एक सर्वे अनुसार 99% गांव में दलित आपस में शादी ब्याह नहीं करते!
81% SC/ST एक्ट OBC पर लगते हैं!
अधिकांश SC/ST एक्ट के मामले झूठे निकलते हैं!
खड़गे जी के शुद्धिकरण episode में खुद दलित शामिल थे!
और आपको अगर इतनी चिंता है खड़गे जी की, तो उनको PM उम्मीदवार क्यों नहीं बनाते?
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
ब्रो! पहले तो धमकी देना और बाप पर जाना बंद करो। हम आपको और आपके जैसे हर नेता को हर गठबंधन में मंत्री बनते देख चुके हैं।
कोई किसी का अधिकार नहीं छीन रहा। अठावले जैसे लोग बाल्मीकि, मुसहर, भुइयाँ, डोम, मातंग आदि को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहते इसलिए उपवर्गीकरण जैसी समीक्षा पर बिलबिला उठते हैं।
आप एक विचारधाराहीन नेता हैं जो दुर्भाग्य से अपने जाति समूह का स्वघोषित नेता बन कर, उसी समूह की 1000 अन्य जातियों का अधिकार खा रहा है।
मेरी औकात यही है कि मेरे बाप नौ बार के सांसद नहीं थे बल्कि ‘लाल कार्ड’ धारक किसान रहे और मैंने अपनी प्रतिभा के बल पर वह सब पाया, जो तुम्हारे चिराग जी नौ बार के सांसद पिता के पुत्र हो कर भी कभी पा नहीं सकते। उनको खड़े होने के लिए डंडा चाहिए, चलने के लिए बैसाखी, बोलने के लिए बासी लेख।
श्री चिराग पासवान जी, आपने कहा आरक्षण पर समीक्षा तो छोड़िए, चर्चा भी नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ को इतने लोग सड़कों पर आ जाएँगे कि सँभालना कठिन हो जाएगा।
मुझे नहीं लगता कि आपको ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का अर्थ भी पता है। नौ बार के सांसद और विधायक पिता के पुत्र, आज भी आरक्षित सीट से राजनीति कर रहे हैं। और दुर्भाग्य कि आज भी अपने समर्थकों को आप आगजनी-दंगा करने वाले गुंडों की तरह ही देखते हैं कि इन्हें सँभालना मुश्किल हो जाएगा।
आप ऑप्रेस्ड हैं, दलित हैं, पीड़ित हैं और आप सड़कों पर आने की धमकी भी दे देते हैं, ये विरोधाभास कैसे बाँच लेते हैं आप?
और हाँ, आपके चाहने, न चाहने से कुछ नहीं होता। घर में टीवी है तो एकाध बार डिबेट देखिए कि ‘चर्चा’ किस विषय पर हो रही है। और @JPNadda जी आरक्षण पर सोच रहे हैं या नहीं, यह भी आपको पता चल जाएगा।
वैसे यह भी ठीक है कि जब आपको ही ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का नहीं पता, तो जिन्हें आप सड़कों पर लाना चाह रहे हैं, वो कितना ही समझ पाएँगे। आपकी जाति SC का सबसे बड़ा हिस्सा ले जाती है। पासवान, चमार, धोबी और पासी 95% आरक्षण ले रहे हैं।
तो देखिए, युवा बिहारी @iChiragPaswan जी, चर्चा तो आरंभ हो चुकी है और @BJP4India ने एक कदम आधिकारिक रूप में बढ़ाया है, एक कदम अनाधिकारिक रूप से अन्य लोगों से रीच आउट कर के।
आप ‘बिहारी फर्स्ट’ की बात करते थे, ये अचानक से माफिया की भाषा क्यों बोल रहे हैं। आप तो मोदी जी के हनुमान हैं, मोदी जी पर विश्वास रखिए। वो चर्चा करवा रहे हैं, वरना आपको लगता है कि अनिल बेलूनी जी की कृपादृष्टि के बिना कोई भी टॉपिक चर्चा में आ सकता है?
गेम समझिए। परिस्थिति बदल रही है। महबूबा ने भी धमकी दी थी। वीपी सिंह को भी लगा था कि वो अनंत काल पीएम रहेगा। जनता से उसी पार्टी को चुना जिसके नेता ने संसद में खड़े हो कर ओबीसी आरक्षण का विरोध किया था।
नेहरू ने OBC को 1955 में ही कोटा देने का विरोध किया था। 1961 में मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में नेहरू ने आरक्षण का विरोध किया था। पर वो लगातार चुनाव जीतते रहे। तो ऐसा तो है नहीं कि यदि @narendramodi आज इस पर समीक्षा करें, और वह चुनाव हार जाएँगे!
संभव है कि सवर्ण और अनरिप्रेजेंटेड ओबीसी, एससी एकमुश्त वोट दे दे! इसीलिए, चर्चा और समीक्षा दोनों हो रही है, और हम रिफॉर्म भी करवा लेंगे।
आरक्षित वकील साहेब, पहले 15% SC में 'जितनी आबादी, उतना हक' तो दिलवा दो! 'दलित' कौन सी एक जाति है? दलितों में मुसहर, डोम, भुइयाँ, मातंग जैसी अनेक जातियों को क्या आपने सामाजिक न्याय दिलवाया?
दलित कोई जाति नहीं, एक जाति समूह है। रावण कोई 'दलित नेता' नहीं, जाटव नेता है जो चाहता नहीं कि बाल्मीकि और मुसहर समाज को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार मिले!
उपवर्गीकरण पर बिलबिला काहे रहे हो?
पंजाब के शिक्षा मंत्री ने ये फोटो जारी करके पंजाब को देश में नंबर 1 बताया है 😂
इन फोटो में "Deer को Dear" लिखा गया है
"Vegetables को Vegitables" लिखा गया है
और ये शराब के दलाल आपिए पंजाब में 'शिक्षा क्रांति' बता रहे है 🤦♂️
पहले 12 साल दिल्ली को बर्बाद किया, टॉयलेट को क्लास रूम बना दिया, कितने स्कूल अभी ही जर्जर अवस्था में हो गए हैं, क्योंकि दिल्ली का शिक्षा मंत्री ही शराब मंत्री था और वो 1 पर 1 फ्री बेचने में लगा था, शिक्षा पर ध्यान ही नहीं था..
बोलने में भी शर्म नहीं आती इन मक्कारों को
श्री नेगोशिएशन प्रताप @JPNadda जी,
सादर चरणस्पर्श! अभी आपका यह पोस्ट प्राप्त हुआ और मन आह्लादित हो गया कि सरकार ने आदरणीय हर्ष भाई जी की चिट्ठी पर (जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं था) विचार किया और आप पुनः मिलेंगे। आपसे एक त्रुटि हो गई कि आपने आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे श्री आनंद स्वरूप जी को साथ नहीं लिया!
आपने पहले तो (अपने ही द्वारा प्लांटेड) आदरणीय हर्ष भाई को किडनैप करवाया (जैसा कि आदरणीय हर्ष जी ने वीडियो में कहा था), और फिर नीली कलम से दो कौड़ी की डिमांड वाली चिट्ठी लिखवाई, और अब आप सौहार्दपूर्ण वार्ता भी कर रहे हैं।
यह पोस्ट पाते ही @RHAreforms वाले सारे लोग, इंक्लूडिंग @neha_laldas, लिखना छोड़ चुके हैं और उस चिट्ठी का प्रिंट आउट ले कर उत्तर प्रदेश के गाँवों में ड्रोन से गिरा रहे हैं कि सरकार ने हमारी माँगें मान ली!
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यदि सरकार को ऐसा कोई भी भ्रम है तो कोई टेबलेट खा लो। ये पुरानी और सर्वविदित तकनीक है: अपने ही द्वारा प्लांटेड व्यक्ति को नेता मान कर नेगोशिएट करने का स्वाँग रचो, फिर वास्तविक माँगों को डकार जाओ। मैं आपसे वादा करता हूँ कि मुझे आपके साथ बैठना नहीं पड़ेगा और आप हमारी माँगें भी मानोगे।
थोड़ी भी लज्जा बची है और पार्टी की थोड़ी भी चिंता है, तो खेल खेलना बंद करो। लोग ब्रजेश पाठक वाले स्टंट से ही हर्ष को नकार चुके हैं।
Thousands of General Category students supported your CJP protests, but when they were on the streets fighting for their rights, you were in hiding.
You should have zero say in this.
Spoke to Prime Minister Balendra Shah and conveyed condolences on the loss of lives due to the floods in Nepal. The people of India stand in solidarity with their sisters and brothers in Nepal at this difficult time.
India is ready to provide all possible humanitarian assistance to Nepal. Our teams are coordinating closely on rescue and relief efforts.
@PM_nepal_@ShahBalen
ये चूतिया लॉ में ही नहीं कॉमन सेन्स और फिजिक्स में भी फेल है! इसके हिसाब से पंखा हवा ‘बनाता’ है, हवा को डिस्प्लेस नहीं करता।
ऐसे चूतिए देश की शिक्षा व्यवस्था ठीक करने निकले हैं। नाम में ही ‘ass’ है, तो बहुत कुछ आगे कहने की आवश्यकता नहीं।
अजीत जी के साथ समस्त भारत के सनातनी हे और मेरा सुझाव हे कि उनके द्वारा कोई अपराध नहीं किया हे और न ही उनका व्यक्तव्य किसी भी अपराध की श्रेणी में आता हे इसलिए हम सब को मिलकर पुलिस से ही खात्मा लगवाए कृपिया सभी साथ दीजिए 🙏
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?