकी कृपा से हम सभी के जीवन में सुख-समृद्धि आए, यही करबद्ध प्रार्थना है!!
#मां_कालरात्रि#नवरात्रि#Navratri2026#jaimatadi