जंतर मंतर पर उत्तराखंड पुलिस का सिपाही बावर्दी “इंक़लाब जिन्दाबाद” के नारे लगा रहा है, और यहाँ पूरा महकमा “कथानक” बदलने पर ऊर्ज़ खपा रहा है, ताकि किसी तरह से इज़्ज़त बचे,
मसलन, वो तो सस्पेंड हो चुका है, उसका कनेक्शन तो भीम आर्मी से है, उसका ट्रैक रिकॉर्ड ख़राब है, आदि आदि”
अरे भाई, जब इतना बड़ा गुनहगार है तो अभी तक फोर्स में क्यों था ?
@pushkardhami@BJP4India@INCIndia@CJP_for_India
आज जंतर-मंतर पहुंचकर शेर सिंह ने नौकरी छोड़ने का एलान किया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मंच पर खड़े होकर शेर सिंह ने अपनी वर्दी के बिल्ले बैज उतारे और उन्हें सौंप दिया।
You, @DelhiPolice are the most despicable force in our country. You are beating @kotiyalrahul , one of the most well respected journalists & founder of the much adored @baramasa_in channel in our state of #Uttarakhand. You owe an unequivocal apology not only to Rahul but to many others in our state. I also urge & request our CM Shri @pushkardhami to call the DGP of Delhi & inform him how hurt we are feeling as a people & state. @AmitShahOffice needs to take note of the horror that is being unleashed on the streets of Delhi. This is condemnable & unacceptable. I repeat that you owe an apology!
दिल्ली में चल रहे युवाओं के जिस आंदोलन के बारे में “फंडेड” होने का नेरेटिव बनाने का निरर्थक प्रयास किया जा रहा है, उस आंदोलन में भाग लेने आए छात्रों की ये दो वीडियो देख लीजिए, कितना फंड आ रहा है आप समझ जाओगे।
@CJP_for_India@BJP4India@INCIndia
यह है उत्तराखंड देहरादून में पेड़ों का मरघट आज हरेला के त्योहार पर क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री @pushkardhami साहब ने यहां का जायजा लिया कि यहां उनका हरेला कितना कामयाब रहा हर जगह मरघट बनती भाजपा की सरकार यह है इनका असली हरेला यह बीजेपी वाले प्रकृति की हत्या को पेड़ों की हत्या को ही हरेला मानते हैं। @narendramodi
#BlackHarela #Dehradun #Rishikesh #SaatMod #SaveTree #SaveNature #SaveFuture #SaveHimalaya
एक शिक्षा मंत्री की इस्तीफे से कहीं बढ़कर आपकी जान है @Wangchuk66 भूख हड़ताल ने अपना काम कर दिया है।
इस देश को आपके जैसे संवेदनशील व्यक्ति की भविष्य में और जरूरत पड़ेगी। व्यवस्था को बदलने के लिए आपकी जान की नहीं, बल्कि आपके नेतृत्व और आपकी मौजूदगी की जरूरत है। @abhijeet_dipke
देहरादून-ऋषिकेश 7 मोड़ सड़क परियोजना के नाम पर सदियों पुराने पेड़ों की बेरहमी से कटाई के खिलाफ आज पूरा उत्तराखंड 'काला हरेला' मनाकर आक्रोश दर्ज कर रहा है। पर्यावरण की लाश पर खड़ा होने वाला विकास हमें मंजूर नहीं। इसके विरोध में पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
तीन वर्ष पहले देहरादून के पंडितवाड़ी–वसंत विहार रोड़ में हमने मियावाकी पद्धति से 300 से अधिक पौधे लगाए गए थे। खुशी की बात है कि सभी सहयोगियों और साथियों के निरंतर प्रयास से आज भी 90% सर्वाइवल रेट से अधिक पौधे जीवित हैं।
हरेला के अवसर पर हम सब केवल पौधे लगाने ही नहीं पर उनके साथ सर्वाइवल रेट और संरक्षण की भी चिंता करें, उन पर निरंतर काम करें। यही सच्चे अर्थों में हरेला का संदेश है।
आप सभी को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#उत्तराखंड
#Uttarakhand
💚
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इसे देखकर वाक़ई धक्का लगा कि कैसे देहरादून में पुलिस महज़ किसी अपराधी के झूठे नाम भर ले लेने से, बिना पहले से तफ्तीश किए, एक इज़्ज़तदार पत्रकार @hembhatt21 को घर से उठा कर के ले गई और बड़ा करम किया कि जब पूछताछ और जाँच में कुछ नहीं मिला तो बड़े दयालू हो कर ये कह कर छोड़ दिया कि आपके ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिला। जो नाम ख़राब किया आप लोगों ने, जो परिवार/छोटे बच्चों को सदमा दिया उसका क्या। दुखद है ये पूरी घटना। हेमंत, हम सब तुम्हारे साथ हैं, हेमंत को मैं दशकों से जानता हूँ। 🙏
बीते दिनों पत्रकार हेम भट्ट पर हमले की बात सामने आई और श्री भट्ट ने लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी. प्रेस क्लब, पत्रकारों, सामाजिक, राजनीतिक संगठनों द्वारा इस हमले की तीव्र भर्त्सना की गयी.
पुलिस ने 24 घंटे में आरोपी बताए जा रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया और बताया कि दो आरोपी गिरफ्तार कर लिए हैं, तीसरे की तलाश जारी है. हैरत की बात यह कि देहरादून के एसपी सिटी का इस मामले में जो वीडियो पुलिस की ओर से जारी हुआ, उसमें पकड़े गए आरोपियों के बारे में कोई ब्यौरा नहीं था.
अगले दिन अखबारों में खबर छपी कि पुलिस ने तो आरोपियों को पांच मिनट में छोड़ दिया यानि कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में जब तक एसपी सिटी का वीडियो रिकॉर्ड हो कर अपलोड हुआ होगा तब तक आरोपी छोड़े भी जा चुके होंगे !
इस मामले में पत्रकार हेम भट्ट ने बेहद वाजिब सवाल उठाए हैं. वे पूछते हैं कि पुलिस ने सिर्फ आरोपियों से बात करके ही कैसे निष्कर्ष निकाला कि मामला रोड रेज का है ? एक ही दिन में उनके चैनल- जय भारत टी वी - को फेसबुक पर बंद करवाया जाना और उसी शाम हमला होना, क्या महज संयोग है ?
वे तो यहां तक कहते हैं कि पुलिस ने इस बारे में उन्हें सूचित तक नहीं किया. आरोपियों की शिनाख्त भी नहीं करवाई गयी तो फिर कैसे माना जाए कि जिन्हें पकड़ा गया, वो ही हमला करने वाले थे ?
आरोपी कहें, रोड रेज था, पास नहीं देने को लेकर उन्होंने मारपीट कर दी और पुलिस चुपचाप आरोपियों की बात मान ले, इतनी भोली कब से हो गयी पुलिस ?
प्रश्न यह है कि पुलिस ने आरोपियों की बात पर इतने भोलेपन के साथ भरोसा कर लिया या कोई और दबाव काम कर रहा था, जिसके चलते पुलिस के सामने आरोपियों पर भरोसा करने और कार्रवाई का अभिनय करके आरोपियों को छोड़ देने के अलावा कोई चारा नहीं था ?
इस मामले में श्री हेम भट्ट के संघर्ष करने के जज्बे के साथ पूर्ण एकजुटता और समर्थन , अन्याय के खिलाफ संघर्ष का जज्बा जिंदाबाद ✊✊
मुस्कुराइये !
क्योंकि आप देहरादून में है
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर पढ़िये।
देहरादून में कुछ लोगो ने वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट पर हमला कर ज़ख़्मी कर दिया। पुलिस ने पीटने वाले दो पकड़े और छोड़ दिए। खबर में लिखा है कि तीसरे तलाश जारी है।
एसएसपी अजय सिंह के लिए एक सुझाव है, कप्तान साहब जब बाद में छोड़ने ही है तो पकड़ने से ऊर्जा बर्बाद क्यों करनी ! पत्रकारों का क्या है पिटते पिटाते रहते है। आप अपने काम पर फोकस कीजिए।
@uttarakhandcops@DeepamSeth_IPS@DehradunPolice
कल देर रात चैनल बंद कर दिया गया. आज मुझ पर जानलेवा हमला हुआ है. शाम घर लौटते वक्त तीन अज्ञात लोगों ने स्कूटी से पीछा किया, अचानक ओवरटेक किया, मारपीट की, धमकी दी, और मौके से फरार हो गये.
दून हॉस्पिटल में उपचार करवाया है, पुलिस को शिकायत की है.
पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है.
कल देहरादून में हुई वरिष्ठ पत्रकार पंकज मिश्रा की मौत के बाद से माहौल में मचा शोर इस बात की गवाही दे रहा था कि यह मौत सामान्य नहीं है। और रात में पुलिस ने पत्रकार की मौत का मामला दर्ज भी कर किया।
तीन दिन पहले फेसबुक पर सिस्टम के ख़िलाफ़ पोस्ट लिखना, उसके बाद उसे हटाकर माफीनामा वाली पोस्ट लिखना, फिर बुधवार रात कुछ लोगो द्वारा घर जाकर मिश्रा को बुरी तरह पीटकर घायल कर देना, पत्नी के साथ बदसलूकी करना और उसी रात मिश्रा जी की मृत्यु हो जाना, यह हैरतअंगेज़ है। मिश्रा के ऊपर पोस्ट हटाने के लिए किसका दबाव था ?
कड़ियाँ आपस में जितनी आसानी से जुड़ रही है यदि पुलिस की जाँच भी ऐसे ही आगे बढ़ी तो कई खुलासे होंगे, जिसकी उम्मीद नहीं के बराबर है।
@pushkardhami@PMOIndia
मैंने चार दिन पहले अपने ‘X’ अकाउंट पर
SIDCUL द्वारा IT पार्क की ज़मीन 90 साल की लीज पर एक निजी कंपनी को देने का उल्लेख किया था, उसकी एवज़ में मुझे SIDCUL की तरफ़ से एक लीगल नोटिस मिला, जो सुप्रीम कोर्ट के वकील ने भेजा है।
वैसे तो तीन दिन से देहरादून शहर में शोर मचा था कि राज्य सरकार मुझे लीगल नोटिस भेज रही है, लेकिन मुझे कल शाम मिला। इस नोटिस को देने के लिए मेरी ग़ैर मौजूदगी में मेरे घर पर तीन दिन तक खाकी वर्दी में सरकारी लोग गए, यह मेरे परिवार पर मानसिक दबाव बनाने की एक कसरत थी, जो बेकार साबित हुई।
मुख्यमंत्री जी, आप नोटिस भिजवाने का सिलसिला जारी रखना, क्योंकि मैं राज्यहित के मुद्दे उठाता रहूँगा। उधमसिंह नगर के खुरपिया फार्म में भी कुछ ऐसा ही सुनने को मिल रहा है, अभी वेरिफाई कर रहा हूँ, फिर सामने रखूँगा। मेरा सवाल आज भी वही है,
आख़िर सरकारी ज़मीन प्राइवेट बिल्डर को क्यों दी जाय ?
इससे उत्तराखंड का क्या भला होगा ?
और हाँ, एक और बात कहनी थी, परिपक्व राजनेताओं को कभी भी दो कौड़ी के स्वार्थी सलाहकारों की सलाह नहीं माननी चाहिए। हर दौर के शासकों के दरबार में ‘चिलांडें’ टाइप के सलाहकार होते ही है।
@pushkardhami@BJP4India@INCIndia@KaranMahara_INC
मुख्यमंत्री धामी @pushkardhami बोल रहे थे हमने मजबूत भू कानून लागू कर दिया है, क्या यही है भाजपा @bjp4uk का भू कानून ? पहले जमीन, खेतों पर अवैध कब्जा हो रहा था अब जंगल पर भी अवैध कब्जा हो रहा है।
खलंगा के आरक्षित वन भूमि पर बाहरी भू माफिया का कब्जा हो रहा है।
#SaveKhalangaForest
दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने से अंकिता भंडारी की मां सोनी देवी संतुष्ट नहीं हैं, वो फांसी की सजा की मांग पर कायम हैं, हाईकोर्ट में अपील करेंगी #AnkitaBhandari#Uttarakhand