हमारे देश की सरकार पर सरकारी स्कूल व्यवस्था सुधर नहीं रही ऑफलाइन अच्छी एजुकेशन सरकार पर दी नहीं जा रही तो क्या सरकार ऑनलाइन अच्छी एजुकेशन दे पाएगी सोचने की बात है
स्कूल, एजुकेशन, स्वास्थ्य और सुरक्षा इन सब में सुधारो मैं भी चाहता हूं! पर सरकार विश्वास नहीं
#schoolthikkaro
Do you know why these teachers suddenly became so anti-Modi?
Because they might have got a hint of what’s coming.
Today, on Independence Day, PM Modi announced from the Red Fort that the government will provide free online coaching for various competitive exams.
Now, these frauds might see their careers coming to an end. 😹
पहली बात...
आज भी Abhinay Maths की कोई Offline Coaching नहीं है।
और Online Abhinay Maths App के सभी Courses की Fees ₹0 है।तो कम से कम मेरे नाम पर तो कुछ भी Logic मत दीजिए।
दूसरी बात...
अगर मोदी जी Competitive Exams के लिए Free Coaching ला रहे हैं, तो अच्छी बात है। मैं उसका स्वागत करता हूँ।
लेकिन अगर सरकारी स्कूलों की हालत ही ऐसी कर दी जाती कि बच्चों को Coaching की ज़रूरत ही न पड़ती... तो वो उससे भी बड़ा और सही फैसला होता।
और एक बात...
ऐसा भी नहीं है कि कोई Button दबेगा और अगले दिन Free Coaching शुरू हो जाएगी।
Teachers भी लाने होंगे...
Content भी बनाना होगा...
Technology भी चाहिए होगी...
System भी बनाना होगा...और यहीं आकर पूरा सिस्टम जवाब दे देता है|
और सबसे बड़ी बात...
बच्चे किस Teacher को पसंद करेंगे, किससे पढ़ना चाहेंगे... ये सरकार तय नहीं कर सकती। ये बच्चे तय करेंगे।
इसलिए अभी से हवा में खुश होने की ज़रूरत नहीं है।
बाकी, अगर सच में देश के हर बच्चे तक अच्छी और मुफ्त शिक्षा पहुँचाने का मिशन है...
तो मैं आज भी इस मिशन के साथ पूरी तरह हूँ।
एक भी पैसा लिए बिना, Lifetime पढ़ाने के लिए तैयार हूँ|
#schoolThikKaro
सरकार से मेरा यही सवाल है कि आखिर यह कब तक ऐसे ही चलता रहेगा। यह कब ठीक होगा। बातचीत से अक्सर समाधान निकल जाते हैं बातचीत होनी चाहिए और करप्टेड लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
देश में हेल्थ एजुकेशन और वूमेन सेफ्टी बेहतर होनी चाहिए
#StudentProtest#Jharkhand
झारखंड में आज जो हुआ, उसे सिर्फ एक Protest की तस्वीर समझकर आगे बढ़ जाना आसान है। लेकिन इसके पीछे हजारों युवाओं का भविष्य और भर्ती व्यवस्था पर उनका भरोसा जुड़ा है।
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने कुछ मांगें मानी हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बनी है।
आज विधानसभा मार्च के दौरान आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज तक की स्थिति बनी।
सरकार से मेरा सीधा सवाल है - अगर छात्रों की शिकायतें जायज़ हैं, तो उनका भरोसा बातचीत और पारदर्शी जांच से क्यों नहीं जीता जा सकता?
और छात्रों से भी यही अपील है - अपनी लड़ाई शांतिपूर्ण रखें। किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ आपके जायज़ मुद्दे को कमजोर कर सकती है।
सरकार और छात्रों, दोनों के लिए रास्ता बातचीत का ही होना चाहिए।
#StudentProtest #Jharkhand #HimanshiSingh
झारखंड में आज जो हुआ, उसे सिर्फ एक Protest की तस्वीर समझकर आगे बढ़ जाना आसान है। लेकिन इसके पीछे हजारों युवाओं का भविष्य और भर्ती व्यवस्था पर उनका भरोसा जुड़ा है।
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने कुछ मांगें मानी हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बनी है।
आज विधानसभा मार्च के दौरान आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज तक की स्थिति बनी।
सरकार से मेरा सीधा सवाल है - अगर छात्रों की शिकायतें जायज़ हैं, तो उनका भरोसा बातचीत और पारदर्शी जांच से क्यों नहीं जीता जा सकता?
और छात्रों से भी यही अपील है - अपनी लड़ाई शांतिपूर्ण रखें। किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ आपके जायज़ मुद्दे को कमजोर कर सकती है।
सरकार और छात्रों, दोनों के लिए रास्ता बातचीत का ही होना चाहिए।
#StudentProtest #Jharkhand #HimanshiSingh
युवा: साहब, लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर है।
शरद पवार: "मैं जंतर-मंतर होकर आया हूँ, गुस्सा बहुत है।"
मोदी जी: "ही... ही... ही....
मुस्कुराइए आप नये भारत में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के गठजोड़ से चल रही सरकार द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के तले दबे हैं।
हँसिए साहब... क्योंकि जिनका भविष्य बर्बाद हुआ है, वो तो रो ही रहे हैं।
समझ लीजिए, सवाल सिर्फ़ पेपर लीक का नहीं, संवेदना की मौत का भी है।
जिन लोगों को अभी भी समझ नहीं आ रहा है देश में क्या हो रहा है जो लोग मोदी सरकार को अभी भी अंधभक्तों
की तरह समर्थक देने में लगे हैं, उन लोगों से बस इतना ही कहना चाहूंगा,देश हित में बोल नहीं सकते तो झूठ मत बोले।
#cjpprotest#education#resignmodi#resignpardhan#jaibhim#jaibharat
भूख सिर्फ़ पेट की नहीं होती, कभी न्याय की भी होती है।
जिस दौर में अपनी ज़िंदगी जीने से ही फुर्सत न हो...
उस दौर में कुछ लोग आने वाली पीढ़ियों की ज़िंदगी संवारने के लिए अपनी ज़िंदगी दाँव पर लगा दे रहे हैं।