आपण ले पत भाई, लिखी दिनु थोड़ा।
डंगवाल जात मेरी, हेमंत सिंह न छा।।
पट्टी वल्ला सल्ट, उजराड़ मेरो गौ छा।
#कॉर्बेट वाल & फॉर्मर अंबालावासी ❣️ #TribalStatus✊ #UKD
उत्तराखंड और हिमाचल में टूरिस्ट सीजन पीक पर है।
सड़कें वाहनों से भरी हैं। हर तरफ जाम ही जाम नजर आता है।
लेकिन क्या हम बेहतर ट्रैफिक सेंस रखते हैं?
कम से कम नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से सीख लें तो इस विकराल समस्या का बेहतर हल निकाल सकते हैं।
DGAR Lt Gen Vikas Lakhera को सुनिये।
#uttarakhand
#HimachalPradesh
पिथौरागढ़ के शमशेर सिंह सुन नहीं सकते, बोल नहीं सकते, लेकिन उनकी प्रतिभा की गूंज दूर तक सुनाई देती है।
अत्यंत साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले शमशेर सिंह ने अपने नवाचारों, अद्भुत सोच और कुछ नया करने के जज़्बे से सभी को हैरान कर दिया है। उन्होंने साबित किया है कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती।
ऐसे अनमोल हीरों को केवल एक अवसर, एक मंच और एक कदरदान की आवश्यकता होती है। उम्मीद है कि शमशेर सिंह की विलक्षण प्रतिभा को उसका असली जोहरी मिलेगा और वह उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।@pushkardhami@anandmahindra
#ShamsherSingh #Uttarakhand #Innovation #Inspiration
रुद्रप्रयाग की ग्राम सभा शिवानंदी में रेलवे सुरंग निर्माण के कारण प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सुरंगों से पानी का रास्ता बदल गया, जिससे गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है और कई मकानों में दरारें भी आ रही हैं।
देश में गढ़वाली-कुमाऊनी समुदाय इकलौता समुदाय है 😔
1️⃣ जिसे पहाड़ों और वनों के नजदीक रहने के बावजूद भी वनवासी दर्जा नहीं मिला।
2️⃣ उत्तराखंड राज्य बनने से पहले जिन्हें उच्च शिक्षा में आरक्षण मिलता था। सीमांत जिलों के लोगों को नौकरियों में भी आरक्षण मिलता था, लेकिन वो भी छीन लिया गया।
जबकि देश के सभी 12 हिमालय राज्यों के मूलनिवासियों को Tribe Status मिला हुआ है।
चंपावत में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने क्षेत्र में पहले से ही तनाव और आक्रोश बना हुआ था, वहीं अब एक स्थानीय युवक कमल रावत का वीडियो सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।
वीडियो में कमल रावत ने आरोप लगाया है कि पीड़िता पक्ष पर केस में समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि परिवार को ₹50 लाख लेकर समझौते और धारा 164 के तहत दिए जाने वाले बयान बदलने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
कमल रावत ने यह भी आरोप लगाया कि पीड़िता के पिता को कथित रूप से “गायब” कर दिया गया है और परिवार मानसिक दबाव में है।
चंपावत मामले में बड़ा खुलासा!
एसपी और सीएमओ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा मेडिकल टेस्ट में रेप की पुष्टि नहीं, शरीर पर किसी भी चोट के निशान नहीं।
अगर किसी राजनीतिक रंजिश या साजिश के तहत देवभूमि को बदनाम करने के लिए इतना खौफनाक नैरेटिव गढ़ा गया है, तो ऐसे लोगों को भी कानून के कठघरे में खड़ा करना होगा।
उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा जितनी ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी सच का सामने आना। झूठे नैरेटिव से समाज में डर, गुस्सा और अविश्वास फैलाने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
@Champawatpolice@pushkardhami
#Champawat #Uttarakhand #Justice #Devbhoomi
लेफ्टिनेंट जनरल जी.एस. नेगी जी(सेवानिवृत्त सेना) ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड में 5th Schedule आवश्यक है। क्यों की उत्तराखंड की सीमा चिन और नेपाल से।
देहरादून में रोड रेज की घटना ने आज हिला दिया।
एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर की बेवजह हत्या…
ये सिर्फ अपराध नहीं, सिस्टम को खुली चुनौती है।
अब समय आ गया है—
पुलिस अपना इकबाल कायम करे।
ऐसे असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई करे।
देहरादून को अपराधियों की पनाहगाह नहीं बनने दिया जा सकता।
उत्तराखंड की शांत आबोहवा को खराब करने वालों के खिलाफ सबसे कठोर कदम उठाने होंगे।
क्योंकि यहां की हर ऐसी खबर…
हर उत्तराखंडी को बहुत पीड़ा देती है।
@uttarakhandcops@DehradunPolice
#Dehradun #RoadRage #Uttarakhand #LawAndOrder
अक्षर-अक्षर, तिनका-तिनका चुनना पड़ता है,
भीतर-भीतर कितना कहना-सुनना पड़ता है।
दुहराना पड़ता है सुख-दुख को हँसकर-रोकर,
यादों में खोकर अतीत को गुनना पड़ता है।
इतनी गुत्थमगुत्था हो जाती हैं कुछ यादें,
जज़्बातों को रुई- सरीखा धुनना पड़ता है।
- वशिष्ठ अनूप✨
"धन्य हैं हमारे ठेकेदार और साहब!" 🙏
त्रिजुगीनारायण सड़क पर डामरीकरण का काम तो चल रहा है, लेकिन 'क्वालिटी' और 'क्वांटिटी' का जो हाल है, उसे देखकर आप भी दंग रह जाएंगे! भ्रष्टाचार की परतें साफ दिखाई दे रही हैं।
❓ आखिर जनता के पैसे की इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन है?
❓ क्या अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा घटिया निर्माण मुमकिन है?
वीडियो में देखिए कैसे विकास के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
@pushkardhami
यदि मुझे कभी कैंसर हुआ, तो मैं अस्पताल में कदम भी नहीं रखूँगा :- डॉ. निकोलस गुएगेन
मैंने बहुत से मरीजों को कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों से मरते देखा है।
शायद जनता को यह नहीं पता, लेकिन कैंसर से मरने वाले 50% लोग वास्तव में इसके आक्रामक उपचारों' के कारण मरते हैं।
यदि मुझे कैंसर होता है, तो सबसे पहले मैं सब कुछ बंद कर दूँगा - काम और दूसरी चीज़ें - और उपवास (Fasting) शुरू करूँगा। कम से कम 30 दिनों तक। यह कैंसर के इंजन को बंद करने जैसा है।
मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि हमारे शरीर में ऊर्जा के दो स्रोत होते हैं: चीनी और केटोन बॉडीज
कैंसर की कोशिकाएं केवल चीनी का उपयोग कर सकती हैं, वे उपवास के दौरान शरीर द्वारा बनाए गए केटोन्स का उपयोग नहीं कर पातीं।
इसलिए, उपवास करके आप कैंसर को भूखा मार सकते हैं।
“आँखों” में आँखों का डॉक्टर बनने का सपना लिए अंबाला से देहरादून आई युवा डॉक्टर तन्वी की आँखे हमेशा के लिए बंद हो गई, बिगड़े हालातों के अंधेरों में ज़िन्दगी समाप्त हुई।
यह अपनी तरह की दूसरी घटना है और दोनों घटनाओं का साक्षी है महंत इंद्रेश चिकित्सा विश्वविद्यालय है। डॉ तन्वी इसी निजी विवि से MS Eye कर रही थी। तन्वी के पिता ने FIR में इस बात का जिक्र किया है कि थीसिस जमा करने को लेकर HOD प्रियंका गुप्ता लगातार उत्पीड़न कर रही थी, उत्पीड़न की बातचीत रिकॉर्डेड बातचीत की डिवाइस भी पुलिस को दी है।
तन्वी के पिता ललित मोहन का कहना है कि वह भी HOD से मिले लेकिन वह नहीं मानी। ख़ुद के साथ पिता को भी टॉर्चर होते देखकर व्यथित हो उठी, नतीजा भयावह निकला, युवा डॉक्टर तन्वी 24 मार्च की सुबह अपनी गाड़ी में मृत मिली, हाथ में एक कैनोला लगा था।
केवल ये मौत रहस्यमयी नहीं है बल्कि पूरा वातावरण रहस्यों से भरा है, ऐसा रहस्य जो जरूरत से ज़्यादा उजागर भी है, लेकिन देखने वालों ने शुतुरमुर्ग की तरह आँखें बंद कर रखी हैं।
@uttarakhandcops@DeepamSeth_IPS@DehradunPolice
I must confess that until recently I had never heard of Phool Dei, a spring festival that was celebrated yesterday in the villages of Uttarakhand.
Children gather fresh flowers from the hills and go from house to house placing them on doorsteps, offering a blessing for the household:
“Phool Dei, Chhamma Dei,
Deni Dwar, Bhar Bhakar…” roughly wishing the home prosperity.
In return they receive sweets.
It reminded me a little of Halloween in the U.S., where children go door to door saying “trick or treat.” But what a lovely contrast. Here the children arrive not threatening a prank, or asking first, but giving first. Flowers.
In an age when we speak so much about environmental consciousness, this graceful celebration of spring and nature deserves to be far more widely known.
Just as Holi travelled across India and the world, perhaps Phool Dei should too.
For me, the children of Uttarakhand are my #MondayMotivation