Just finished #NepoKid by Revan Patil and wow... my mind is officially blown! 🤯
If you love fast-paced psychological thrillers with rich vs poor drama, dark secrets, and a jaw-dropping twist you will NEVER see coming, pick this up immediately! 💯📖
5/5 ⭐ #Thriller@re1patil
I picked up HEALING RESFEBER expecting poetry.
What I found was a journey through grief, fear, and self-discovery.
The writing is simple, but some lines hit hard.
If you've ever lost yourself loving someone, this book will speak to you.
⭐️ 5/5
#BookReview#BookTwitter#Poetry
just finished NEPO KID 😱
a mom who stayed quiet for so long, a brother with one eye fighting back, gifts coming back crazy...and the plot twists start coming one after another and i was like NO WAY.
Go blind or you’re missing out on the biggest mind blow ever
#NEPOKID#BadNEPO
देवराहा बाबा ने कैसे ये ज्ञान भरी बात एक पत्रकार को बताई, हैं। भारत में भी ऐसे कई संत हुए हैं, जो 250 साल तक स्वस्थ रहकर जीवित रहे।
देवराहा बाबा इसका उदाहरण हैं। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उनके बारे में कहा था कि उन्होंने बचपन में देवराहा बाबा को जैसा देखा, वैसा ही तब भी पाया, जब वे स्वयं वृद्ध हो गए। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बाद कई राष्ट्रपति बने। समय गुजरता गया। फिर प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर और अटल बिहारी बाजपेयीजी भी अपने जीवनकाल में देवराहा बाबा से मिलते रहे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते रहे। इधर कई पीढ़ियाँ जन्म लेकर वृद्ध होती रहीं, लेकिन देवराहा बाबा सैकड़ों साल जैसे-के-तैसे बने रहे। अभी 1990 में ही उन्होंने समाधि ली। यह किसी को भी हैरान करनेवाली बात थी कि भला उनकी इतनी लंबी दीर्घायु के पीछे रहस्य क्या है ?
रहस्य की यही जिज्ञासा लिये मेरे एक पत्रकार मित्र भी उनके पास गए। देवराहा बाबा का इंटरव्यू लेने वे वृंदावन गए थे। बाबा लकड़ी के एक ऊँचे मचान पर बैठे थे। उन पत्रकार का मकसद बस उनकी लंबी उम्र का रहस्य जानना था, जिनकी इतनी लंबी आयु की बात भारत के राष्ट्रपति से लेकर कई प्रधानमंत्री तक कहते थे। इन पत्रकार ने बाबा से पूछा, "बाबा! आपकी इतनी दीर्घायु का रहस्य क्या है ?"
देवराहा बाबा ने मुसकान के साथ जवाब दिया, "बचवा, ई कौनो बड़ी बात नाही. कुछ और पूछ ले।" लेकिन कुछ और पूछने से तो उनकी स्टोरी नहीं बन पाती, तो उन्होंने इसी प्रश्न का उत्तर जानने के लिए बाबा से फिर आग्रह किया। तब बाबा के कुछ ऐसे शब्द थे, "अरे बचवा ! दिन में चलावे चंद्र और रात चलावे सूर्य, सो योगी हुई जावे।"
बाबा के इस उत्तर से उन पत्रकार के पल्ले कुछ नहीं पड़ा था। बाबा के उत्तर से कोई भी चक्कर में पड़ जाता कि बाबा दिन में चंद्रमा और रात में सूर्य की उलटी बात कर रहे हैं! किसी को लग सकता है कि वे उलटा बोलना चाहते होंगे ! भूलवश उनके मुँह से दिन में चंद्र और रात में सूर्य निकल गया होगा! लेकिन वे किस चंद्र और सूर्य की बात कर रहे थे, यह समझ पाना सामान्य जनों के वश की बात नहीं थी। लिहाजा उन पत्रकार महोदय ने समझने की चेष्टा तक नहीं की कि बाबा क्या बोल रहे हैं? उनकी सुई तो बाबा की लंबी उम्र का रहस्य जानने में अटकी थी। जबकि बाबा वही बता रहे थे कि उनकी आयु का रहस्य क्या है? दरअसल, जो कोई भी बाबा से उनकी लंबी उम्र के बारे में पूछता था, वे सभी को वही बोलते थे, जो उन पत्रकार को बोला। पर वास्तव में देवराहा बाबा क्या बोल रहे थे, इस रहस्य को आप आगे जानेंगे।
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