पिछले 12 वर्षों में बस नरेन्द्र मोदी के दो ही काम रहे जो प्रधानमंत्री स्तर के नहीं बल्कि एक आत्ममुग्ध स्तरहीन राजनेता के लगे। स्तरहीन।
पहला वो महिला आरक्षण वाले मामले पर प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के नाम पर बस रोना और कांग्रेस की शिकायत करना।
दूसरा कल अपने जन्मदिन पर फालतू का पूरे देश में सरकारी तौर पर जश्न मनवाने की कोशिश करना।
और सभी चीज़ें एक राजनेता के वोटों के गुणा गणित के आधार पर कुछ गलत नहीं। चाहे sc एक्ट के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश पलटना या यूजीसी मामला।
वो नेताओं के खेल हैं।
पर देश है के प्रधानमंत्री के तौर पर राष्ट्र के नाम संबोधन बड़ी चीज होता है। लोग सोचते हैं कि कोई बड़ी बात होगी। युद्ध नोटबंदी या कोई बड़ी उपलब्धि, परमाणु परीक्षण जैसी।
उस प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन की गंभीरता मोदी ने ऐसी खत्म की कि अगली बार शायद ही इनके राष्ट्र के नाम संबोधन को कोई गंभीरता से ले।
दूसरा कल जिंदा आदमी के नाम पर स्कूल मास्टरों से शाम सात बजे जलवाने का आदेश हास्यप्रद और खीझ उत्पन्न करने वाला था।
सरकारी ऑफिस भी पांच बजे बंद हो जाते हैं और प्राइवेट के छह बजे।
उस स्कूल टीचर से जिसका स्कूल दो बजे बंद हो जाता है,शाम के सात बजे ऐसे दिया जलवाने के आदेश केवल परेशान करने के अलावा क्या थे?
और कोई ये न बोले कि ये मोदी का आदेश नहीं था।
तो फिर किसका था और रोका क्यों नहीं?
और नेहरू ने ये किया था वाली बात बकवास है।
नेहरू ही बनना है तो खुल के बताओ।
नेहरू ने कभी न गरीबी का रोना रोया, न ही वोटों के लिए रोकर दिखाया, न खुद को पिछड़ा बताया।
अच्छा बुरा जो भी किया, वैसा ही रहा।
आप तो नेहरू के द्वारा बर्बाद हुए देश को नए सिरे से बनाने आए थे।
खुद ही नेहरू बन गए?
भाजपा ने जो नग्नता की है एक व्यक्ति के जन्मदिन पर, उस पर दो केस होने चाहिए:
१. हिन्दू प्रतीकों, आस्था और पर्व को नीचा दिखाने का कि इन्होंने कलश, दीपक, आरती और दीवाली को एक जातिवादी नेता के छवि प्रबंधन के लिए प्रयोग किया
२. पार्टी के नेता के जन्मदिन पर करदाताओं के धन के निरर्थक व्यय का
ये चिरकुट कार्यकर्ता और पार्टी का चटुआ सेल किस बात पर कल को नेहरू और राजीव गाँधी को घेरेगा कि ये युद्धपोत पर पिकनिक मनाते थे?
तुमने भगवान राम की दीपावली पर बने दीपों के रिकॉर्ड को टच करने का सोचा भी कैसे? तुमने दीपावली मनाने का ही कैसे सोच लिया? तुम्हारी औकात है भगवान राम के समक्ष खड़े होने की भी, इस चंदा-चोरी के बाद? तुम पापी लोग भगवान की बराबरी करोगे?
तुम स्वयं को भगवान से ऊपर समझने लगे? हस्ती क्या है तुम्हारी? तुम्हारे वश में सरकारी सर्कुलर भेजना ही अब बचा है क्योंकि लोग भय से, कि सैलरी न कट जाए, नौकरी न चली जाए, दीप जलाएँगे।
और हाँ पापियो! बिहार के बाढ़ की विभीषिका के मध्य तुमने यह नंगई की है और जम्मू-कश्मीर की बाढ़ पर तुमने ज्ञान दिया था सहयोग का। नरेन्द्र मोदी के हैंडल से नेपाल की बाढ़ पर पोस्ट है, पर बिहार पर अभी तक नहीं।
दीपक जला और हमारी जेब भी कि हम जो पैसा सड़क-हॉस्पिटल-स्कूल बनाने के लिए देते हैं, वह एक व्यक्ति के ईगो मसाज के लिए लुटाया जा रहा है ताकि रिकॉर्ड बन सके, फोटो और रील कट सके, इनके नाम के गीत गाए जाएँ।
लज्जा कर लो, यदि बची है तो! और चटुआ सेल, ज्ञान मत देना, तुम्हारा बाप हूँ मैं ज्ञान देने में।
I am a fan of PM Modi.
Apparently, that's no longer enough. BJP leaders now seem to be competing for the title of Modi’s Greatest Fan.
Someone has fireworks. Someone performs a Yajna. Someone rushes to a temple.
At this rate, BJP may soon need a leaderboard.
Sorry, but this is embarrassing.
@ANI They are exposing themselves showing this. Ayodhya Municipal corporation is failed to maintain cleanliness, hence they have no right to be in the office. Ask mayor and others to resign immediately.
After today’s Modi birthday celebration,
I finally realised—Prashant was right.
He saw the political reality much earlier.
BJP wants more than our vote...
आपने बीजेपी को वोट दे दिया,अब आप पूजा भी इनकी करो...
@ajeetbharti अजीत भाई, क्यों मिर्च लग रही है? आपको नहीं पता आज हम अमेरिका से बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं, चीन ने पिछले हफ्ते ही हमसे कर्ज लिया है, अब हमारे देश में सरकारी अस्पतालों में अमेरिकी ओर यूरोपीय नागरिक इलाज करवाने आते हैं, इतना कुछ करने के बाद मोदी जी जन्मदिन ना मनवाएं?
@AmitShah 😂😂😂 अगर इस स्टेशन का निरीक्षक ठीक से काम कर रहा होता तो आज आपको झाड़ू नहीं लगानी पड़ रही होती। अच्छा होता झाड़ू लगाने के बाद आपने इस स्टेशन के स्टाफ की भी class लगाई होती। सिर्फ 17 सितम्बर को ही सफाई करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
आज की भाषा के हिसाब से वो नॉन बायलॉजिकल भी कहे जा सकते हैं और कुछ लोगों के हिसाब से उनका उन माता पिता के यहां जन्म हुआ जो जब उनका जन्म हुआ तब सवर्ण कहे जा सकते थे उस युग के अनुसार।
उनका समुद्र और आज के गुजरात से बहुत पुराना नाता है।
बल्कि भारत का ऐसा कोई क्षेत्र शहर नदी गांव कस्बा ही नहीं जहां से उनका नाता न निकाला जा सकता हो।
बल्कि कुछ लोग तो कहते हैं कि देश छोड़ो पूरी दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं जहां की एक न एक कहानी उनसे जुड़ी न हो।
आज के भारत के कानून के हिसाब से उन्हें ओबीसी कैटेगरी में रखा जा सकता है पर एक पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने के बावजूद बड़े बड़े विद्वान ब्राह्मणों से वो श्रेष्ठ हैं।
उन्होंने जो हासिल किया उसके बाद ब्राह्मण ठाकुर बनिया कायस्थ भी उनके आगे शीश झुकाने को श्रद्धा भाव से आते हैं।
वो भगवान बन चुके हैं।
आज उनके नाम के लाखों दिया जलेंगे।
नमन है।
ऋग्वेद के अनुसार ब्रह्माजी के मानस पुत्र,
विष्णु पुराण के अनुसार आठवें वसु प्रभास और योगसिद्धा के पुत्र,देवगुरु बृहस्पति के भांजे,
त्रेतायुग में गुजरात की द्वारिका का निर्माण करने वाले,
शिल्पकार भगवान
देव विश्वकर्मा को नमन है।
आज विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा को सादर नमन।
आशीर्वाद बनाए रखें प्रभु
🙏🙏🙏🙏
मुझे पीएम के जन्मदिवस से समस्या नहीं है। मेरी समस्या तरीके से है। जो व्यक्ति सत्ता में आते ही दिखास और छपास पर नेताओं को समझाया करता था, आज उसकी चाटुकारिता में हर भाजपा सरकार, हर विभाग/मंत्रालय ओवर द टॉप उत्सवधर्मिता में डूबने को व्याकुल है। क्या यह दोगलापन नहीं है?
मोदी का जन्मदिवस उनके जीते-जी सरकारी खर्चे पर कैसे मनाया जा सकता है? उज्जैन के 58 लाख दीपों का व्यय भाजपा वहन करेगी या मध्यप्रदेश सरकार? दिल्ली के सवा लाख दीपकों का व्यय रेखा गुप्ता के व्यक्तिगत लॉकर से जाएगा या दिल्ली सरकार के फंड से?
मोदी का जन्मोत्सव एक व्यक्तिगत विषय है और उसका उत्सव पार्टी मना सकती है, सरकार नहीं। सरकार तब मनाएगी, जब वो सेवानिवृत्त हो चुके होंगे और जनता को लगेगा कि कुछ कर के गए हैं। संभवतः, राष्ट्रीय अवकाश हो जाए उस दिन, ‘सेवा दिवस’ मने और ड्राय डे रहे।
उनकी छवि नोटों पर आ जाए और… जो भी है, आप समझ गए होंगे। जीवित रहते ऐसा करना बिलकुल वही कार्य है जैसे गाँव में कुछ बुजुर्ग अपने जीवनकाल में ही मृत्युभोज करवा लेते हैं। उन्हें विश्वास रहता है कि उनके मरने पर नकारे लोग जमीन हथिया लेंगे, और भरगामा की जगह भैयारी भोज कर देंगे।
भाजपा मुख्यालय को दीपों से नहला दीजिए। हर भाजपा कार्यकर्ता कलशयात्रा निकाले। हर राज्य मुख्यालय में चायनीज झालड़ बँधे। महीने भर आयोजन हो। भोज और उत्सव हो। लोग उपवास और रोजे रखें। किसी को कोई समस्या नहीं होगी। पर स्कूलों में बच्चों को बुला कर दीये जलवाना, चित्रकारी, भाषण आदि, वह भी एक महीने तक!
बिहार में बाढ़ है और हमारे महान मुख्यमंत्री दीये जलवा रहे हैं! कर्ज में डूबे राज्य दीपकों का गिनीज रिकॉर्ड्स बनवा रहे हैं! और इन सबके मध्य मोदी जी की आत्मा धिक्कारती नहीं कि हे महामानव, ये तू क्यों करवा रहा है? रोक क्यों नहीं रहा अपने नाम पर हो रहे इस बकवास को?
सरकारी खर्च पर यह भौंडापन अस्वीकार्य है। मोदी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है, क्योंकि वही कार्य होता है प्रधानमंत्री का। हमने अच्छी बातों की सराहना की है, और बुरी की आलोचना करते रहेंगे।
यह आत्ममुग्धता असुरक्षा की भावना और विश्वास की कमी के कारण बढ़ती जा रही है। आपका कार्य ही आपकी डिग्री, पहचान और पीआर होना चाहिए। इसके लिए कुछ भी अतिरिक्त करना, स्वयं के अच्छे कार्यों में कॉन्फ़िडेंस खोने जैसा है।
ब्रांड मोदी को मोदी के इनर सर्कल के मूर्खों ने जितना डाल्यूट किया है, वह एक केस स्टडी बनेगा।
खैर जो भी हो, आप शतायु हों। आप सत्ता में होने के कीर्तिमान बनाएँ। विहग, बंदी और चारण, आपका कीर्ति गायन करें। आपको भारत रत्न दिया जाए। आपके सम्मान में लोग स्वतः दीपक प्रज्वलित करें, आपको टैक्सपेयर के पैसों पर अम्बानी के स्तर का पीआर न करना पड़े, यही मेरी कामना है।
Anyone would welcome auditing schools in Punjab or elsewhere.
only one request/suggestion: audit Punjab with the same eyes, the same questions and the same courage with which you audit governments elsewhere. Punjab deserves no special exemption—and AAP deserves no friendly exemption.
@sarkarstix Forget winning, after this army couldn't help them to even remain fit and disciplined which is the basic thing to survive being a sportsman.
@BefittingFacts Should I show u videos from Faridabad and Gurgaon and Noida too? They are continuously voting for BJP. You have guts to see the reality? Apne hi papa ka beta hai toh haa bol, mai apne kharche se Jake dikhaunga or haan apna hi cameraman bhej dena.