सत्ता गई, अकड़ नहीं गई!
एक प्रशासनिक अधिकारी को "ऐ आईएएस" कहकर बुलाना हो या भरे मंच से पुलिसकर्मियों को "बदतमीज" और "ऐ पुलिस…ऐ पुलिस" कहकर अपमानित करना, ये लेवल सिर्फ अखिलेश यादव का ही हो सकता है।
जब मुखिया खुद इतना बदजुबान हो, तो कार्यकर्ताओं की तमीज की तो बात ही छोड़ो। जो व्यक्ति अपने पिता को मंच से अपमानित कर भगा दे, उससे शिष्टाचार की उम्मीद करना बेईमानी है।
SC/ST Act के दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब जवाबदेही तय करने का वक्त है।
कोर्ट ने मामले में यह जांच करने के निर्देश दिए हैं कि SC/ST Act के तहत मिलने वाली राहत राशि का कहीं दुरुपयोग तो नहीं हुआ और जांच को तय समय में पूरा करने को कहा है। (Navbharat Times)
अब सवाल सिर्फ एक मामले का नहीं है—
कितने मुकदमों में आरोप सही पाए गए?
कितने मामलों में आरोप साबित नहीं हुए?
और कितने मामलों में कानून का इस्तेमाल दबाव बनाने या फंसाने के लिए किया गया?
कानून वंचितों की सुरक्षा का मजबूत हथियार है—उसे किसी निर्दोष को फंसाने का हथियार नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
न्याय वास्तविक पीड़ित को मिले और कानून के दुरुपयोग पर भी कार्रवाई हो।
#SCSTAct #SCSTActMisuse #AllahabadHighCourt #UttarPradesh #JusticeForAll #LawAndJustice #UPNews
Satya Niketan PG collapse में 6 छात्रों की जान चली गई और कई घंटों तक rescue operation चलता रहा। लेकिन इस tragedy ने एक और कड़वी सच्चाई सामने ला दी आज disaster sites पर rescue से ज्यादा cameras नजर आते हैं।
Viral hammer clips, photo-ops और content की race के बीच सबसे जरूरी सवाल खो गया: जब लोग मलबे के नीचे फंसे थे, तब priority जान बचाना थी या footage बनाना?
@SinghRanu18
I have showed the building which fall in 2022 and guess what? No action was taken. Kejriwal said, aise toh 80% buildings seal karni padegi. What Rekha ji did? Passed an order today to seal buildings with a 5th floor! Now - I will go after a month to see the progress in this area of what is sealed and what is not!
हिंदू देवी-देवताओं और सनातन पर टिप्पणी करने का अधिकार अगर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर लिया जा सकता है, तो उसी अभिव्यक्ति पर सवाल पूछे जाने और असहमति का सामना करने का साहस भी होना चाहिए।
संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन किसी की आस्था का अपमान करने या गाली देने का लाइसेंस नहीं। स्वतंत्रता के साथ जवाबदेही भी आती है।
देश की राजनीति और हालात पर बोलना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन सार्वजनिक रूप से रखे गए विचारों और सोशल मीडिया पोस्टों पर सवाल उठना भी लोकतंत्र का ही हिस्सा है।
मुद्दा किसी व्यक्ति का नहीं, दोहरे मापदंड का है।
अगर किसी की राजनीतिक राय को मंच दिया जा रहा है, तो उसके विवादित या कथित anti-Hindu पोस्टों पर भी उतने ही सीधे सवाल क्यों नहीं पूछे जाते?
सवाल यह है—अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सिर्फ बोलने का अधिकार है, या अपने कहे हुए शब्दों पर सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी भी?
14 yo Anti Hindu Bigot Has 0 Friends in School.
"People troll me by saying "Beauty with No Brain"
"I'm doing politics because of the condition of Country"
Why No Podcasters are asking about her Anti Hindu Posts?
सनातन धर्म मे व्यक्ति के कर्म के आधार पर वर्ण तय होता है
शूद्र अपने कर्मों से ब्राह्मण बन सकता है
और ब्राह्मण अपने कर्मों से शूद्र
पर आजकल के भीमटो को बस गालियां देना आता है
0 नंबर वाली, #आरक्षण वाली मैडमों सहित सभी आरक्षणजीवी शिक्षकों, डंगर्स (Dengerous), नटुरे (Nature), फुटुरे (Future) वाली मैडमों को भी #शिक्षक_दिवस की बधाई।
ये ही आरक्षणजीवी लोग देश को विश्वगुरु बनाएंगे, इनके ही हाथों में हमारे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है ??
#शिक्षकदिवस