तुम मिलते नहीं हो..
आ करके..
तुम मिलते नहीं हो..
आ करके....
हम कैसे कहें..
देखो ये बैठे हैं..
हे मुरलीधर छलिया मोहन..
हम भी तुमको दिल दे बैठे....
ग़म पहले से ही कम तो न थे..
एक और मुसीबत ले बैठे....
हे मुरलीधर छलिया मोहन..
हम भी तुमको दिल दे बैठे....
जय सियाराम
जय श्री र��धेकृष्ण ❤️🙏
महात्मा बुद्ध न नास्तिक थे न वेद विरोधी:-
महात्मा बुद्ध के अनुयायी जिस मन्त्र का जाप करते हैं वो है – “ओम् मणि पद्मे हुम्” जिसका हिंदी अनुवाद है कि ओम् ही सत चित आनंद है।