RPSC व NET UGC की टकरा रही परीक्षा तिथि को परिवर्तित करके इसके अलावा अन्य परीक्षाओं को यथावत रख सकते हैं।
मान लीजिए इस तरह का फैसला आता है तो फिर अपीयरिंग स्टूडेंट्स को राहत कहा ??
◾बाकि कुछ समय बाद स्थिति क्लीयर हो जायेगी।
एक सवाल पूछ रही हूं।
Q: उपेन यादव कहा निकल गया ?
Note:-मनोज मीणा का जितना संघर्ष आज तक किसी ने नहीं किया। मनोज पीड़ित छात्रों की आवाज़ है
#फर्स्ट_ग्रेड_परीक्षा_स्थगित_करो
आज भजनलाल सरकार ने फर्स्ट ग्रेड अभ्यर्थियों के सपनों को दफ़न कर अपना असली चेहरा छात्रों के सामने रखा है । माननीय मुख्यमंत्री जी आप सत्ता में युवाओं के मुद्दों पर आएं , आपने अपनी हठधर्मिता के आगे इन भूखे प्यासे बेरोजगार छात्रों के साथ कुठाराघात किया है ।
1. RPSC कह रही है कि पेपर छप चुके हैं छात्र सिर्फ ये पूछ रहा है इससे पहले RPSC ने कई बार तिथि से एक दिन पहले परीक्षा स्थगित कर छात्र हित में फैसला लिया है ।
2. एक अभ्यर्थी एक साथ दो परीक्षाएं कैसे दे पाएगा ?
अपेयरिग वाले छात्रों को आपने एक्जाम देने से ही वंचित कर दिया है ।
3. यूआर साहू जी आपसे उम्मीद थी कि आप वार्षिक कैलेंडर जारी करेंगे लेकिन आप भी इसी निकृष्टतम सिस्टम का हिस्सा बन गये है । @RPSC1@RajCMO@BhajanlalBjp
RPSC ने UGC NET परीक्षा को भी महत्व नहीं दिया।
कहा NET की जगह First grade Exam दीजिए।
ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या नगण्य है इसलिए हम परीक्षा आगे नहीं बढ़ा सकते।
राजस्थान के गृह राज्य मंत्री को आज फर्स्ट ग्रेड स्कूल लेक्चरर परीक्षा स्थगित मामले में जो प्रतिवेदन दिया है वो कल हाई कोर्ट की सुनवाई में पेश किया जाए।
सरकार की वार्ता के चक्कर में युवा बेरोजगारों का भविष्य बर्बाद न हो।
#फर्स्ट_ग्रेड_एग्जाम_डेट_परिवर्तन_करो@manojmeena
आज हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ सत्ता मौजूद है पर संवेदना नहीं। मंत्रियों के चेहरे हैं पर अधिकार नहीं। जनता के सवाल हैं पर जवाब कहीं नहीं है। अफसरों की फाइलें चलती हैं, मंत्री मौन बैठे रहते हैं, और जनता थकी हुई आँखों से सिर्फ उम्मीद का अंत देख रही है। ब्यूरोक्रेसी सरकार के ऊपर बैठी है, मंत्री खुद को असहाय महसूस करते हैं। जनता तो बहुत दूर की बात है, आज के नेता भी नहीं जानते कि निर्णय कहाँ और कैसे लिए जा रहे हैं।
आज का मंत्री अगर एक ट्वीट करना भी चाहे तो सोचता है "क्या मुझे अनुमति है?" आज का विधायक अगर जनता की आवाज उठाए तो अफसर उसकी फाइल रोक सकता है। आज का जनप्रतिनिधि अगर सच बोले, तो वह पार्टी लाइन से बाहर माना जाता है।
ये वही लोकतंत्र है जिसमें जनता ने इन्हें चुना था अपनी आवाज़ बनने के लिए। लेकिन आज की सच्चाई यह है कि जनता की आवाज़ खुद अपनी ही सरकार में दब चुकी है।
आज़ अगर कहीं कोई घटना घटित हो जाए वहां न्याय के लिए बैठ जाना गुनाह है, धरने पर कोई वार्ता के लिए नहीं आएगा बल्कि पुलिस को आगे किया जाएगा लाठी लेकर।
आज अगर बेरोज़गार नौकरी की माँग करता है, तो उस पर मुकदमा दर्ज होता है। आज अगर किसान धरना देता है, तो उसकी आवाज़ से पहले लाठी चलती है। आज अगर महिला सुरक्षा की बात करती है, तो उसे चुप करा दिया जाता है। क्योंकि अब मंत्री नहीं बोलते, अफसरों की चुप्पी बोलती है।
आज जो शासन है, वह कागज़ पर तो सशक्त दिखता है लेकिन ज़मीन पर खोखला है। जहाँ बेरोज़गार को जवाब नहीं मिलता, किसान को भरोसा नहीं मिलता, और जनता को नेतृत्व नहीं मिलता।
आज का राज वैसा हो गया है जहाँ आदेश ऊपर से आता है और संवेदना नीचे गिरती जाती है।
जयपुर में ग्रेड फर्स्ट परीक्षा को पोस्टपोन की मांग कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए प्रशासन पहुंचा
वार्ता में प्रशासन ने कहा- "अनशन खत्म करो, सक्षम स्तर पर बातचीत चल रही है"
नोट- कल इस मामले में कोर्ट में सुनवाई है, कल एडमिट कार्ड भी जारी होने हैं!
#First_Grade#Rajasthan