आज के दिन सायं 6:30 बजे शासकीय आदेशानुसार दीप प्रज्ज्वलन का हेतु या प्रयोजन चाहे जो भी हो किंतु मुझे यह कर्कश कानफोड़ू पटएक-एक जन का मन प्रकाशित हो , कोई भी मन कदापि बुझा न हो , अंधेरे में क़तई डूबा न हो ।
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भावनाओं से बचकर रहने के उपदेश वे भी देते रहते हैं जो आकंठ डूबे हुए हैं भावनाओं में , तो कभी सोचा है कि क्यों ?
आज दुनिया बनावटी और दिखावटी हो चुकी है और कोई भी वह चीज़ जो कृत्रिम होती है वह प्रायः स्वाभाविक से अधिक आकर्षक
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