एक कांग्रेस के नए-नवेले नेता जी हमारी स्कॉर्पियो ले गए तो हमने @INCIndia की प्रवक्ता @priyanka81_INC बहन से अनुरोध किया कि हमारी स्कॉर्पियो वापस करा दीजिए तो #प्रियंका_जी ने वादा किया है कि वह वापस करा देंगी।
हमें उम्मीद है कि वह अपने वादे पर खरा उतरेंगी
और यह साबित करेगीं कि कांग्रेसी वादे के पक्के होते हैं,वैसे जनता यह कहती है कि वह वादा नहीं निभाते।
@arpitaarya जी आप गवाह रहना और हमें उम्मीद है @kashikirai जी भी सहयोग करेंगे स्कॉर्पियो वापस कराने में।
पहले बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए दुर्भावना में कार्यवाही फिर सभी विपक्ष के लोगों को घरों पर कैद कर देना एक स्वास्थ्य लोकतंत्र में अस्वीकार्य है।
एक अधिवक्ता को अदालत परिसर जाने से रोकना कौनसा लोकतंत्र है?
क्या ये मेरा व मेरे मुवक्किल के अधिकारों का हनन नहीं?
जिनका काम कानून व्यवस्था बनाए रखने का है वो वकीलों के घर को घेरे हुए हैं।
हम अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं और रहेंगे.
जय संविधान
आज @aimim_national माननीय अध्यक्ष @asadowaisi सहाब के आदेशानुसार @imshaukatali साहब के निर्देश पर सहारनपुर अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व वाला प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर जाना था,लेकिन शाम 7:00 से ही पुलिस ने कैद कर दिया, क्या यही लोकतंत्र की खूबसूरती है?
रात के 1:30 बज रहे हैं और घर पर पुलिस का पहरा है कि आप घर से नहीं निकाल सकते।
क्या भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(D) हर भारतीय नागरिक को कहीं भी जाने की अनुमति नहीं देता?क्या यह मौलिक अधिकारों का हनन नहीं है?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को आज सुबह 5 बजे ढहा दिया गया।
क्या मुसलमानों के लिए अब मज़हबी आज़ादी का संवैधानिक हक़ भी नहीं बचा है? हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमज़ोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोज़र क्यों चलाया जाता है?
मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज़ अदालत में पेश करके यह साबित करने की कोशिश की कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। एक सदी से भी ज़्यादा वक़्त से वहाँ लगातार नमाज़ होती रही है। यानी यह कोई आज खड़ी कर दी गई इमारत नहीं है, बल्कि लंबे अरसे से एक इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है। यही वक़्फ़ बाय यूज़र की बुनियाद है, जिसे क़ानून में भी मान्यता मिली है।
और Limitation Act का भी यही उसूल है कि हुकूमत किसी ज़मीन पर एक सदी से ज़्यादा पुरानी, खुलेआम और लगातार चली आ रही क़ब्ज़ेदारी को अचानक नज़रअंदाज़ करके एक दिन उठे और कहे कि अब यह ज़मीन हमारी है।
जब एक सदी से ज़्यादा अरसे से खुला और लगातार क़ब्ज़ा रहा है, तो रियासत यह कैसे मान सकती है कि क़ब्ज़ा कल से शुरू हुआ था? हुकूमत की दलील को मान भी लें, तो इतने लंबे अरसे की क़ब्ज़ेदारी के बाद adverse possession का सवाल तो उठेगा ही।
मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।
कुछ लोगों को शायद मस्जिद दिख जाने पर भी तकलीफ़ होती है। लेकिन यह उनका मसला है, हमारा नहीं। नज़र फेरनी है तो फेर लो। लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद
Aimim को कोई झटका नहीं लगा ऐसा आना-जाना लगा रहता है क्योंकि जब किसी को इज्जत मिल जाती हैतो और लोग जानने लगते हैं फिर वह अपनी इज्जत का सौदा करने लगते हैं सौदे में कोई इज्जत नहीं मिला करती वह समझते हैं कि हम एक बड़ा चेहरा बन गए और उनका बड़ा चेहरा ऐसा होता है कि एक-दो दिन वह बड़े है
आज 80वे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आज अजराड़ा में मास्टर तारिक साहब के मदरसे में झंडारोहण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, इस अवसर पर मेरे साथ किठौर विधानसभा अध्यक्ष मौलाना आदिल साहब, यूथ विधानसभा अध्यक्ष आमिर साहब, आजाद जावद जी, मुकीम साहब समेत गणमान्य साथी उपस्थित रहे।
हमारी पार्टी @aimim_national के मुजफ्फरनगर के मीरपुर विधानसभा अध्यक्ष फरमान साहब ने तिरंगा यात्रा की अनुमति ली 15 अगस्त के अवसर पर लेकिन वहां के SHO रात में 10:00 बजे फोन करके तिरंगा यात्रा को मना करते हैं।
क्या भारतीय जनता पार्टी की सरकार में एमआईएम के लोग हाथ में भारत की शान तिरंगा लेकर खुशी का इज़हार भी नहीं कर सकते? क्या देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर खुशी का इजहार करना,तिरंगा हाथ में लेकर चलना अब अपराध हो गया है उत्तर प्रदेश में?
हम @muzafarnagarpol@DmMuzaffarnagar से अनुरोध करते हैं की तत्काल इस प्रकार के अधिकारियों का संज्ञान लिया जाए और यात्रा की अनुमति को निरस्त न किया जाए।
@Uppolice .
क्या संदेश जाएगा कि देश की आजादी का जशन मानने से रोका जा रहा है?
@asadowaisi
@PoojaMathur01@bihar_police@samrat4bjp उनकी आस्था आस्था है और दूसरे की आस्था नहीं है यह जो बेवकूफ लड़का है उस पर जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए न जाने ऐसे मालूम क्यों पैदा हो रहे हैं
मुंडालीमें चारोंतरफपानीही पानी है मस्जिदमदरसा स्कूल घर सब में पानी भरचुका है लेकिन विधायक जीने कोई खबर नाहीली अधिकारियों से बातनही की हम विधायक जीसे कहते हैं किअगर आप यहकामनहींकरसकते तो अगलेचुनावमें वोटमांगने मतआना डीएम साहब और सचिव साहबसेअनुरोधहै कि आप मुंडालीकीसमसया पर ध्यानदें
वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा।
अब भागीदारी की बात होगी ताबेदारी कि नहीं।।
हम भागीदारी और सम्मान चाहते हैं जिसके माध्यम से हम अपने समाज के साथ न्याय कर सकें शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सुरक्षा, सम्मान के रूप में।
हमारे नेता ने स्पष्ट किया कि हमारे दरवाजे हर उस दल के लिए खुले हैं जो ससम्मान भागीदारी देते हुए बीजेपी को हराने और सेकुलर वोटो का बंटवारा रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
मैं एक बात कहना चाहता हूं कि वर्तमान किठौर विधायक @ShahidManzoor साहब से आने वाले चुनाव में मुंडाली में वोट मांगने ना आए अगर आपसे यहां का नला नहीं बन पा रहा है @DmMeerut साहब से मैं कहना चाहता हूं कि आप हमारे मुंडाली में नाला बनाने की आवश्यकता करें @myogiadityanath@sarkar64881
देखिए! खुद को संत कहने वाले दो नेता किस ‘शालीनता’ से बात कर रहे हैं। यह भाषा है! वो भी संतों की? और ये अखाड़ा किसने मुहैय्या कराया? ज़ाहिर है टीबी वालो ने!