ऐसे मौसम में कि जब लुत्फ ए सफ़र आने लगे
क्या करे कोई अगर ख्वाब में घर आने लगे
जब वो मौजूद थे दिखते ही नहीं थे अक्सर
हाए वो जबसे गए, कितना नज़र आने लगे
हरमन दिनेश
जिनसे उम्मीद थी पा लेंगे कभी थाह मेरी
वो मेरी आह समझ पाये न परवाह मेरी
ऐसा नौकर था मैं जिसने कि बहुत काम किया
ऐसा मालिक था मेरा, काट ली तनख्वाह मेरी
~हरमन दिनेश
@harmandinesh1#Maalik#Shair
कभी दरों से कभी खिड़कियों से बोलेंगे
सड़क पे रोकोगे तो हम घरों से बोलेंगे
जबाँ कटी तो इशारे करेंगे आँखों से
जो सर कटे तो हम अपनी धड़ों से बोलेंगे
हमारा नाम भी लिख लीजे अपनी गोली पर
कि अब निकल के हम अपनी हदों से बोलेंगे
◆ दिनेश हरमन