इस बंदे को एक बार जंतर - मंतर आना चाहिए था .
ये न किसानों के आंदोलन में गया . न पहलवानों के आंदोलन में गया . न नौजवानों के आंदोलन में आया क्योंकि इसे पता है कि आया तो क्या लेकर जाएगा .
ऐसे लोगों ने देश के जनमानस को ख़राब करने में बहुत अहम भूमिका निभाई है .
पूछता है भारत । इंडियन वांट्स टू नो -
भारत सरकार के मंत्री सोरोस/चीन/अमेरिका/पाकिस्तान/बांग्लादेशी/पाकिस्तानी/अर्बन नक्सल के साथ क्या कर रहे हैं?
क्या वे भी टुकड़े टुकड़े गैंग में शामिल हो गए है ?
नेशन वांट्स तो नो!!