Thank you @thekiranbedi
It is indeed the need of the hour to see that real spirituality works in both directions:
It looks outward with honesty, and that is rationality.
And it also looks inward with honesty, and that is self-knowledge.
Rationality and self-knowledge must go together, so say the Upanishads:
अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते ।
ततो भूय इव ते तमो य �� विद्यायां रताः ॥
They enter into blinding darkness who worship only avidyā (outer rational knowledge);
into still greater darkness those who delight in only vidyā (inner self-knowledge).
विद्याञ्चाविद्याञ्च यस्तद्वेदोभयं सह ।
अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते ॥
He who knows vidyā and avidyā together crosses death through avidyā and attains immortality through vidyā.
~ Ishavasya Upanishad, Verses 9&11
@thekiranbedi@Advait_Prashant So true, Ma'am. Without knowing the 'self,' all our actions are just aimless shooting in the dark. Acharya Prashant’s clarity in explaining these timeless concepts is exactly what the modern world needs right now. @Advait_Prashant
Acharya Prashant receives fresh death threat over his remarks honouring Dr Ambedkar
· Renowned philosopher and author Acharya Prashant has received a fresh death threat following his recent remarks in honour of Dr Bhimrao Ambedkar, triggering concern among his supporters and prompting his foundation to initiate legal action
🔗: https://t.co/nF3kygI57E
राहुल,
>> इसका क्या अर्थ है: "गलती से मेरा नंबर चला गया"?
अपने आप फ़ोन नंबर चलकर हमारे पास आया था? संस्था आपको स्वयं कभी सामने से कॉल नहीं करती - पहले आपने ख़ुद वेबसाइट पर जाकर फ़ॉर्म भरा था और उस फ़ॉर्म में अनुरोध/स्वीकार किया था कि संस्था आपको कॉल करे।
और अगर आप चाहते थे कि संस्था कॉल न करे, तो वेबसाइट पर यह भी साफ़ बताया गया है कि अकाउंट कैसे डिलीट करते हैं। WhatsApp के हर संदेश पर लिखा आता है - "इन संदेशों को रोकें" (STOP Messages)। आप अपना नंबर हटा सकते थे। आप पढ़े लिखे तो होंगे? पाँच साल में ये नहीं पता चला कि अकाउंट कैसे डिलीट करना है? रोज़ सैकड़ों लोग करते हैं, बस आप ही अनूठे निकले.
>> “रोज़ कॉल और व्हाट्सएप आते हैं कि पैसे दो और कोर्स लो। ये अध्यात्म के नाम पर शुद्ध धंधा चला रहे हैं।”
भाई, तुम्हें मुफ़्त में कुछ दिया जा रहा है, और अगर तुम कुछ दो भी दोगे तो भी 50 रुपए दोगे। यही वो न्यूनतम योगदान राशि है जिस पर दो लाख छात्रों को संस्था आज गीता पढ़ा रही है। आज तक तुमने 50 रुपए के लिए किसी को बार-बार कॉल कर���े हुए सुना है? बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भी पैसे बचाने के लिए ऐसा नहीं करतीं। जितना तुम दोगे, उससे कहीं ज़्यादा संस्था सिर्फ़ कॉल और WhatsApp पर तुम पर खर्च कर देती है। तुम्हें गीता से जोड़ने से पहले ही संस्था तुम पर ज़्यादा खर्च कर चुकी होती है - और इसमें हम ये तो गिनाना भी नहीं चाहते कि गीता समझने का मूल्य क्या होता है। तो फ़ोन तुमसे कुछ लेने के लिए नहीं, तुम्हें कुछ देने के लिए किया जाता है।
जो भी व्यक्ति आचार्य जी की गीता से जुड़ता है, उसे
🔸महीने के तीसों दिन या तो सत्र या तो परीक्षा उपलब्ध करवाई जाती है। प्रतिदिन।
🔸गीता के हर श्लोक को दो-दो घंटे समझाया जाता है, और हर श्लोक की रिकॉर्डिंग्स पिछले कई सालों की आपके लिए उपलब्ध हैं।
🔸सिर्फ़ गीता ही नहीं, कबीर साहेब के भजन, बौद्ध दर्शन, अष्टावक्र गीता, ऋभु गीता, लाओ त्ज़ू पर भी सत्र होते हैं।
🔸एक पू��ी सोशल मीडिया ऐप आपके लिए बनाई गई है जहाँ गॉसिप नहीं, गहरी चर्चा होती है। एक सोशल मीडिया के IT system पर कितना खर्चा होता है, कुछ अंदाज़ा है? और वो आपको बिना किसी शुल्क के मिलता है।
🔸Ask AP AI आपको मुफ़्त में, हाँ मुफ़्त में, ऐसे जवाब देता है जो पिछले 25 सालों की आचार्य जी की मेहनत से निकले हैं।
🔸महीने में 15 गीता परीक्षापत्र बनाए जाते हैं, आपकी समझ को धार देने के लिए।
थोड़ा बुद्धि को ज़ोर दो, ये सब ₹50 में देना ��ुमकिन है? जिन्हें तुम धर्मगुरु वगैरह कहते हो, वे तुम्हें ₹50 में मिलने भी न दें, सिखाना तो दूर की बात है। इतने में तो Zomato पर एक समोसे की डिलीवरी भी नहीं आती।
और तुम कहते हो हम धंधा चला रहे हैं? अरे, ये धंधा नहीं, अहंकार के लिए बहुत बड़ा फंदा है, जो गीता से भागना चाहता है। तुम्हारा यह ट्वीट बता रहा है कि हमारा तरीका सच में कारगर है।
>> “इतनी शिद्दत से तो कोई भगवान का नाम नहीं जपता, जितनी शिद्दत से ये लोग मार्केटिंग करते हैं।”
ये भगवान का नाम भी बिना मार्केटिंग के तुम तक नहीं पहुँचा होता - पर खैर, इतना तुम नहीं समझ पाओगे। शुक्र करो कि संस्था मार्केटिंग पर खर्चा कर रही है, वरना 2 लाख से भी ज़्यादा लोग कभी गीता सुनने और परीक्षा देने नहीं आते, वो परीक्षा इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के मुताबिक़ अध्यात्म क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर पहली attempt में पास कर लोगे न राहुल, तो जीवन भर के लिए गीता तुम्हें मुफ़्त में सिखाई जाएगी।
>> “अगर आपके ज्ञान में वाकई दम होता, तो आपको फोन कर-करके लोगों से भीख नहीं मांगनी पड़ती।”
उपनिषदों में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? सार्त्र, हैडेगर, विटगेंस्टीन में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? शून्यता सप्तति में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़ी है?
जिस भी चीज़ में दम है, वो तुमने ख़ुद कभी नहीं पढ़ी, ��ुम्हें ज़बरदस्ती ही पढ़वाई गई - स्कूल से लेकर कालेज तक। अपनेआप तो सड़ा कोकशास्त्र और व्हाट्सएप साहित्य ही पढ़ा है तुमने। अपनी ज़िंदगी देखो - तुम हो किस गुमान में? तुम्हें सचमुच लगता है तुम सच और गहराई की ओर अपनेआप ही चले जाओगे? नहीं, कभी नहीं। अपनेआप तो झूठ और गंदगी ही फैलते हैं। सफाई अपने आप कभी नहीं हो जाती - उसके लिए किसी को जान लगानी पड़ती है। सच स्वयं नहीं फैलता, दार्शनिकों और ज्ञानियों को सच फैलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है।
फ़ोन कर कर के भीख नहीं माँगी जा रही। फ़ोन कर कर के इस दुनिया को कुछ ऐसा दिया जा रहा है जो माँगने की भी इसकी औक़ात नहीं है। एहसान समझो कि तुम्हें कॉल किया जा रहा है। वरना आज कोई नहीं है जो तुम्हें गीता का अतिशुद्धतम अर्थ समझा रहा हो, जो अपना IIT और IIM का करियर छोड़कर तीसों दिन आपको समर्पित कर रहा हो और ऊपर से इस काम के लिए खुद खर्चा कर रहा हो ताकि तुम्हें कुछ सिखा सके।
जो काम आज कोई नहीं कर रहा, वो प्रशांतअद्व��त संस्था कर रही है, चाहे वो अंधविश्वास को तोड़ने की बात हो, चाहे ��शु प्रेम सिखाने की बात हो, चाहे स्त्री सशक्तिकरण की बात हो। हमारी संस्था आज इन सब में सबसे अग्रणी है।
अगर ये बात समझ नहीं आ रही तो गीता कम्युनिटी पर आइए और कुछ दिन बिताइए। आपको खुद समझ आ जाएगा, जहाँ हर कुछ मिनटों में नए-नए testimonials आते हैं, जिनमें दुनियाभर के लोग बताते हैं कि गीता मिशन से जुड़ने के बाद उनकी ज़िंदगी में क्या परिवर्तन आया और क्या लाभ हुआ।
और हाँ, हमारे पास तुम्हें किए गए सारे कॉल्स, उ���की ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, तारीख़ और समय सहित उपलब्ध हैं। ऐसी झूठी अफ़वाहें फैलाने के कारण तुम्हारा Twitter account रिपोर्ट भी कर सकते है।
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आपके होने न होने से आचार्य प्रशांत गीता मिशन को कुछ नहीं होगा पर आपका नुकसान जरूर होगा। सच को समझें और अभी जुड़ें:
वेबसाइट: https://t.co/CbUvSIqVnu
गीता मिशन 🔥: https://t.co/31HNg3prBK
आचार्य जी का जीवन और काम: https://t.co/o49cDNzt6N
10,000+ आर���टिकल्स (Open to all): https://t.co/fZl6PuDHR8
160 बुक्स: https://t.co/XSD6HbSRFL
500+ वीडियो कोर्स: https://t.co/Qmboc7Hwn9
1000+ Testimonials: https://t.co/pi1LqP1TJC
Largest online examination on the Bhagavad Gita conducted by a spiritual organisation:
https://t.co/EzikPkHm88
@Advait_Prashant
As someone who spent a couple of years sitting at the feet of Acharya' jee @Advait_Prashant (being a student) studying the Bhagavad Gita, something shifted irreversibly inside me: I can no longer watch religious traditions (any tradition, including my own Muslim heritage) harm children in the name of “spirituality” and stay silent.
Acharya taught us that true scripture is meant to liberate the mind, not imprison it; it is fire that burns ego, not a whip that breaks a child’s spirit. Every time I see these viral videos now (a little boy collapsing in tears after memorising the entire #Quran, adults cheering as if he’s been touched by God instead of pushed to the edge), something boils in me.
This is no longer “their problem” or “our beautiful tradition.”
This is my community still traumatising its children, century after century, and calling the tears “khushu” and the breakdown “love for Allah.”
I stayed quiet for too long out of guilt and fear of being labelled Islamophobic. No more.
If the Gita made me fall in love with truth, then truth now demands I speak when I see a 10-year-old’s childhood sacrificed on the altar of mechanical memorisation.
👉🏻DAY 3
🌟TRUTH WITHOUT APOLOGY 🌟
"Identity is not revealed by what you say what you want it is revealed by what you actually chase."
"You are not your declared values .You are your lived patterns ."
अब जाके पता चला मेरा बात और औकात में इतना अन्तर क्यों है?😆🥲
झींगुर को श्रेय और प्रेय दोनों ही चाहिए 😢
कोई बात नहीं आचार्य जी के जूते पड़ेंगे तो सही रस्ते पे आजाऊंगी।
#AcharyaPrashant #IndianPhilosophy #Books
Posted by Vaishnavi Choubey on Acharya Prashant's Gita Mission App.
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🔥 "बंधन से बोध तक : मेरी गीता यात्रा" 🔱
प्रणाम आचार्य जी 🙏
गीता सत्रों की यह बो���पूर्ण यात्रा अब 18 महीनों से ऊपर की हो चुकी है। बड़ी ही विपरीत परिस्थितियों में — हर तरफ से टूटकर, बंधनों से व्यथित होकर, उड़ान की बेसब्री के कारण — आपके सानिध्य को स्वीकार कर सकी। जानती हूं, मैं आप तक नहीं आई, आप ही अपनी जान लगाकर मुझ तक आए। ❤️
YouTube पर सुनने और e-books को पढ़ने के दौरान संस्था से गीता सत्रों में जुड़ने हेतु कॉल आई। पहले तो पैसों की समस्या और समय के अभाव के कारण जुड़ने से इनकार कर दिया। कुछ महीने बीते तो फिर दिसंबर 2023 में ज्वाइन किया और पूरे महीने में कुछ थोड़ा बहुत ही देखा। दोबारा re-enroll करने की बारी आई तो मना कर दिया। समय गुजरता गया, पुनः मार्च 2024 में सुजाता मैम का फोन आया। उनसे पहली ही बात में मैं सत्रों से जुड़ने हेतु सहमत हो गई।
आत्मनिर्भर नहीं थी तो कुछ प्रयास करके ₹500 अनुदान राशि जुटाई और अप्रैल 2024 हेतु गीता सत्रों से जुड़ गई। जैसे-जैसे सत्रों में आगे बढ़ती वैसे-वैसे सत्रों की उपयोगिता ���ढ़ती दिखती और सत्र मतलब आत्मनिर्भरता तो निर्भरता और अखरने लगती। 💭
कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया पर उससे भी कुछ बात बनती नजर नहीं आई। आखिर एक दिन आत्मनिर्भर बनने और अपने जीवन को नए सिरे से शुरू करने की चाह में एक बड़ा कदम उठाया और घर से दूर आ गई।
सबसे पहले आपसे ऑफलाइन सत्रों में मुलाकात हुई, आपका स्पर्श मिला और आपके शब्द मिले ���
“ज़िंदा गुरु आग होता है। हो ही नहीं सकता कि तुम उसे छुओ और तुम भी आग न बन जाओ।” 🔥
फिर जीवन की एक अनोखी यात्रा ही शुरू हो गई। उन जगहों को देखा जिन्हें देखने के बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी। बुक्सटाल्स में सक्रिय हुए तो दुनिया की अंधी दौड़ का भी कुछ अंदाज़ा लगने लगा। टेलिकॉलिंग में कुछ महीने काम किया तो दिख गया कि दुनिया का बाज़ार किस तरीके से चलता है और यह किस तरह हमें मूर्ख बनाता है। बाइक च���ाना भी सीखा 🏍️। ढेर सारी किताबें पढ़ीं और फिल्में देखीं 🎬। साहित्य की एक अनोखी यात्रा का आरंभ हुआ, जिसमें साहित्य लेखन — कविताएं, कहानियां, निबंध इत्यादि — का भी आरंभ हुआ। सिलाई सेंटर में भी कुछ दिनों तक काम किया ताकि आत्मनिर्भर हो सकूं, लेकिन खुद को उस काम हेतु अनुपयुक्त पाया। और भी बहुत सी चीजें सीखी जो शायद अभी याद भी नहीं आएंगी।
फिर फरवरी 2025 में एक विद्यालय में आवेदन किया और शिक्षक के रूप में कार्यरत हुई। जहां मैं कक्षा 4 से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ाया करती थी। छठवीं से आठवीं तक केवल हिंदी (साहित्य और व्याकरण) और चौथी एवं पांचवीं में General Knowledge और Moral Science पढ़ाती रही। कुछ महीनों तक हिंदी की ऑनलाइन कक्षाएं भी संचालित कीं।
हारमोनियम की भी शुरुआत की 🎹। जिम जाना भी आरंभ कर दिया था 🏋️♀️।
आत्मनिर्भरता तो मिल गई थी, बाकी चीजें भी ठीक ही थीं लेकिन दिख रहा था — जो काम कर रही हूं वो उच्चतम नहीं है। विद्यालय का एक निर्धारित ढांचे में चलना, जिसमें सिर्फ विद्यालय को व्यापार की भांति ही संचालित करना। लोकधर्म का चारों तरफ छाया होना, जो मेरे ऊपर भी संक्रामक बीमारी की तरह पुनः प्रभावी होने लगा था। बच्चों का भी पढ़ाई में कुछ विशेष ध्यान न देना, यदि कुछ बच्चों को छोड़ दें तो। बच्चों को भी अंकों से मतलब, शिक्षक को भी, स्कूल को भी और अभिभावक को भी। जिस कारण मनमाने अंकों से बच्चों को पास करना। हालांकि अनुत्तीर्ण करना तो CBSE खुद भी नहीं चाहता। 😐
दो से तीन बार संस्था से कॉल भी आई कि जुड़िए मिशन से और आचार्य जी की बात को औरों तक पहुंचाइए, लेकिन मेरे तर्कों के कारण मैंने सहमति नहीं जताई।
इस बार जब वो पोस्ट आई जो घरेलू महिलाओं और गृहणियों के लिए थी तो फॉर्म भर दिया, क्���ोंकि लोकधर्म को बड़े करीब से देख लिया था कि यहां रहकर कुछ नहीं होने वाला है। वो लोग तो नहीं ही बदलेंगे, उल्टा हम ही और गहरे गड्ढे में जा गिरेंगे।
फॉर्म भर दिया, इंटरव्यू और ट्रेनिंग के लिए बुलाया भी गया। दीपोत्सव हेतु दिल्ली आने का प्लान तो पहले से ही था लेकिन ट्रेनिंग हेतु और दिनों तक रुकने की योजना बनाई गई।
🗓️ यात्रा का क्रम इस प्रकार रहा —
17 अक्टूबर को झांसी से दिल्ली को निकले।
18 को पहुंचे, 18 और 19 का सत्र लिया।
20 को ऋषिकेश निकल गए। वहां से 22 को वापस आए।
23 से 26 तक आउटरीच की ट्रेनिंग की।
26 की रात को वापस झांसी के लिए निकले और 27 को झांसी पहुंच गए।
तुरंत स्कूल पहुंचे क्योंकि पहले से ही दो छुट्टियां ले चुकी थी और विद्यालय से लगातार फोन आ रहा था।
आज 28 को सिलेक्शन का मेल मिला 📩 और कल 29 को पुनः दिल्ली के लिए निकलना है।
30 को पहुंचना है और 31 को इंड���्शन है।
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https://t.co/fPwiF9jJNO
This picture powerfully reminds us that it’s us, the ego, that constantly pollutes.
The very constitution of man, when governed by ego, is destructive.
And as long as he acts from that centre, he will continue to 𝗲𝘅𝗽𝗹𝗼𝗶𝘁, 𝗰𝗼𝗻𝘀𝘂𝗺𝗲, 𝗮𝗻𝗱 𝗱𝗲𝘀𝘁𝗿𝗼𝘆, whether it’s relationships, societies, or the planet itself.
That’s why Acharya Prashant reminds us that reducing the question of cleanliness to race or nationality is unfair.
It overlooks the deeper, structural factors.
True cleanliness, therefore, has to start from within, from 𝗹𝗶𝘃𝗶𝗻𝗴 𝘄𝗶𝘁𝗵 𝗶𝗻𝗻𝗲𝗿 𝗰𝗹𝗮𝗿𝗶𝘁𝘆.
And when someone lives with inner understanding, they naturally bring 𝗰𝗹𝗲𝗮𝗻𝗹𝗶𝗻𝗲𝘀𝘀 𝗲𝘅𝘁𝗲𝗿𝗻𝗮𝗹𝗹𝘆 as well.
They leave no clutter, neither in the world nor in the minds they touch.
This is what real cleanliness looks like.
✨ *तो आज आपने कितने लोगों को गीता से जोड़ा?*
*मैंने ���ो चार लोगों को जोड़ा*😎
चारों आचार्य जी को पहले से सुनती थीं,
पर ऐप के बारे में नहीं जानती थीं 📱
मैंने उन्हें APP की जानकारी दी —
अब वे सब जुड़ गईं हैं।
छठ में तीन दिन ड्यूटी में साथ थे।छह थे वे।
और ऐसा हो ही नहीं सकता कि
जो मेरे साथ रहे और मेरे से बच जाए 😉
निशाने पर रहते हैं मेरे, सभी लोग 🎯
हाँ, याद आया —दो तीन महीना पहले,
जब पटना राज्य सूचना आयोग गई थी,
वहाँ के ऑपरेटर विक्की का नंबर लिया था ☎️
आज अचानक देखा —
मैंने जो वॉट्सएप स्टेटस लगाया था उन्होंने देखा था।
तो फिर क्या…
सुबह-सुबह लिंक भेजा और वो भी
आज ही सुबह गीता से जुड़ गए हैं।
*तो अब कुल पाँच लोग हो गए*
*जिन्हें आज गीता से जोड़ा है*🌿
*मेरी तो सच में असली वाली छठ मन गई*🌞🌊🌼
आप सब भी बताइए 😎
*प्रेम की दिशा कहती है कि*
*मिटना है, सचमुच अपनी*
*तकलीफ़ का असली इलाज़*
*चाहिए। ये बड़ी मुश्किल दिशा*
*होती है,इसमें हज़ार विषयों*
*के लिए जगह नहीं होती।*
*~ आचार्य जी*🌙✨
@Advait_Prashant
@Prashant_Advait
#AcharyaPrashant #Books
Posted by K.sanju on Acharya Prashant's Gita Mission App.
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After reading this chapter.....we cannot resist to material or people... instead of this we can think what can I create from a material or from a person... to its highest possibility
... that will also be justice to the material or human being
#AcharyaPrashant#IndianPhilosophy
Posted by Bhavika Sankhla on Acharya Prashant's Gita Mission App.
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https://t.co/rvu8pwQ6R7