धन व्यय के तीन मार्ग हैं- दान,उपभोग तथा
नाश। जो व्यक्ति न तो दान करता है, ना ही
धन का उपभोग करता है,अन्ततः उसके धन
का न केवल विनाश होता है,अपितु वह धन
जाते-जाते रोग,शोक,भय आदि अनेकों कष्ट
भी देकर जाता है।
गुरु पूर्णिमा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग HKG 1994
मानव के लिए यथासंभव सदाचार की रक्षा
और प्रसार करना श्रेयस्कर है, धन-वैभव तो
आता जाता रहता है।
वस्तुतःधन-वैभव रहित मानव कमजोर नही,
बल्कि सदाचार और परिवार से मिले अच्छे
संस्कारों से विहीन मानव क्षीण और दरिद्र
होता है।
आपका दिन मंगलमय हो
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग HKG 1993
मनुष्य की आत्मा हमेशा जानती है,
कि सही क्या है, सत्य क्या है,
क्योंकि आत्मा स्वयं का अवलोकन,
चिन्तन करती है.
असल चुनौती तो मन को समझाने से
आरंभ होती है, क्योंकि वह सत्य जानते
भी उसे मानने से इनकार करता है.
आपका दिन मंगलमय हो
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग HKG 1992
संसारी भी क्रोधी, संत भी क्रोध करता है,
संसारी भी लोभी, संत मैं भी लोभ देखा
जाता है,संसारी भी अर्जन करता है,संत
भी अर्जन करता है,
संसारी भी संग्रहकर्ता है, और संत भी,
दोनों की क्रिया में समानता होने के बावजूद
भाव एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत होते हैं
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग HKG 1991
संत और संसारी दोनों के मन में चिन्ता होती
है, संत परमार्थ के लिए और संसारी स्वार्थ
वश चिन्तित रहता है, संत और संसारी के
बीच का भेद कर्मगत नहीं भावगत होता हैं,
दोनों में वाह्य स्थिति का नहीं अपितु अन्त
स्थिति का भेद होता है.
आपका दिन मंगलमय हो
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग HKG 1990
Niti Aayog MEETING headed by Mr. Sanjeet Singh, Addl, secretary cum project director, Dr.Pravin Kumar , specialist (E&F), Mr. Amarjeet Singh Bhandari, consultant (E&F) to discuss export policy and logistics issues, central &state government schemes time bound disbursement.
इस प्रकृति में सदा कुछ भी नहीँ रहने वाला
है,अतः जीवन उदारता के साथ जीने का
प्रयास करना श्रेयस्कर होगा,
सूर्य प्रातः अपने पूर्ण प्रकाश के साथ उदय
होता हैं, सायं होते होते उसका प्रकाश क्षीण
होने लगता है, रात्रि को चंद्रमा अपनी रश्मि
से धारा को आलोकित करता है
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग
गुणवान शत्रु से श्रेष्ठ गुणहीन मित्र है
मित्र यदि गुणहीन भी होगा तो हमारे
हित के विषय में ही चिन्तन करेगा
परन्तु गुणवान् शत्रु अपने गुणों का
प्रयोग अहित के लिये ही करेगा
मुसीबत आने पर जो साथ दे,वही
मित्र है,अच्छे दिनों में तो दुश्मन भी
दोस्त बन जाते हैं।
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग
प्रकृति का अपना एक शाश्वत नियम है
कि मान,पद प्रतिष्ठा वैभव कुछ भी और
कहीं भी शाश्वत नहीं रहता.
त्याग और नाश ये एक ही सिक्के के दो
पहलू हैं,स्वयं की इच्छा से किसी वस्तु
को छोड़ना त्याग तथा स्वयं की इच्छा न
होते हुए पदार्थ का छूट जाना नाश
कहलाता है.
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग HKG 1987
अनुशासन में बहकर ही नदी सागर तक पहुंच
कर महासागर ही बन जाती है, अनुशासन में
बंधकर एक लता ज़मीन से उठकर वृक्ष जैसी
महान ऊंचाई को प्राप्त कर लेती है,
अनुशासन में रहकर ही वायु पुष्पों की सुगंधी
को अपने में समेटकर स्वयं भी सुगंधित हो
उठती है.
सुप्रभात हरेन्द्रगर्ग HKG 1986