पूरे आईपीएल का सबसे बेकार प्लेयर एक टीम का कप्तान बना बैठा है ।
जहां बाकी प्लेयर 200 स्ट्राइक रेट से खेलना पसंद करता है वही ऋतु 70 का स्ट्राइक रेट से ।
#CSKVSRH
>स्टीमर डूबने के बाद पता चलता है कि सवारी ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहने थे,
>बस जलने के बाद पता चलता है कि उसमें इमर्जेंसी एग्जिट डोर तो था ही नहीं,
>ट्रॉली पलटने के बाद पता चलता है कि ट्रॉली में सवारी बैठाना मना है,
>ट्रक पलटने के बाद पता चलता है कि वो ओवरलोडेड था।
>1000 करोड़ की संपत्ति बना लेके बाद पता चलता है कि ऑफिसर भ्रष्ट था
> मरीजों के मरने के बाद पता चलता है कि हॉस्पिटल के पास लाइसेंस नहीं था
>लोगों के मरने के बाद पता चलता है कि खाना एक्सपायर्ड था
>दस्त लगने के बाद पता चलता है कि दूध में यूरिया मिला था।
"दरअसल इन सबके बारे में सिस्टम को ���ता होता है, बस भ्रष्टाचार की वजह से चलता रहता है।
जब पकड़े जाते हैं तब सबकुछ सामने आता है।
आप सदन में कुछ भी भाषण दे दो,
लेकिन 10 से 15 हजार महीने की नौकरी करने वाला मजदूर 280 रुपए किलो की गैस कैसे भरवाएगा।
आप सिर्फ इस समस्या का समाधान करवाओ।
जमाखोरी रोकने में आप नाकाम रहे हैं, ये सच्चाई है।
आपको रैली छोड़कर तुरंत एक्शन प्लान बनाना चाहिए।
बिहार में एक लोको पायलट ने शिफ्ट खत्म होने के बाद ट्रेन को बीच रास्ते ही छोड़ दिया. बताया गया कि इस ट्रेन को मालदा से सिलीगुड़ी तक जाना था. लेकिन लोको पायलट की 9 घंटे की शिफ्ट पूरी हो चुकी थी. इसलिए उसने ट्रेन को बिहार के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया. स्टेशन अधिकारियों ने ड्राइवर से ट्रेन बीच में रोकने का कारण पूछा, तो उसने कहा, "काम के घंटे पूरे हो गए हैं. मैं तय समय से ज्यादा ट्रेन नहीं चला सकता. बिना आराम करे अब आगे शिफ्ट नहीं कर पाऊंगा."
पूरी खबर: https://t.co/JIdsQ8z5hj
Loco Pilot | Bihar | Train | Siliguri
2014 की जिस हवा में बीजेपी आई थी,
अब वो अपना विश्वास धीरे धीरे खोती जा रही है।
सरकारों में बदले की भावना नहीं होनी चाहिए।
शराब घोटाले में कोर्ट ने केजरीवाल जी को बरी कर दिया है
कोर्ट से आरोप मुक्त होते ही केजरीवाल रो पड़े और कोई भ��� इंसान यही करता। जिस तरह से CM समेत कैबिनेट मंत्रियों को जेल डाला गया था। वो पॉलिटिकल वेंडेटा था,एजेंसियों का दुरुपयोग पहले दिन से दिख रहा था।
कोर्ट में साबित भी हुआ।
मगर जिस तरह से मीडिया ट्रायल किया गया, कथित शराब घोटाले में किसी को Kingpin, किसी को King कहा गया, महीनों एंकरों की गला फाड़ प्रतियोगिता चली। अख़बारों के फ्रंटपेज पर मोटी-मोटी हेडलाइन छपी।
व्यक्ति समेत परिवार को लांछित किया गया,उसका कोई हिसाब हो सकता है? आरोप लगते ही दोषी मान लेने वाली संपादकीय सोच को कम से कम अब तो सचेत हो जाना चाहिए।
क्योंकि ये जो मैंने 4 लाइन, 40 सेकेंड में लिख दिया है,केजरीवाल और उनकी टीम के ल���ए 40 महीने झेली गई यातना है। शारीरिक,मानसिक और सामाजिक यातना।
हम सबको ऐप्सटीन फाइल्स की चिंता है, वो कांड तो बंद कमरों और एक दूर दराज के आयलैंड पर हुआ,
लेकिन हमारे देश में तो खुल्लम खुल्ला चल रहा है,
•रेप करने वाले नेता पार्लियामेंट और विधानसभाओं में रबड़ी पी रहे,
•महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे,
•छोटे बच्चों का यौन शोषण आम बात है,
•बाबा,मौलवी,ओझा,तांत्रिक, पैस्टर लोगों को खुलेआम बेवकूफ बना रहे,अंधविश्वास खुलेआम फैला रहे,रेप हत्या में जब अंदर जाते तो तत्काल जमानत हो जाती,
•गरीबों और आम आदमियों के बच्चे रोड चलते किसी अमीरजादे नशेबाज की गाड़ी का शिकार हो जाते फिर वो सुअर न्याय नामक ��ोठे की दुकानों पर जाकर बेल खरीद लेता,
•भूमाफिया, खनन माफिया,शराब माफिया सरकारी पॉलिसीज बना रहे ,बड़े लेवल पर लाइजनिंग कर रहे,जेल तो कभी जाते ही नहीं,
•घूंस लेते पकड़ा गया अधिकारी महीने दो महीने में छूट कर आता है और बढ़िया पोस्टिंग खरीद कर और माल छापता ,
•नकल माफिया नेता और अधिकारियों के साथ मिलकर पेपर लीक करवा रहे,बेरोजगार सड़क पर लाठियां खा रहे,
•ड्रग माफिया नेताओं और अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दवाएं बना रहा और खुलेआम नवजात बच्चों की हत्या कर रहा, उसका क्या ?
•ऑक्सीजन सप्लाई न मिलने से नवजात मर जा रहे ,
•शॉर्ट सर्किट से बच्चे जलकर राख हो जा रहे ,
•विमान हादसे हो रहे उनका पता नहीं चल पा रहा,
इन फाइलों को क्या नाम दें?
लोग क्यों न गोदी मीडिया कहें
मोदी जी को सदन में जाने के लिए टाइम नहीं है,
मणिपुर जाने के लिए टाइम नहीं था,
लेकिन डीडी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव जी की बेटी की शादी में जाने का टाइम मिल गया।
अशोक जी अब और जी तोड़ मेहनत करेंगे मोदी जी के लिए।
भारत के रेल मंत्री "अश्विनी वैष्णव" जी की यह जैकेट देखिए..
Hackett London की यह जैकेट 75 Pounds यानी ���9300 की है.
यह जैकेट विदेशी British Company "Heckett London" द्वारा तैयार की जाती है.
हैरान करने वाली बात यही है कि "विदेश" का सामान इस्तेमाल करने वाले लोग "स्वदेशी" अपनाने का ज्ञान बाँटा करते हैं.
आपका नाम जेपी नड्डा है। आप देश के स्वास्थ्य मंत्री हैं , कम से कम सरकारी फाइलों में। ज़मीनी हकीकत में आपकी भूमिका अक्सर खामोशी तक सीमित रहती है। हर बड़े स्व���स्थ्य संकट में या तो आप दिखाई नहीं देते या फिर जिम्मेदारी किसी और के खाते में डाल दी जाती है। मंत्रालय चलता रहता है , बयान बचते रहते हैं , लेकिन जवाबदेही हमेशा गायब रहती है।
आज पूरा देश नकली खाने , पैक्ड ज़हर और मिलावटी दवाओं के बीच जी रहा है। FSSAI जैसी संस्था गहरी नींद में है और भारत तेज़ी से कैंसर की राजधानी बनता जा रहा है। दूध , मसाले, तेल, पैकेट वाला खाना सब पर सवाल हैं , लेकिन स्वास्थ्य मंत्री की तरफ से न चेतावनी , न सख़्ती, न कार्रवाई का रोडमैप। अगर यही “स्वास्थ्य शासन” है तो बीमारी का फैलना तय है।
मध्य प्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश तक लोग जहरीली कफ सिरप पीकर मर रहे हैं, दूषित पानी पीकर मर रहे हैं। फिर भी न कोई ठोस बयान, न जवाबदेही तय, न सिस्टम सुधार। हर बार कहा जाता है ~“स्वास्थ्य राज्य का विषय है।” तो फिर केंद्र ��ा स्वास्थ्य मंत्रालय किसलिए? कुर्सी किसलिए? संकट के वक्त देश का स्वास्थ्य मंत्री कहाँ होता है?
राजा वही होता है जो संकट में सामने आए, गलती माने और समाधान दे।
बाक़ी चुप्पी , फाइलें और बहाने ये तो किसी भी नाकाम सिस्टम की पहचान होती है।
अनुराग ठाकुर जी की संसद से एक फोटो वायरल हो रही है जिसमें वो विदेश कंपनी louis vuitton की बेल्ट पहने नजर आ रहे हैं,
खैर ये कोई बड़ी बात नहीं है, नेता लोग कहते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं,
बड़ी बात ये है कि ये बेल्ट एक गाय के बच्चे (बछड़े) की खाल से बने चमड़े की है।
जिनकी सरकार गौ माता के नाम से चल रही हो,
उनके लिए ये शर्म की बात होनी चाहिए।
@ianuragthakur
पूरे भारत वर्ष के 80 फीसदी हिस्स�� में जिसकी सरकार हो,
खुद केंद्र में सरकार हो,
खुद के 200 से ज्यादा सांसद हों,
खुद के स्पीकर साहब हों,
उसके बावजूद सदन में जाने में डर लग रहा है,
या फिर सदन में हमले की स्थिति बन गई है,
ये खबर देश से बाहर जाएगी तो क्या इज्जत होगी हमारी।
बस सिर्फ एक बहाने के लिए कुछ भी कहानी रच रहे हो शर्म नहीं आती।
खुद की सदन में असुरक्षित
हो तो क्या फायदा सरकार में रहने का?
खैर ये तो बकलोल है @ManojTiwariMP
UGC लागू करने के लिए देश भर में दलित पिछड़े
समा��� के लोग और छात्र छात्राएं प्रदर्शन कर रहे हैं,
लेकिन देश का मनुवादी मीडिया इसको नहीं रिपोर्ट कर रहा है,
मीडिया अब नहीं कहेगा कि देश भर में गुस्सा है,
जिस चीज का विरोध ब्राम्हण करते हैं,
मीडिया उसे देशव्यापी विरोध करता है,
जो बात ब्राम्हण हित के खिलाफ होती है
मनुवादी मीडिया उस बात का विरोध करता है,
सवर्ण पत्रकार दलित, पिछड़ों को भारत नहीं मानते हैं,