Hindagi | हिन्दगी is a central place for writers, publishers, books, bookstores, librarians, and readers to congregate and celebrate books and literary culture.
एक घर प्रेम ने उजाड़ दिया
एक घर ग़रीबी ने
इस बात से नहीं हुआ मैं
इतना निराश इतना उदास
जितना इस बात से
क्यों उजड़ ��ए गाँव से दो घर
किसी ने नहीं पूछा किसी से
प्रभात
मैंने नवजात शिशु को देखा
शिशु देर तक
मेरी अंगुली पकड़े रहा
��ैं एक अलौकिक
आत्मीय ऊर्जा से भर गया
पहली बार
मुझे एहसास हुआ
हम कविता को
छू भी सकते हैं।
जसवीर त्यागी