जनसेवा मित्रों की स्थिति आज प्रदेश की रोजगार व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है। जिन युवाओं को उम्मीदों के साथ जोड़ा गया, उन्हें आज अस्थिरता और अनिश्चितता के बीच छोड़ दिया गया है।
सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर इन युवाओं का भविष्य क्या होगा❓ क्या ये सिर्फ आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएंगे❓
श्री जीतू पटवारी जी की मांग केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की चिंता और संघर्ष की आवाज़ है। अब निर्णय लेने का समय है।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
जनसेवा मित्र आज भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं…
सरकार बताये — उनका कसूर क्या है❓
काम लिया, उम्मीदें जगाईं, और फिर छोड़ दिया… यही है रोजगार नीति❓ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी ने सही सवाल उठाया है।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
मोहन सरकार अब पुराने जनसेवा मित्रों को हटाकर नए ‘CM यंग इंटर्न’ को नियुक्त करेगी।
मध्य प्रदेश में 9390 जनसेवा मित्रों को अचानक बाहर करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य के साथ सीधा अन्याय है।
ये वही युवा हैं जो प्रशिक्षित हैं, ज़मीनी अनुभव रखते हैं और वर्षों से जनता की सेवा कर रहे थे। ऐसे में उन्हें हटाकर नई भर्ती की बात करना सरकार की नीयत और नीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रोजगार के नाम पर ऐसे अस्थायी प्रयोग युवाओं के भरोसे को तोड़ते हैं। उन्हें स्थिरता, सम्मान और सुरक्षित भविष्य चाहिए, न कि बार-बार की अनिश्चितता।
मोहन सरकार को तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार कर जनसेवा मित्रों को बहाल करना चाहिए।
@DrMohanYadav51
मप्र बजट सत्र 2026 के लिए आपके सुझाव आम जनता की आवाज़ हैं।
अपनी समस्याएँ, मांगें और सुझाव कमेंट में लिखें—
हर ज़रूरी मुद्दा विधानसभा में पूरी ताक़त से उठाया जाएगा। @Anurag_Dwary@PTI_News@INCMP
@DrMohanYadav51 2 साल से संघर्ष कर रहे हैं जनसेवा मित्रों को बहाल करें
@ChouhanShivraj माननीय मुख्यमंत्री जी से बात जनसेवा मित्रों के विषय में एक अच्छा फैसला लें
#9300बेरोजगार हैं
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री (मामा) @ChouhanShivraj जी आपकी घोषणाओं और वादों के चक्कर में हजारों जनसेवा मित्रो और अतिथि शिक्षकों का भविष्य बर्बाद हुआ है। और @shubhankrmishra जी से बोल रहे हैं सब अपने हैं। यह कैसा अपना पन है। मैने खुद 5 वर्ष अतिथि शिक्षक पद पर कार्य किया। शिक्षक भर्ती परीक्षा के दोनों चरण पास किए हैं और @DrMohanYadav51 जी के मुख्यमंत्री बनते ही हजारों अतिथि शिक्षकों को उच्च पद प्रभार और ट्रांसफर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। आपके सारे आदेश और घोषणाएं शिक्षा मंत्री जी और लोक शिक्षण संचनालय ने मानने से इंकार कर दिया था। माननीय @ChouhanShivraj जी सिर्फ बोलने से नही बात बनेगी, डेढ़ साल से जनसेवा मित्र बेरोजगार है, अतिथि शिक्षक बेरोजगार हैं ।
#अतिथि_शिक्षक_मध्यप्रदेश
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
सरकार की नीयत में खोट है!
- चाहे जनसेवा मित्र हों, संविदा शिक्षक हों या अतिथि कर्मचारी—सरकार इन्हें नियमित पदों पर रखना ही नहीं चाहती!
- प्रदेश के युवाओं के साथ लगातार अन्याय कर रही है सरकार।
- श्रम कानून की आड़ में हर मजदूर का अधिकार छीना जा रहा है।
- जबलपुर, ग्वालियर और रीवा को महानगर घोषित करने के लिए सरकार ने न कोई बिल पेश किया, न ही कोई चर्चा की।
- इंदौर और भोपाल को महानगर बनाए जाने से लाखों हेक्टेयर जमीन जाएगी—क्या सरकार किसानों को बाज़ार मूल्य के अनुसार मुआवज़ा देगी?
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@INCMP@INCIndia
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मध्य प्रदेश के जनसेवा मित्रों ने चुनाव में जितवा कर पहले तो भाव आसमान पर चढ़ा दिए! अब कह रहे हैं मोहन यादव होश में आओ!
क्यों आयेंगे होश में? अभी तो सत्ता सुख भोगेंगे! होश में लाना है तो पहले मोहन सहित पूरी बीजेपी को शून्य पर पहुँचा कर बेहोशी से जगाओ!
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
कल भोपाल स्थित आवास पर जनसेवा मित्रों से मुलाकात हुई, उन्होंने मुझसे मिलकर बहाली से संबधित समस्याओं को साझा किया।
वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जनसेवा मित्रों को भाजपा सरकार द्वारा बिना किसी स्पष्ट कारण के बेरोजगार कर दिया गया।
यह निर्णय न सिर्फ जनसेवा मित्रों के साथ अन्याय है, बल्कि प्रदेश के लाखों युवाओं की उम्मीदों पर भी चोट है। चुनाव के वक़्त युवाओं से रोज़गार के वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही उन्हें भुला दिया जाता है।
मैं जनसेवा मित्रों की आवाज को सदन में पूरी मुखरता से उठा रहा हूं और इसके साथ ही मैं सरकार से मांग करता हूं कि जनसेवा मित्रों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए एवं उन्हें पुनः सम्मानजनक कार्य से जोड़ा जाए।
@DrMohanYadav51@INCMP #जनसवा_मित्र #रोजगार_का_हक़ #BJPFailsYouth
“जन सेवा मित्र की मौत, सत्ता की चुप्पी”
सुनील पाटीदार अब हमारे बीच नहीं हैं। वजह? बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और सरकार की संवेदनहीनता। जन सेवा मित्रों की बहाली पर भाजपा सरकार ने वर्षों से आंख मूंद रखी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह बताएं—अगर नियुक्ति हो जाती, तो क्या सुनिल आज ज़िंदा न होते? यह आत्महत्या नहीं, सरकार की लापरवाही से हुई हत्या है।
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@kharge@RahulGandhi@priyankagandhi@kcvenugopalmp@digvijaya_28@OfficeOfKNath@Barmer_Harish@jitupatwari@UmangSinghar@INCIndia@INCMP@DrMohanYadav51@ChouhanShivraj@Hkhandelwal1964
दलोदा थाना क्षेत्र एवं कचनारा चौकी अंतर्गत आने वाले ग्राम रिछालालमुहा के मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र सुनील पाटीदार जी की आत्महत्या कोई सामान्य घटना नहीं... यह मौजूदा सरकार की नाकामी का एक कड़वा परिणाम है।
आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझते हुए, सुनील पाटीदार जैसे हजारों युवा आज जिंदगी और सिस्टम से हार मान रहे हैं।
जन सेवा मित्र योजना, जो युवाओं की रोज़ी-रोटी का एक सहारा बन सकती थी, उसे केवल चुनावी स्टंट बना दिया गया।
अगर समय पर बहाली होती, अगर वादों पर अमल होता... तो आज सुनिल हमारे बीच होता।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जवाब दें,किसकी जिम्मेदारी है यह मौत? कब तक युवाओं को झूठे वादों की गोली दी जाती रहेगी? कब मिलेगी जन सेवा मित्रों को स्थायीत्व और सम्मान?
यह सिर्फ एक मौत नहीं, यह सरकार की नीति, नीयत और निकम्मेपन का पर्दाफाश है। अब जन सेवा मित्र चुप नहीं बैठेंगे, अब हर आत्मा की आवाज़ सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी!
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोकाकुल परिजनों को संबल प्रदान करें। ॐ शांति...
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खून बहा रहे हैं जनसेवा मित्र, फिर भी सरकार सोई है! 🩸 अपनी बहाली के लिए जनसेवा मित्रों को अपना खून बहाना पड़ रहा है, लेकिन ये निष्ठुर भाजपा सरकार अब भी आंखें मूंदे बैठी है।
क्या जनसेवा मित्रों का जीवन इतना सस्ता है कि उसे नजरअंदाज कर दिया जाए? यह सरकार सिर्फ़ वोट लेती है, लेकिन इंसानियत खो चुकी है।
#जनसेवा_का_बलिदान #निकम्मी_सरकार #खून_से_न्याय
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
@DrMohanYadav51@ChouhanShivraj
राजगढ़ जिले के ब्यावरा में जनसेवा मित्रों ने वो कर दिखाया जो आज की संवेदनहीन राजनीति को झकझोरने के लिए काफी है। बेरोजगारी से टूटे युवाओं ने अपने खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से बहाली की मांग की है। ये सिर्फ एक ज्ञापन नहीं, यह उस पीड़ा की स्याही है जो हर उस युवा के सीने में जमा है, जिसने जनसेवा को कर्म और सरकार को सहारा माना था।
करीब 9300 जनसेवा मित्र वर्षों तक विभागीय कार्यों में योगदान देते रहे, फिर योजनाएं ठप पड़ीं और साथ ही बंद हो गया इनका जीवनचक्र। अब महीनों से ना बहाली हो रही, ना कोई सुनवाई।
जनसेवा मित्रों की मांगें क्या हैं? — तत्काल बहाली, पूर्ववत कार्यों में नियुक्ति, और आजीविका की सुरक्षा।
क्या यही है “विकास” की असली तस्वीर?
क्या युवाओं के खून से लिखे पत्र भी सरकार को नींद से जगा नहीं पाते?
जनसेवा मित्रों की चेतावनी स्पष्ट है — बहाली नहीं तो आंदोलन होगा!
यह वक्त सरकार के लिए परीक्षा का है—क्या वह युवाओं की कराह सुनती है, या चुनावी वादों के नारों में ही खोई रहेगी?
अब निर्णय सरकार को करना है—समाधान या संघर्ष!
#जनसेवा_मित्रों_को_बहाल_करो #रोजगार_का_हक
@ravish_journo@INCMP@INCIndia@priyankagandhi@ReporterRavish@Anurag_Dwary@akanshathakur7