कल की कल - कल करती बेकल
कल से नाता तोड़ आज से जोड़ रे बन्देया
पल - पल उत्सुक , हर पल कर्मठ
स्नेह से नाता जोड़ रे बन्देया
राग आत्म - मन्थन का नित कर श्वास - श्वास सन्यम धर,
यश फैलेगा जग भर, शुकराना मन- भर कर बन्देया - वेद कबीरा
कल की कल - कल करती बेकल
कल से नाता तोड़ आज से जोड़ रे बन्देया
पल - पल उत्सुक , हर पल कर्मठ
स्नेह से नाता जोड़ रे बन्देया
राग आत्म - मन्थन का नित कर
श्वास - श्वास सन्यम धर,यश फैलेगा जग भर शुकराना मन- भर कर बन्देया - वेद कबीरा
कल की कल - कल करती बेकल
कल से नाता तोड़ आज से जोड़ रे बन्देया
पल - पल उत्सुक , हर पल कर्मठ
स्नेह से नाता जोड़ रे बन्देया
राग आत्म - मन्थन का नित कर
श्वास - श्वास सन्यम धर
यश फैलेगा जग भर
मन- भर धन्यवाद कर - वेद कबीरा
जन गण मन सब एक रंग, सब एक संग, सब एक विचार सब बढ़ चले सब उमड़ पड़े करने को अंत आतंक का देश से अपने, ये शंखनाद ,ये विजय नाद गूँजी धरती ,पाताल ,आकाश जय हिन्द , हिन्द ,जय प्रेमवाद
जन गण मन सब एक रंग, सब एक संग, सब एक विचार सब बढ़ चले सब उमड़ पड़े करने को अंत आतंक का देश से अपने ,ये शंखनाद ,ये विजय नाद गूँजी धरती ,पाताल ,आकाश जय हिन्द , हिन्द ,जय प्रेमवाद