@Tripathi0_ जी मैम मैंने आज तक बिग-बाॅस का एक भी पूरा ऐपिसोड नहीं देखा है, उतना ही देखा है जितना चैनल बदलने में समय लगता है, हालाँकि मेरी श्रीमती ने जरुर कुछ भाग देखकर मुझे भी देखने को कहा था,परन्तु कुछ देर देखने के बाद ही यह एक प्रोपेगेंडा और वर्गल शो समझकर इसे देखना हमेशा के लिए बंदकर दिया
कल खिलजी के बारे में पढ़ रहा था। तथ्य है कि उसे बहुत कष्टप्रद मृत्यु प्राप्त हुई थी। पेट में पानी भर जाने से उसकी मृत्यु हुई थी, पर दो वर्षों से उसे कोढ़ हो गया था और अंग सड़ने लगे थे।
हालांकि ऐसी बीमारियां किसी सभ्य-स��्जन व्यक्ति को भी हो सकती हैं, पर जब किसी अत्याचारी, असभ्य, बर्बर के साथ ऐसा होता है तो उस विश्वास को बल मिलता है कि आदमी को उसके कुकर्मों का फल यहीं मिल जाता है। यह होता ही है, ऐसा होना ही चाहिए...
ऐसा केवल खिलजी के साथ नहीं है। मध्यकाल के लगभग हर अत्याचारी शासक की मृत्यु बड़ी कष्टप्रद रही थी। मुगलों की तो परम्परा ही बन गयी थी कि बुढ़ापे में अपने बेटों को आपस में लड़ कर एक दूसरे को मारते हुए देख कर तड़पते हुए मरना था। अकबर, जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब... सब बुढ़ापे में अपने बच्चों का युद्ध देख कर तड़पते हुए मरे।
पारिवारिक षड्यंत्रों में अपने दो बेटों मुराद और दनियाल की मौत देख कर टूट चुका अकबर जहांगीर के आगे गिड़गिड़ाता रहा, पर वह इसके लोगों को मारता रहा। उसने अबुल-फजल जैसे अकबर के अधिकांश करीबियों को मार दिया और बादशाह गिड़गिड़ाते तड़पते रहे, मर गए। जहांगीर के साथ भी यही हुआ।
शाहजहां को दुनिया एक प्रेमी के रूप में जानती है, पर वह भी उतना ही क्रूर था जितना अन्य मुगल थे। हिंदुओ पर अत्याचार के मामलों में वह दूसरों से कहीं अधिक कट्टर था। उसकी मृत्यु तो और दुखद हुई। उसके प्रिय बेटे दारा शिकोह का कटा हुआ सर खंजर की नोक पर टांग कर पूरे आगरा में घुमाया गया और अंत में कैदी शाहजहां के आगे थाल में रखा सर पेश किया गया। और यह सब किया उसके दूसरे बेटे ने... अपने एक बेटे द्वारा की गई अन्य सभी बेटों की हत्या पर रो चुका शाह उस कैदखाने में कैसे तड़प तड़प कर मरा होगा, इसका सहज अंदाज लगाया जा सकता है।
ऐसा केवल इन्ही के साथ नहीं हुआ, हर अत्याचारी शासक के अंतिम समय की दशा लगभग ऐसी ही रही है। और सबसे बड़ी बात, सबको सत्ता से धकिया कर बाहर किया गया है। कोई भी शान्ति से अपनी अगली प��ढ़ी को सत्ता नहीं सौंप सका।
मुझे लगता है इतिहास की किताबों में बादशाहों की मृत्यु अवश्य पढ़ाई जानी चाहिये। ताकि सबको पता रहे कि कर्मों का हिसाब यहीं होता है। एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है कि जनता असभ्यों के दुखद अंत की कथाएँ याद रखे।
देश बदल रहा है अब वह दिन दूर नहीं जब यह हिन्दूराष्ट���र होकर ही रहेगा। चाहे कोई कुछ भी कह और कर ले 2024 का आमचुनाव तो हिन्दूराष्ट्र के नाम पर ही लड़ा जायेगा।
@Pskaur5@beingarun28 जनप्रीत जी वास्तव में आप मंदबुद्धि लग रहें हैं, आपने अपने ही टैग लाइन में समय को बादशाह बताया है,अभी उनका समय है इसलिए वह बादशाह हैं, नहीं तो मसखरे भी कभी कहीं के मुख्यमंत्री बन सकते हैं! दिल्ली पंजाब, बंगाल आदि अनेक उदाहरण भारतवर्ष में देखे जा सकते हैं।
नूपुर शर्मा बहन को पार्टी से ���िकाले लगभग एक वर्ष हो गए, 1 साल से वो खुद के ही घर में कैद जैसी है, काजल हिंदुस्तानी को जेल भेजा..ऐसे कई मौकों पर आपकी विचारधारा घुटने टेकती नजर आई नतीजा कर्नाटक रिजल्ट सामने है राजनीति में छोटी-छोटी चीजें बहुत मैटर करती हैं आगामी चुनाव जीतना है तो 2014 वाले BJP बनिए मोदी जी व अमित शाह जी..🙏🏻
#ArvindKejriwal के बंगले की मुँह दिखाई अब ज़रूरी है।उन्हें ख़ुद ही अपने भव्य बंगले के दरवाज़े दिल्ली की आम जनता के लिए खोल देने चाहिए।वो जनता को अपने घर आमंत्रित करें और ख़ुद ही दिखा दें कहाँ क्या लगा है।इससे सब कुछ ब्लैक एंड व्हाईट हो जायेगा।
@TweetAbhishekA ज्यादा ऐसे कपडों में लड़किया देखनी है तुम जैसे इंसान को तो हाँ जा सकती है।
तेरी बहन को भेज, इन कपडों में मेट्रो में रोज।
फिर तुझे Follower की भीख न��ीं माँगनी पड़ेगी।
उसकी फोटो लगाना सब follow कर लेंगे।
भ्रष्टाचार का मूल जड़ है अवैध मतदाता। मुख्य चुनाव आयुक्त को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए कि भारत में कहीं भी अवैधरूप स निवास करनेवाले को मतदान करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, चाहे वे किराए में भी क्यों न रहे।#pmoindia #