[ New Book ]
गौर गोपाल दास की पुस्तक 'हर मंजिल होगी आसान' हाल में हार्पर कॉलिन्स से प्रकाशित हुई है। यह किताब You Can Have it All का हिंदी अनुवाद है। अनुवाद किया है बासब चंदना ने।
कहानी जैसलमेर में एक शादी के दौरान शुरू होती है जहाँ गौर गोपाल दास दो परिवारों के बीच छिपे तनाव और दुविधाओं को देखते हैं। बातचीत के जरिए वे लोगों के डर और इच्छाओं को समझकर उन्हें सही मार्गदर्शन देते हैं। पुस्तक महत्वाकांक्षा और आत्म-संतुष्टि के बीच फँसे लोगों को एक नई दिशा दिखाती है।
अपने चिर-परिचित हास्य और सहज ज्ञान के साथ लेखक हमें बताते हैं कि कैसे अपना दृष्टिकोण बदलकर हम जीवन की जटिलताओं को समझ सकते हैं और खुद के प्रति दयालु बनकर खुशी पा सकते हैं।
किताब यहां उपलब्ध है : https://t.co/J4wfHiPU0H
@HarperCollinsIN@gaurgopald@jilpanz@harminderbooks
इरा टाक ने अपने पालतू डॉग पिकोलो के दृष्टिकोण से एक मार्मिक कृति को लिखा है, जो मानवीय संवेदनाओं, वफादारी और बेजुबान के निस्वार्थ प्रेम की भावनाओं को खूबसूरती से गहराई से चित्रित करती है।
किताब यहां उपलब्ध है : https://t.co/7tgrMtDeDo
@AuthorEraTak@prabhatbooks@harminderbooks
[ Book of the Week ]
पुस्तक 'हिट उपदेश' समकालीन समाज, मीडिया और बाज़ारवाद पर एक बेहद तीखा और मारक व्यंग्य है। लेखक यशवंत व्यास ने अपनी चिर-परिचित शैली में आज के 'हिट' होने की अंधी दौड़ और सफलता के खोखले उपदेशों का शानदार विश्लेषण किया है।
किताब यहाँ उपलब्ध है : https://t.co/ymrvUfw1hC
@UnboundScript@yv_post@harminderbooks
विस्तार न्यूज के ग्रुप एडिटर ब्रजेश राजपूत के उपन्यास 'द एवरेस्ट गर्ल' को मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2024 के प्रादेशिक 'वृंदावन लाल वर्मा पुरस्कार' के लिए चुना गया है। इसके तहत उन्हें 51 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह दिया जाएगा। यह लेखक की दूसरी पुरस्कृत कृति है।
यह किताब सीहोर जिले की मेघा परमार की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली मध्य प्रदेश की पहली महिला पर्वतारोही हैं। इसमें एक साधारण गाँव की लड़की के कड़े प्रशिक्षण और दुनिया के सबसे ऊँचे शिखर तक पहुँचने के असाधारण संघर्ष को बहुत सरल ढंग से दर्शाया गया है।
किताब यहाँ उपलब्ध है : https://t.co/qXKl7tplgS
@drbrajeshrajput@ManjulPubHouse@jhasushant@harminderbooks
3) ...क्यों बड़े-बुजुर्ग पीपल के भूत की बात कहते थे?
सैकड़ों जिलों की यात्रा के अनुभव भी आपको पीपल बाबा बताएँगे.
आइए आप भी पीपल बाबा की इस यात्रा में शामिल हो जाइए...
पीपल बाबा की दोनों पुस्तकें अंग्रेजी और हिंदी में देखिए किस गति से दौड़ रही हैं. दरअसल पीपल बाबा ने जो कमाया है, उसका कुछ हिस्सा उनकी किताबों के पाठक हैं. यह किताब हमें फिर से जमीन से जोड़ने में मदद करती है...(1)..
@PeepalBaba@PenguinIndia@mathur_vaishali
2) मिट्टी की कीमत, पौधों की कीमत, और सबसे बड़ी बात खुद की कीमत के बारे में बात करती है.
इस किताब में पीपल बाबा ने अपनी कहानी के साथ जोड़कर हमें याद दिलाया है कि हमारा प्रकृति से नाता क्यों है?
पुस्तक ‘ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया’ हिंदी सिनेमा और उर्दू-हिंदी साहित्य के उस महान इंक़लाबी और रूमानी शायर का रूहानी सफरनामा है जिसे पूरी दुनिया साहिर लुधियानवी के नाम से जानती है। मंजुल पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित 384 पृष्ठों की इस शानदार और शोधपरक पुस्तक को टीवी के जाने-माने बायोपिक निर्माता, निर्देशक और वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने लिखा है। यह पुस्तक एक ऐसे बच्चे अब्दुल हई की दास्तान है, जिसका असली नाम तो हममें से बहुत से लोग आज भी नहीं जानते, लेकिन बाद में यही बच्चा अपनी बेबाक शायरी के दम पर शब्दों का ऐसा जादूगर बन बैठा कि जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।
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17 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, वर्तमान में कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘अपनापन’ पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 वर्षों गहरे संबंधो से उपजे आत्मीय अनुभव साझा किए हैं।
284 पेज की इस पुस्तक को 11 अध्यायों में बंटा गया है- जो दिसंबर, 1991 की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निकली ऐतिहासिक एकता यात्रा से शुरू हो कर गुजरात के विकास मॉडल, नर्मदा मॉडल से होते हुए आज के समय में जन भागीदारी से विकसित होते भारत तक जाती है।
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डॉ. ओम प्रकाश शुक्ल द्वारा लिखित उपन्यास ‘द्रोह : नियति का न्याय’ समकालीन भारतीय समाज की एक बेहद संवेदनशील और विचारोत्तेजक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसका सीधे मनुष्य के जीवन और उसके सरोकारों से जुड़े होना है। लेखक ने अपनी आत्यंतिक मानवीय चिंतन प्रक्रिया के माध्यम से एक ऐसी कथा को जन्म दिया है, जो पाठक को भीतर तक झकझोर देती है। यह उपन्यास आज के दौर के ग्रामीण जीवन, वहां के मनोविकार और आधुनिक व्यवस्था पर काबिज भ्रष्टतंत्र व दलालों के गठजोड़ का सजीव चित्रण करता है।
विस्तार से पढ़ें : https://t.co/KlG8xBFMVF
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[ New Book ]
आज की इस बेहद मरुस्थली और कंक्रीट से भरी तेज रफ़्तार ज़िंदगी में हम सब कहीं न कहीं भीतर से सूखे और थके हुए महसूस करते हैं। हम भूल चुके हैं कि जब-जब मनुष्य अशांत हुआ है, उसे सच्चा सुकून और उत्तर हमेशा प्रकृति की शरण में ही मिले हैं। पीपल का पेड़ जिसे हमारी संस्कृति ने सदियों से पूजनीय माना है, वह सिर्फ एक पेड़ नहीं बल्कि ऊर्जा और परम चेतना का एक जीवित स्रोत है।
अपनी नई पुस्तक 'पीपल की छाँव' में पीपल बाबा ने अपने जीवन के अनमोल संस्मरणों, कड़वे-मीठे अनुभवों और गहन चिंतन के माध्यम से यह दिखाया है कि पर्यावरण की रक्षा करना वास्तव में खुद को बचाने जैसा है। एक आधुनिक और वैज्ञानिक चश्मे से भारतीय संस्कृति के इस महान प्रतीक को समझने का यह सफर आपका नज़रिया बदल देगा।
किताब यहां उपलब्ध है : https://t.co/fJZpHzSEGA
@PenguinSwadesh@PenguinIndia@mathur_vaishali@drsanjivkmishra
सविता शर्मा नागर द्वारा रचित 'चाँदघाटी की अनारो' एक ऐसी कृति है जो प्रेम की कोमलता और पितृसत्ता के क्रूर अहंकार के बीच के द्वंद्व को निर्भीकता से उजागर करती है। यह केवल बावरिया समाज की एक औरत की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस स्त्री की आवाज़ है जिसका अस्तित्व पुरुष के 'अहम्' की भेंट चढ़ गया।
@Vani_Prakashan@kitabwali
(2) इसी तरह मौसम को देख लिया जाए। पसीना बहता है। प्यास लगती है। प्यास नहीं लगती। पानी ज़रुरी नहीं। मौसम की करवट। मौसम का बदलना ज़रुरी है।
जब जीवन सादगी से लिपटकर चलता है, तो जीवन सादगीपूर्ण होता है।
वक्त तेज़ है। विचार दौड़ते हैं, सरपट। चाहकर पकड़ना, फंदे में फांसना नामुमकिन सा लगता है।
जब कुछ नहीं होता, तो भी कुछ होता है।
जब मुझे लगता है कि सर्दी के लिए कंबल की ज़रुरत है, तब उसे ओढ़ना ज़रुरी है। खाना-पीना-जीना सब भी ज़रुरी है।
ज़रुरी वह सब है जिसकी ज़रुरत है। (1)