🔥सुनो......
"संघर्ष करता हुआ एक विद्यार्थी
हमेशा ख़ाली होता है
बस उसकी आंखें भरी होती है
कभी सपनों में कभी आंसुओं में" 💔
शुभ रात्रि...!!!🍫🥰
@harimohan55
""!!डूंगरी बाँध का मुद्दा एक " धर्म युद्ध " से कम नही !! *!! शाबाश नरेश, !*!! डूंगरी बाँध पर सबकी पोल खोल दी। !! कल भारजा कोंडली गाँव मे एक विशाल जनसभा के दौरान अपने भाषण मे नरेश ने बहुत हि शानदार और जानदार ढंग से लगभग सभी नेताओं की पोल खोल कर रख दी। ये सत्ये है की डूंगरी बाँध बनाने मे बीजेपी और कांग्रेस दोनो पार्टियों के नेता शामिल है। इस बाँध को लेकर जो दावे सरकार की और से सवाई माधोपुर और करोली जिले के किसानो और जनता से किये जा रहे है वो सिर्फ एक छलावा मात्र लगता है। राजनितिक गणित मे बीजेपी को कोई नुकसान नही है क्योंकि इन दोनो जिलों मैं अक्सर कांग्रेस का हि पलड़ा भारी रहता है। इसलिए उनको कोई फर्क नही पड़ने वाला । लेकिन कांग्रेस के सांसद, विधायक और प्रमुख नेता इस मुद्दे पर क्यों मुखर नही है ये आश्चर्य की बात है। सांसद साहब तो पहले जी बांध को बंधा हुवा मान चुके है क्योकि जिस तरह का सवाल उन्होंने अभी संसद मे उठाया उस से लगता है कि उनकी रुचि मुवावजा दिलाने मे ज्यादा है बांध को बन ने से रोकने मे नही। उनसे अच्छा प्रश्न तो बाप पार्टी के सांसद राजकुमार रोत का था जिन्होंने इसका विरोध करते हुए रद्द करने की मांग की। सबसे निराशा जनक रवैया स्थानीय विधायक मंत्रीजी का है जो शायद अपनी पार्टी की लाइन पर हि बोल रहे है न ही जनता की भावनाओं का आदर करते नजर आ रहे। अजीब बात है !! चुनावो मे सवाई माधोपुर की जनता ने उनका मान रखा और अब उनका ये बर्ताव समझ से परे है। ये ऐसे नेता है जिन्होंने अधिकतर जनता का हि साथ दिया है और कई बार अपनी हि सरकार और पार्टी के खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद किया है लेकिन डूंगरी बाँध मुद्दे पर ये नेताजी कौरव दल के साथ क्यों खड़े है ? पांडव सेना युद्ध मैदान मे जाने की तैयारी मे है। और उन्हे शायद नरेश के रूप मे एक अर्जुन मिल गया है जो इस इस धर्म युद्ध मे उनका नेतृत्व करने की तैयारी मे है। परिणाम कुछ भी हो सकता है। कौरव सेना भी बहुत बलशाली है। जिस तरह से युवा गंगापुत्र भीष्म ने अपने बाणो से गंगा के प्रवाह को रोक दिया था वो हि जोश और जूनून आज नरेश और उसकी सेना मे नजर आ रहा है । गंगापुत्र भीष्म की तरह भारजा मे जनसेलाब के सामने इस "" बनास पुत्र "" नरेश ने डूंगरी बाँध न बनने देने की जो प्रतिज्ञा ली है उसकी गूंज कौरव और पांडव दोनो धड़ों मे पहुंच चुकी है। इस क्षेत्र की जनता के लिए डूंगरी बांध का मुद्दा एक " धर्म युद्ध " से कम नही है। पाला बदलने वालों से सावधान रहे । क्योंकि अभी घोर कलयुग चल रहा है। !!
@NareshMeena__@Harimohan55
#डूंगरी_बांध_रद्द_करो
सरकार जनता को असली मुद्दों से भटका रही है। शिक्षा, रोजगार और महँगाई छोड़ लोगों को आपस में हिंदू मुस्लिम करवा रही है। जब तक जनता सवाल नहीं करेगी, गुमराह करने का यह खेल चलता रहेगा।
🔴 दुनिया का सबसे बड़ा मज़ाक!
चार वर्ण और 6743 जातियों में समाज को बाँटने के बाद जब वही लोग “हिंदुओं एक हो जाओ” का नारा लगाते हैं, तो यह एकता नहीं बल्कि पाखंड बन जाता है।
जब तक जाति रहेगी, तब तक एकता सिर्फ़ नारा ही रहेगी।
---
चार वर्ण बनाए, हजारों जातियाँ गढ़ीं…
फिर बोले – हिंदू एक हो जाओ!
🤡
यही है दुनिया का सबसे बड़ा मज़ाक।
चार वर्ण���
फिर उपजातियाँ…
फिर हजारों जातियाँ…
ऊँच-नीच, छुआछूत, भेदभाव, अपमान और शोषण…
हज़ारों साल तक समाज को इस तरह बाँटकर रखा गया कि
एक इंसान दूसरे इंसान को इंसान समझने को तैयार नहीं था।
किसी को मंदिर में घुसने का हक़ नहीं,
किसी को पानी छूने का हक़ नहीं,
किसी को बराबरी से जीने का हक़ नहीं।
और आज वही व्यवस्था,
वही सोच,
वही ठेकेदार…
हमें ज्ञान दे रहे हैं👇
👉 “हिंदुओं एक हो जाओ”
सवाल सीधा है —
❓ किस आधार पर एक हों?
❓ ���िस समाज को जानबूझकर 6743 टुकड़ों में तोड़ा गया, वह अचानक कैसे एक हो जाएगा?
एकता भाषणों से नहीं आती।
एकता पोस्टर से नहीं आती।
एकता नारे से नहीं आती।
एकता आती है बराबरी से।
एकता आती है सम्मान से।
एकता आती है जाति व्यवस्था खत्म करने से।
जब तक जाति है,
तब तक “हिंदू एकता” सिर्फ़ एक राजनीतिक नारा है,
एक भावनात्मक जाल है,
एक बहुत बड़ा और क्रूर मज़ाक है।
अब सवाल यह नहीं है कि
“हिंदू एक होंगे या नहीं?���
सवाल यह है कि —
👉 क्या ��म पहले इंसान बनेंगे या नहीं?
सोचिए।
समझिए।
और सवाल पूछते रहिए।
#दुनिया_का_सबसे_बड़ा_मजाक
#जातिवाद
#चार_वर्ण_6743_जातियां
#हिंदू_एकता
#पाखंड
#सामाजिक_न्याय
#बराबरी
#जाति_खत्म_करो
#पहले_इंसान_बनो
#सवाल_पूछो
#सच_कड़वा_होता_है
कानून का हाथ… पर इंसाफ़ का नहीं!
काग़ज़ों में कानून सबके लिए बराबर है,
लेकिन हकीकत में उसकी पहुँच गरीब और कमजोर तक ही सीमित क्यों है?
क्या अमीरी गुनाहों को धो देती है?
कानून लंबा है…
पर झुकता सिर्फ पैसे के सामने है।
सहमत हैं या नहीं?
कहते हैं “कानून का हाथ बहुत लंबा होता है”,
लेकिन अगर ज़रा ईमानदारी से देखें तो सवाल उठता है —
👉 वो हाथ हमेशा गरीब की गर्द�� तक ही क्यों पहुँचता है?
👉 अमीर के दरवाज़े पर पहुँचते-पहुँचते क्यों थक जाता है?
गरीब अगर भूख में चोरी कर ले,
तो कानून उसे उदाहरण बना देता है।
लेकिन अगर कोई अमीर
हज़ारों-करोड़ों का घोटाला कर दे,
तो वही कानून
जांच, तारीख, जमानत और घूस के चक्कर में
रास्ता बदल लेता है।
यह कोई कहानी नहीं,
यह रोज़ दिखने वाली हकीकत है।
यहाँ कानून की आंखों पर पट्टी नहीं है,
यहाँ तराज़ू झुका हुआ है,
और फैसला
जेब देखक�� सुनाया जाता है।
आज सवाल यह नहीं है कि
कानून सही है या गलत,
सवाल यह है कि
क्या कानून सबके लिए एक-सा लागू होता है?
अगर आपको भी लगता है कि
न्याय व्यवस्था में
गरीब सबसे आसान शिकार है
और अमीर सबसे सुरक्षित अपराधी —
तो इस पोस्ट को लाइक, शेयर और कमेंट करें।
खामोशी भी अन्याय का साथ होती है।
❓ कितने लोग सहमत हैं?
#कानून
#न्याय_व्यवस्था
#गरीब_और_अमीर
#दोहरा_न्याय
#सिस्टम_फेल
#सच_कड़वा_है
#आम_आदमी
#इंसाफ
#भ्रष्टाचार
#SocialJustice
#JusticeForAll
कानून का हाथ… पर इंसाफ़ का नहीं!
काग़ज़ों में कानून सबके लिए बराबर है,
लेकिन हकीकत में उसकी पहुँच गरीब और कमजोर तक ही सीमित क्यों है?
क्या अमीरी गुनाहों को धो देती है?
कानून लंबा है…
पर झुकता सिर्फ पैसे के सामने है।
सहमत हैं या नहीं?
कहते हैं “कानून का हाथ बहुत लंबा होता है”,
लेकिन अगर ज़रा ईमानदारी से देखें तो सवाल उठता है —
👉 वो हाथ हमेशा गरीब की गर्दन तक ही क्यों पहुँचता है?
👉 अमीर के दरवाज़े पर पहुँचते-पहुँचते क्यों थक जाता है?
गरीब अगर भूख में चोरी कर ले,
तो कानून उसे उदाहरण बना देता है।
लेकिन अगर कोई अमीर
हज़ारों-करोड़ों का घोटाला ���र दे,
तो वही कानून
जांच, तारीख, जमानत और घूस के चक्कर में
रास्ता बदल लेता है।
यह कोई कहानी नहीं,
यह रोज़ दिखने वाली हकीकत है।
यहाँ कानून की आंखों पर पट्टी नहीं है,
यहाँ तराज़ू झुका हुआ है,
और फैसला
जेब देखकर सुनाया जाता है।
आज सवाल यह नहीं है कि
कानून सही है या गलत,
सवाल यह है कि
क्या कानून सबके लिए एक-सा लागू होता है?
अगर आपको भी लगता है कि
न्याय व्यवस्था में
गरीब सबसे आसान शिकार है
और अमीर ��बसे सुरक्षित अपराधी —
तो इस पोस्ट को लाइक, शेयर और कमेंट करें।
खामोशी भी अन्याय का साथ होती है।
❓ कितने लोग सहमत हैं?
#कानून
#न्याय_व्यवस्था
#गरीब_और_अमीर
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#सिस्टम_फेल
#सच_कड़वा_है
#आम_आदमी
#इंसाफ
#भ्रष्टाचार
#SocialJustice
#JusticeForAll
🔴 “धर्म में उलझे रहो, सौदे ऊपर चल रहे हैं!”
जब जनता को हिंदू-मुसलमान में उलझाया जाता है,
तब सत्ता में बैठे लोग देश के संसाधनों के सौदे चुपचाप कर जाते हैं।
ध्यान भटकाओ, सवाल दबाओ और मुनाफा कमाओ — यही असली राजनीति है।
धर्म की बहस नीचे चलती है,
और पेट्रोल का सौदा ऊपर तय हो जाता है।
समझना जरूरी है, वरना हर बार नुकसान जनता का ही होगा।
तुम हिंदू-मुसलमान में ही लगे रहो लाला…
मंदिर-मस्जिद, टोपी-तिलक, नारा-जुलूस में उलझे रहो…
उधर सत्ता के गलियारों में देश के संसाधनों के सौदे चुपचाप तय हो जाते हैं।
ना टीवी पर बहस, ना प्राइम टाइम डिबेट,
ना राष्ट्रवाद का शोर, ना देशभक्ति का गीत।
जनता को धर्म में बांटना सबसे सस्ता हथियार है,
क्योंकि बंटी हुई जनता सवाल नहीं पूछती।
वो यह नहीं पूछती कि
पेट्रोल सस्ता किसे मिला,
नुकसान किसका हुआ,
और फायदा किसकी जेब में गया।
जब तक जनता
✔ महंगाई पर सवाल नहीं पूछेगी
✔ बेरोजगारी पर आवाज़ नहीं उठाएगी
✔ संसाधनों की लूट पर जवाब नहीं मांगेगी
तब तक हर सरकार आराम से कहेगी —
“लड़ते रहो आपस में, हम सौदे निपटाते हैं।”
अब फैसला हमें करना है…
धर्म के नाम पर लड़ना है
या हक़ और सवाल के लिए खड़ा होना है।
सोचिए…
समझिए…
और सवाल पूछिए।
#धर्म_की_राजनीति
#जनता_को_भटकाओ
#असली_मुद्दे
#महंगाई
#राजनीतिक_पाखंड
#सवाल_पूछो
#देश_के_संसाधन
#जनता_जागो
#सोचो_समझो