माननीय @narendramodi जी,
15 करोड़ हस्ताक्षरों के रूप में देश की जनभावना आपके समक्ष पहुँच चुकी है। विनम्र निवेदन है कि गौ माता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान के विषय में सकारात्मक निर्णय लेकर करोड़ों नागरिकों की आशाओं को सम्मान दें। 🙏
#गौ_सम्मान_आह्वान#GauSamman
माननीय श्री @narendramodi@PMOIndia गौ माता की दयनीय स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। आपसे विनम्र आग्रह है कि गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मानजनक दर्जा प्रदान करें तथा गो-रक्षा के लिए सख्त केंद्रीय कानून बनाकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
#gau_samman#गोमाता_राष्ट्रमाता
@RajCMO@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
दो जगह=निजी एवं सरकारी क्षेत्र की लैबो में रिएजेंट की खरीदारी,
दोनों जगह अलग अलग मेंटेनेंस का भुगतान
जांचों की गुणवत्ता पर मार,
सरकार पर अतिरिक्त भार,
फिर भी निजीकरण पर इतनी मेहरबानी
आखिर क्यों?
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
आज जांचों का भी निजीकरण किया गया हैं
गलत जांच रिपोर्ट विभाग की छवि धूमिल कर रही हैं
क्या मरीज हित में बात रखना गलत है ?
ऐसे क्या कोई सही बोलने की हिम्मत जुटा पाएगा?
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@RajCMO@DIPRRajasthan@RajGovOfficial
निजी लैब की मनमानी चरम पर
या तो सरकार को आर्थिक चूना लगाने की, चांदी कूटने की अधिकारी परमिशन दे
नहीं तो लैब बंद
सरकार के पास शुरू से साधन संसाधान सब है फिर प्रदेश की जनता के जांचों की गुणवत्ता से खिलवाड़ ?
@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan@RajCMO
लोकतांत्रिक तरीके से आवाज रखने पर सरकारी अध्यापकों पर FIR दर्ज कराना लोकतंत्र का गला घोंटने के समान है
अब सवाल है कि कमर्चारी अपनी आवाज कौनसे माध्यम से पहुंचाये?
क्योंकिअधिकारी काम करने को तैयार नहीं
लोकतांत्रिक आवाज को दबा दिया जाता है
@cmo@akhilarora93@svoruganti1466
LT समय पर रिपोर्ट न दे तो एक्शन
लेकिन आला अधिकारी कार्मिकों की फाइल ही अटका के बैठ जाये तो?
GP में राज. के LT दूसरे राज्यों से पिछड़े हुए
DPC, पदस्थापन तो मैराथनी रेस बन चुके
मागो पर लेग ब्रेक हैंड ब्रेक दोनों खींच रखे हैं
समाधान नहीं
@BhajanlalBjp@RajCMO@GajendraKhimsar
माननीय जब एक लैब टेक्नीशियन आए हुए मरीज की रिपोर्ट 5/6 घंटे में दे सकता है
तो विभाग में अधिकारी/कर्मचारियों को लंबा जमावड़ा 2-3 साल तक पदनाम परिवर्तन/ DPC जैसी मांगो पर लापरबाह है?
इन माँगो में तो कोई वित्तीय लाभ भी नहीं
फिर भी देरी?
प्रदेश के समस्त लैब टेक्नीशियन कर्मचारियों को विश्व लैब टेक्नीशियन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। चिकित्सा विभाग में लैब टेक्नीशियन मरीजों की समस्त जांचों की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे है जो कि इलाज का मुख्य आधार है।
@cmo@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan@GajendraKhimsar
खांसी में प्रेग्नेंसी की रिपोर्ट देने के बाद
मदर लैब ..
Dr ने 90 Rs की CBC लिखी
मदर लैब में HBA1C, B12, TSH, लगभग 850 की जांचे अपनी तरह से जोड़ दी
ये सरकार को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है
क्या इस पर एक्शन होगा?
राजस्थान के स्वास्थ्य संस्थानों में लैब की जांच से जुड़े कार्यों को हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को देने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व जनविरोधी है | यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा बल्कि मरीजों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए गंभीर संकट खड़ा करेगा | निजी कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए ऐसे निर्णय से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, इंटर्न, नर्सिंग स्टूडेंट्स और पैरामेडिकल स्टाफ की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर सीधा असर पड़ेगा,मरीजों को जांच और इलाज के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा वहीं इमरजेंसी सेवाओं में देरी जानलेवा साबित हो सकती है साथ ही बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने की मजबूरी से आम जनता की तकलीफ बढ़ेगी। उदाहरण के तौर पर बताऊं तो थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को समय पर जांच और उपचार नहीं मिल पाएगा वहीं वर्षों से अल्प वेतन पर संविदा पर जो लोग कार्य कर रहे थे उन्हें उम्मीद थी कि कभी न कभी सरकार उनके साथ न्याय करेगी और वर्षों की मेहनत का उन्हें सकारात्मक फल मिलेगा मगर सरकार के ऐसे तुगलकी फरमान ने पहले से संविदा पर लगे कार्मिकों के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को कहना चाहता हूं कि ऐसे निर्णय की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा करके हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को दिए गए कार्य पर रोक लगाए | चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे महत्वपूर्ण कार्य में निजीकरण को बढ़ावा देना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शुभ संकेत नहीं है |
@RajCMO
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में आरोप लगाया जा रहा है कि राजस्थान के चिकित्सा विभाग में संविदा/ठेके पर कर्मचारियों की नियुक्ति के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है और लाखों मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। खासतौर पर अस्पतालों की लैब में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी ठेका प्रणाली से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसे लेकर निजीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जनता का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी जरूरी व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थायी समाधान बेहद जरूरी हैं, ताकि मरीजों को बेहतर और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकें।
राजस्थान में चिकित्सा विभाग में संविदा/ठेके पर कर्मचारी लगाने के करोड़ों रूपए का नुक़सान एवं लाखों मरीजों के साथ धोखा हो रहा है।
अस्पतालों में Lab में काम करने वाले सब कर्मचारी ठेके से लिए गए हैं, निजीकरण को सबसे बड़ा नुक़सान देश प्रदेश की जनता को उठाना पड़ रहा है।
हर्निया के नाम पर बच्चेदानी निकाल ली,
और इसे कहते हैं “स्वास्थ्य सेवा” 🤡
फर्जी रिपोर्ट बनाओ → ऑपरेशन करो → बिल पास करो,
और सिस्टम कहता है सब नियम के अनुसार है।
डॉक्टर कम, दलाल ज्यादा
इलाज कम, कारोबार ज्यादा
आयुष्मान योजना इलाज के लिए थी ,
यहाँ तो “ऑपरेशन इंडस्ट्री” बन गई है।
मुख्यमंत्री निःशुल्क जाँच योजना….!!!
इसमें कैसे घोटाला होता है देखिए….
सबसे पहले अपनी चहेतों को जाँच का ठेका दो…
सरकारी अस्पताल में सैमप्ल लिए जाते हैं…
फिर वो जाँच के लिए भेजे जाते हैं…
वहाँ आगे कोई मशीनें हो या ना हो…
अपनी मर्ज़ी से जाँच के रिज़ल्ट चेप देते है…
हींग लागे ना फिटकिरी… रंग चोखा…
मरीज़ जिए या मरे…. करम फूटे उसके…
राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना का ज़मीनी हकीकत गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
एक ही मरीज कैलाश देवी मीना की दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट और दोनों में आंकड़े अलग। यह सिर्फ एक केस नहीं , बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल है।
अब मुद्दा सिर्फ एक गलती का नहीं है बल्कि
→ क्या लैब में मशीनें ठीक से कैलिब्रेटेड हैं?
→ क्या सैंपल कलेक्शन और स्टोरेज सही तरीके से हो रहा है?
→ क्या टेक्नीशियन प्रशिक्षित और योग्य हैं?
→ क्या रिपोर्टिंग सिस्टम में कोई डेटा मैनिपुलेशन या लापरवाही है?
→ एक ही कंपनी को ठेका देने से क्या मोनोपॉली और जवाबदेही की कमी नहीं बढ़ रही?
अब सवाल डायग्नोसिस ही संदिग्ध होगा, तो इलाज भी गलत होगा और इसका सीधा असर मरीज की जान पर पड़ता है।
लोग सिर्फ टेक्नीशियन की कमी नहीं, बल्कि पूरे मॉडल पर सवाल उठा रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ी कोई छोटी लापरवाही नहीं, यह सीधा जनस्वास्थ्य का खतरा है।