21 साल देश की सेवा करने के बाद अगर एक बीएसएफ जवान को सिर्फ ₹7129 महीना पेंशन मिले, तो यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक है। जो जवान अपनी जवानी सीमाओं पर खपा देता है, उसकी बुढ़ापे की सुरक्षा इतनी कमजोर हो—यह सवाल खड़ा करता है कि क्या हम सच में अपने सुरक्षाकर्मियों की कद्र करते हैं?
NPS को आधुनिक और टिकाऊ व्यवस्था बताकर लागू किया गया था, लेकिन हकीकत में यह अनिश्चितता और असुरक्षा का मॉडल बन चुका है। इसमें न तो पेंशन की गारंटी है और न ही महंगाई के अनुसार बढ़ोतरी। ऐसे में एक जवान, जिसने पूरी जिंदगी जोखिम में बिताई, उसे भविष्य के लिए सिर्फ अस्थिरता मिलती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन पेंशन स्थिर रहती है। ₹7129 जैसी राशि आज के समय में बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य, दवाइयां, परिवार की जिम्मेदारियां—इन सबके बीच यह पेंशन एक मजाक जैसी लगती है।
सरकार की नीतियों में यह असमानता भी साफ दिखती है कि एक ओर कुछ वर्गों को पुरानी पेंशन (OPS) का लाभ मिलता है, जबकि CAPF जैसे बलों के जवानों को NPS के भरोसे छोड़ दिया गया है। क्या देश की सुरक्षा में लगे जवान कम महत्वपूर्ण हैं, या उनकी सेवाओं की कीमत कम आंकी जा रही है?
अगर समय रहते इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो यह न केवल जवानों के मनोबल को तोड़ेगा, बल्कि युवाओं में भी सुरक्षा बलों में जाने की इच्छा को कम करेगा। देश की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि उन जवानों के विश्वास और सम्मान से भी मजबूत होती है—और आज वही विश्वास डगमगाता नजर आ रहा है।
दुनिया के टॉप 10 मंदिरों में से 8 मंदिर और टॉप 10
मस्जिदों में से 3 मस्जिद हमारे देश भारत में है
मगर दुनिया की टॉप 300 यूनिवर्सिटियों में से एक
भी यूनिवर्सिटी हमारे भारत देश में नहीं है
अनपढ़ रहेगा इंडिया,
तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया
युवाओ जितना जल्दी समझोगे उतना अच्छा होगा
कॉकरोच आर्मी तुम्हारे साथ है बस तुम हक के लिए
लड़ना सीखो, आवाज़ तो उठाओ
Zero experience IPS leadership in CAPFs slowly defeating purpose with which were raised. They behave like colonial masters unfit to command alien to operations on ground. Govt destroying ethos of CAPFs. CAPF cadre struck in stagnation with frustration taking toll.
Hello Cockroach Army 🪳
मेरा मानना है कि देश में ऐसा कानून होना चाहिए जो चुनाव जितने के बाद अगर कोई नेता अपने वादे पूरे न करे तो
उसे 5 साल की सजा ₹50 लाख का जुर्माना और जीवन भर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध मिले
क्यूँकि जनता से किया गया वादा सिर्फ भाषण नहीं होता है बल्कि उन्हें पूरा करना उसकी जिम्मेदारी होती है
तो क्या कहती है हमारी कॉकरोच आर्मी?
क्या नेताओ के झूठे वादों पर रोक लगनी चाहिए?
अपनी राय जरूर दे, और इग्नोर न करे
CAPFs deserve their own leadership. Officers who spend decades serving in BSF, CRPF, CISF and other CAPFs should not remain stagnated while top posts go on deputation. Experience earned on the ground should matter more.
#capf#crpf#cisf#bsf
माननीय डीजी @ITBP_official अपने हिमवीर के लिए मददगार बने सेनानी गौरव प्रसाद जी की जितनी सराहना की जाए कम है। जब शासन प्रशासन के आगे अपनी मां का कटा हाथ लिए सिपाही न्याय की गुहार लगाने के बावजूद कोई सुन नहीं रहा ऐसे वक्त माननीय कमांडेंट महोदय द्वारा अपने सर्वोच्च कर्तव्यों का निर्वहन किया। एलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन अनुरोध करते है कि CO सर के इस साहसिक कदम के लिए उन्हें स्पेशल प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाए।
यूनिफॉर्म कोड के हिसाब से ये सभी पुलिस के आला अफसर नजर आ रहे है लेकिन इन्होंने नीचता में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। मामला दक्षिणी भारत के किसी राज्य का है 10 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत पर पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले थे ये अफसर लेकिन इनकी हँसी ही रुकने का नाम नहीं ले रही।
इस विडियो के बाद देश की आवाम में इनके प्रति रोष है,मेरी गृह मंत्रालय से अपील है मामले का संज्ञान लेकर इन तीनों अधिकारियों को बर्खास्त करें ताकि लोगों में कानून के प्रति विश्वास स्थापित हो।
@AmitShah
अब समय आ गया हैं कि देश में IAS IPS जैसे राजा वाले बड़े पद को खत्म कर दिया जाए , इनका आम आदमी से अब कोई सरोकार नहीं रह गया हैं !
तमिलनाडु में एक दस साल की बच्ची को अगवा कर उसकी हत्या कर दी जाती हैं ,
लेकिन IPS R. V. Ramya Bharathi मैडम प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाखून रगड़ते हुए दांत फाड़ कर ठहाके लगा रही हैं !
Ramya Bharathi 2008 बैच की IPS हैं , उच्च शिक्षित हैं, फिर भी ऐसी असंवेदनशील हरकत कर रही हैं !
पहले के IAS IPS साधारण घरों से निकल कर आते थे , तो आम आदमी की समस्या और संघर्ष से वाकिफ होते थे ,
लेकिन आजकल UPSC पास करने वाले 99 प्रतिशत बड़े बड़े संस्थानों से पढ़े हुए होते हैं , पैसे वाले घर से ताल्लुक रखते हैं !
आम आदमी की जिन समस्याओं के निदान के लिए उनकी नियुक्ति होती हैं, उन्हें वो कभी फील करना तो दूर की बात सुने भी नहीं होते हैं !
एक एग्जाम पास करने के बाद डायरेक्ट उनके हाथ में लाखों लोगों की जिम्मेदारी दे दी जाती हैं , फिर वही से शुरू होता हैं पावर का नंगा नाच और फिर जाकर करोड़ो के भ्रष्टाचार पर खत्म होता हैं !
फिलहाल की ग्रुप C से बड़े पोस्ट पर डायरेक्ट नियुक्ति नहीं देनी चाहिए , जो व्यक्ति ग्रुप C में कम से कम 5 साल सर्विस कर ले उसे ग्रुप B के लिए एलिजिबल होना चाहिए ,
ऐसे ही जो ग्रुप B में 5 साल सर्विस कर ले वो A के एलिजिबल हो सकता हैं !
ऐसे ही पुलिस विभाग में SI से बड़े पोस्ट की डायरेक्ट भर्ती नहीं होनी चाहिए !
अगर ऐसा हो जाए तब जाकर देश इस भ्रष्ट अफसरशाही से बच सकता हैं , और अच्छे लोग ऊपर तक पहुंच पाएंगे !
नहीं तो जिस तरह से राजा महाराज पैदा हो रहे हैं , ये एक दिन देश को बेच खायेंगे !
IPS और CAPF cadre ऑफिसर के बीच क्या अंतर है वो कानपुर ITBP के कैडर अधिकारी ने दिखा दिया, अब ITBP के अंदर बैठे अपने IPS से कानपुर वाले IPS कारवाई करवाने के जुगगत में है, ITBP के commandant साहब ने जो किया वो मानवता और कानून के दायरे में है, इनके उपर कोई भी कारवाई होगी तो civil society का पुरा सहयोग रहेगा इनको....
कमिश्नर साहब ने बिल्कुल ठीक किया कि ITBP DG साहब को पत्र लिख दिया। Comdt की शिकायत जरूर करनी चाहिए। आखिर उसने गुलाम मानसिक देश की व्यवस्था को खंडित किया है।
सवाल अब बनता है ITBP DG साहब से कि "क्या उन्होंने अपने जवान की समस्या को लेकर POLICE DG को कोई पत्र लिखा है, या लिखा था?"
नाम - गौरव प्रसाद
पद - ITBP 32वीं बटालियन के कमांडेंट
काम - कानपुर पुलिस कमिश्नरेट घेरना
पिछले दिनों आईटीबीपी जवान विक्रम सिंह की माता को न्याय न मिलने पर गौरव प्रसाद अपने सैनिकों को लेकर गए थे।
अब पुलिस इसको अपनी बेइज्जती बता रही है और ITBP के डीजी से कार्यवाही को बोल रही है।
पूरे देश को गौरव प्रसाद के साथ खड़ा होना चाहिए पुलिस हमेशा से गुलाम रही है।
Placing IPS officers in CAPFs is one of the worst structural issues. Especially when CAPFs already have their own UPSC based officer entry system and a dedicated cadre with domain experience.
CAPF जवान परिवार से दूर मुश्किल हालात में काम करते हैं ।इनकी ड्यूटी शारिरिक और मानसिक तनाव वाली है ।उपर से ज़मीन,आर्थिक,समाजिक,पारिवारिक परेशानियाँ । पुलिस सुनती नहीं ।क्या DGs CAPF ने कभी पुलिस/ प्रशासन को sensitize किया गया है । @BSF_India@ITBP_official@crpfindia@SSB_INDIA
अमृतकाल में CAPF सिपाहियों को उल्टा फीता
पहले सुलटी फीती पर लांस नायक को 15 रुपए अलाउंस मिलता था
कौन बाबू लोग है ये जिन्होंने प्रमोशन के नाम पर 10 लाख सिपाहियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया
माननीय दिल्ली हाई कोर्ट दुआरा अर्धसैनिक बलों के हक में ११ जनवरी २०२३ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में लटकाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है
अब काला क़ानून ला कर CAPF के 13 हज़ार कैडर ऑफिसर पद्दौनती पर हथौड़ा मार दिया
काले अंग्रेजों दुवारा अब वीरांगनाओं को चिन्हित कर ऑफ़िसर्स का नार्थ ईस्ट राज्यो में तबादला किया जा रहा है ग़ैरजिम्मेदाराना ओछी हरकत हो रही है
ये सब अपने को सच्चा देशभक्त बताने वालों की नाक के नीचे हो रहा है
कोई सुन नहीं रहा 20 लाख पैरामिलिट्री परिवार जाएं कहाँ किस को फ़रियाद करे?