സുരക്ഷിതമായിരിക്കുക
मेरी मौत की FIR मत करवाना, फैसला ऐसा करना कि राक्षसों में त्राहि-त्राहि मच जाए
१. अनुसंधानकर्ता,
२. ठ से ठठेरा ( PBUH )
३. इतना ही बहुत है
@janardanmis भांडपा वालों ने ही ली होंगी , या फिर घूस के पैसे से पलते भ्रस्ट सड़कारी अधिकारियों के परिवार ने .. या फिर बड़े पूँजीपतियों ने .. जिन्होंने मोती नाम का कुत्ता पाला है
आम आदमी तो टैक्स की लूट से त्रस्त है
गाड़ियाँ बिकने से इकोनॉमी का क्या लेना देना है ?
सड़कारी दल्लागिरी बंद करो
यदि इस्लाम भारत में ना होता तो
1,, ज्यादा जेलों की जरूरत नहीं पड़ती,
2,, कम से कम हमारी जनसंख्या 30 करोड़ कम होती,,
3,, अनपढ़ लोगों की संख्या कम होती,,
और हमारी जमीन पर मस्जिद मदरसे और मजारे ना होती,,
4,, दिन में 5 बार मस्जिदों से चीखे ना निकलती,,
5,, अलग कानून की जरूरत ना होती,,
6,, मांसाहार का प्रचलन कम होता,,
7,, गंदगी कम होती,, पानी का बचाव होता,
8,, आतंकवाद गुनाह कम होते,,
9,, बुरखे में घूमती भूत प्रेत ना होते,,,
10,, बम कम फुटते
11,, दंगे ना होते,,
12,, हमारे धार्मिक यात्रा पर पत्थरबाजी ना होती,,
13,, हमारे धार्मिक स्थलों पर और यात्रा पर पुलिस व्यवस्था सुरक्षा कम होती,,
14,, भारत से प्रतिभा पलायन कम होता,,
15,, ज्यादा लोग टैक्स देते और ज्यादा सुविधाएं मिलती,,
16 सीमा पर ज्यादा सेना की जरूरत ना पड़ती,,
17,, किसी भी धर्म के देवी देवता मंदिर मूर्ति का अपमान ना होता,,
18,, हमारी हिंदू बहन बेटियां लव जिहाद की शिकार ना होती और ना धर्म परिवर्तन करती और सुरक्षित रहती,,
19,, हमारी गौ माता ना कटती
और हमारे हिंदू बहन बेटियां भी ना कटती,,
20,, हमें भी अपने स्तर से नीचे गिर कर इनको जवाब ना देना पड़ता,,
सबसे जरूरी
हमारी मातृभूमि का बंटवारा ना हुआ होता🇮🇳
अब राघव चड्ढा पर व्यंग्य करेंगे तो पंजाब सरकार ट्वीट डिलीट करवाएगी। हिन्दी में एक कहावत है, ‘बंदर के हाथ उस्तरा’ दे देना।
जिस पंजाब से पचासों कॉमेडियन आए हैं, वहाँ की सरकार को व्यंग्य से आपत्ति है! शीघ्र ही एक और व्यंग्य ले कर आऊँगा, चिंता न करें।
देखिए जहाँ आज हनुमान मंदिर तोड़ा गया है।
उसके 100 मीटर के अंदर ही ईदगाह मस्जिद है और उसके साथ में ही DDA के पार्क को क़ब्ज़ा करके “वजू” बना दिया गया है।
क्या इस DDA पार्क का ये अवैध क़ब्ज़ा हटाएगा कोई…?
ये रिपोर्ट कुछ महीने पहले ही की थी।
शर्मनाक!
कट्टरपंथियों ने किशोरी का किया रेप।
फिर दरगाह ले जाकर जबरन कराया कन्वर्जन, खिलाया मांस।
आरोपियों की पहचान शैन रईस खान, अबुहिद खान, नुक्शत खान और निक़हत मर्चेंट के रूप में हुई है।
मामला महाराष्ट्र के ठाणे का।
नूँह में महापंचायत हुई और उन्होंने तय किया है कि चाहे अनुमति मिले या न मिले, 28 अगस्त को बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा पूरी की जाएगी। साथ ही उन्होंने नौ अन्य माँगें रखी हैं।
@mlkhattar के लिए यह सर्वोपयुक्त समय है कि वो इस यात्रा को @anilvijminister के साथ नेतृत्व दें ताकि हिन्दुओं का प्रशासन पर विश्वास वापस लौटे।
महापंचायत ने माँग रखी है कि केस की सुनवाई नूँह के बाहर हो, जाँच NIA करे, मृतक हिन्दुओं के परिजनों को एक-एक करोड़ की राशि मिले, नूँह को गौमांस माफिया मुक्त बनाया जाए, नूँह का जिला स्टेटस रद्द हो, हिन्दुओं के दुकानों-घरों के जलने का ऑडिट हो, रोहिंग्या आदि से मुक्त कराया जाए, दंगारोधी सैनिक बल पूर्णकालिक रूप से बनी रहे, हिन्दुओं को हथियार लेने का लाइसेंस लेने में ढील मिले।
#MewatAntiHinduRiots
आज लोग Covid की वजह से नहीं बल्कि हिंदू-मुस्लिम दंगों की वजह से पलायन कर रहे हैं,Work from Home कर रहें हैं।हमने Covid को तो क़ाबू में कर लिया लेकिन सांप्रदायिक दंगों की vaccine नहीं खोज पाए।
क्या 1947 में धर्म के नाम पर भारत के विभाजन का फ़ैसला नाकाम रहा ?
भाजपा आइटी सेल के तोप-तलवार का ट्विटर हैंडल देखिए जा कर। मेवात की घटना पर जो ट्वीट है वह खानापूर्ति है। बारह घटनाओं पर ट्वीट में मेवात भी एक ट्वीट हा। ये लोग दो दिन भी एक विषय पर लगातार ट्वीट नहीं कर सकते।
केवल PM की स्पीच हो, तो दिन के बारह ट्वीट होंगे।
भगवान ही मालिक है!
कुछ नेताओं से भी ज़्यादा ख़तरनाक हैं वो पत्रकार (पिद्दी मीडिया) जो बकायदा स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। देश में कहीं कोई एक अकेली घटना में कोई एक चुन्नू सा व्यक्ति भी जय श्री राम बोलकर कोई क्राइम कर दे तो पूरे देश को हिंदुत्व से खतरा बता देते हैं लेकिन जैसे ही एक पूरी भीड़ अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए या सर तन से जुदा के नारे लगाते हुए पत्थर, पेट्रोल बम तक चला दे तो सरकार, पुलिस, मीडिया, मंगल ग्रह, एलियन वगैरह वगैरह की ज़िम्मेदारी तय करने लगते हैं लेकिन उस दंगाई भीड़ को मासूम बताकर बचाने में जुट जाते हैं। गुजरात दंगों से लेकर दिल्ली दंगों और नूंह हिंसा तक देख लीजिए, सेम पैटर्न है। इनकी मोडस ऑपरेंडी का हिस्सा है एक्शन को छुपाना और फिर उस एक्शन पर रिएक्शन हो जाए तो उसे हाइलाइट करके हिंदुओं को कलप्रिट बताना। हेडलाइन्स में अपराधी को राम भक्त गोपाल लिखना लेकिन आरोपी दूसरे धर्म का हो तो उसे IIT ग्रेजुएट या गरीब टीचर का बेटा बताना। इनका हुनर और इकोसिस्टम ऐसा है कि ये आतंकी तक को मासूम और मासूम को आतंकी बता सकते हैं। हज़ारों उदाहरण हैं। लेकिन वक्त हैं कि इनलोगों को पहचानिए। जो इनके जाल में फंसे हैं उन्हें भी इनका असली चेहरा दिखाइए। सेक्यूलरिज्म के नाम पर अपराधियों का धर्म देखकर नेरेटिव तैयार करना इनका पुराना हथियार है और यही लॉलीपॉप चुसा चुसाकर इन्होंने अपराधियों के मन में भी भर दिया है कि जो उनका अपराध छुपाए वो उनके साथ है और जो सवाल पूछे वो दुश्मन है। मोदी-योगी के विरोध के नाम पर ये स्लीपर सेल अब न सिर्फ एक्टिव है बल्कि चरम पर जाकर काम कर रहा है। इनसे बचिए, देश को बचाइए।