एक बाप को बुढ़ापा उतना कमज़ोर नहीं करता,
जितना औलाद का रवैया कमज़ोर कर देता है..
माँ, बाप और जवानी ज़िन्दगी में सिर्फ एक ही बार मिलते हैं,
और माँ, बाप से बड़ी कोई दौलत नही..
Aala Hazrat Farmate Hai:
Jab Tak Nabi E Karim ﷺ Ki Sachchi Tazeem Naa Ho Umr Bhar Ibadat E llaahi Me Guzare Sab Bekaar Wa Mardood Hai.
(Tamheed Ul Imaan Safha 53)
*हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि*
*वसल्लम इर्शाद फ़रमाते हैं*
*मेहमान अपना रिज़्क़ लेकर*
*आता है और खिलाने वालों के*
*गुनाह लेकर जाता है यानी*
*उनके गुनाह मिटा देता है।*