राधा-कृष्ण प्रेम का वह स्वरूप हैं, जो निस्वार्थ, पवित्र और अनंत है। जहाँ राधे का नाम लिया जाता है, वहाँ कृष्ण स्वयं आ जाते हैं। उनके प्रेम में भक्ति है, संगीत है, और एक दिव्य शांति है जो हृदय को आनंद से भर देती है।
#जय_श्री_राधे_कृष्णा 🌹🌹
मेरे अत्यंत प्रिय छोटे भाई @AlokTiwari9335 को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बहुत बहुत बधाई! हमेशा खुश रहो, स्वस्थ रहो, और दीर्घायु हो! भोले बाबा आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे और आप हमेशा हंसते मुस्कुराते रहो !! 🎂🍰🍫🌹❤️🥰😍😘
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रात्रि के गहन अंधकार में
जब चाँद चुपके से छिप जाता है,
तभी अमलतास का सुनहरा फूल
अपनी नन्ही आभा जगमगाता है।
मानो नभ से पीले सितारे
धरती पर उतर आए हों ,
शाखों पर टँके स्वप्न सुनहरे
रात के आँचल में झिलमिलाए हों।
सन्नाटे की उस श्याम शिला पर
वह उजास की रेखा बन जाता है....
#बज़्म
ये है बिहार की प्रसिद्ध कुछ मिठाइयां..
खाजा, लड्डू, गाजा और बालूशाहियां।।
शादी ब्याह हो या मुंडन उपनयन तो उसमें सूखी मिठाईयां ज़रूर बनती है ताकि रिश्तेदारों को विदाई में कपड़ों के साथ ये मिठाइयां दी जा सकें 😊😊😊🙏
उलूपी द्वारा अर्जुन को पुनर्जीवित करने की अद्भुत कथा :
महाभारत में अर्जुन के जीवन से जुड़ा एक अत्यंत भावुक प्रसंग है। नागकन्या उलूपी द्वारा अर्जुन को पुनर्जीवित करना। यह कथा प्रेम, श्राप, धर्म और मुक्ति का अद्भुत संगम है।
वनवास के दौरान अर्जुन गंगा तट पर पहुँचे। वहाँ नागकन्या उलूपी ने उन्हें देखा और अपने प्रेम का निवेदन किया। अपनी नाग शक्ति से वे अर्जुन को पाताल लोक ले गईं। अंततः अर्जुन ने उन्हें स्वीकार किया। उनसे इरावान नामक पुत्र उत्पन्न हुआ, जो आगे चलकर कुरुक्षेत्र युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ।
महाभारत युद्ध में अर्जुन ने शिखंडी को आगे रखकर भीष्म पितामह पर बाण चलाए। यह युद्ध की आवश्यकता थी, लेकिन वसु देवताओं ने इसे अनुचित मानकर अर्जुन को श्राप दिया कि उनकी मृत्यु उनके ही पुत्र के हाथों होगी। उलूपी को इस श्राप का ज्ञान था।
युद्ध के बाद अश्वमेध यज्ञ के दौरान अर्जुन का सामना मणिपुर में अपने पुत्र बभ्रुवाहन से हुआ। उलूपी ने बभ्रुवाहन को क्षत्रिय धर्म निभाने के लिए युद्ध हेतु प्रेरित किया। भयंकर युद्ध में बभ्रुवाहन के बाण से अर्जुन भूमि पर गिर पड़े। चित्रांगदा और बभ्रुवाहन शोक में डूब गए। तब उलूपी पाताल लोक से दिव्य नागमणि लाई और अर्जुन की छाती पर रख दी। उसी क्षण अर्जुन पुनः जीवित हो उठे।
उलूपी ने बताया कि यह सब अर्जुन को श्राप से मुक्त करने के लिए आवश्यक था। इस प्रकार अर्जुन दोषमुक्त हो गए और परिवार में पुनः सुख लौट आया।
इस कथा से ये शिक्षा मिलती है कि कर्म का फल अवश्य मिलता है, सच्चा प्रेम त्याग और कल्याण में होता है और धर्म पालन सर्वोपरि है। कई बार दुखद घटनाएँ भी भविष्य के कल्याण का मार्ग बनती हैं।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
पवित्र सोमनाथ मंदिर के गगनचुंबी शिखर पर गर्व के साथ लहराता पावन ध्वज भारतवर्ष की आस्था की विजय का प्रतीक है। यह कोटि-कोटि भारतीयों की सामूहिक चेतना का दिव्य उद्घोष भी है। सोमनाथ के शिखर पर केसरिया ध्वज हमारी अटूट श्रद्धा की जीवंत विजयगाथा है। यह ध्वज अनंतकाल तक भारत के गौरव का गान करता रहेगा, हर भारतीय को प्रेरणा देता रहेगा।
शिव संध्या की बेला आई
नभ पर गूँजे हर हर नाम ,
दीप जले मन के मंदिर में
जागे श्रद्धा का पावन धाम।
धूप की सुगंध में घुलकर
हर पीड़ा शांत हो जाए ,
भोले को स्मरण करने से
जीवन धन्य-धन्य हो जाए।।
शिव संध्या 😊😊🙏💐
आज पार्थिव शिवलिंग की पूजा अर्चना बिहार स्थित मेरे घर में संपन्न हुआ ।
भोलेनाथ सबके घर परिवार और बच्चों पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
हर हर महादेव 😊🙏
आजकल #mothersday फादर्स डे पर स्टेटस पर लगाने का चलन तेज है लगता है जैसे श्रवण कुमारों की बाढ़ आ गयी हो😊
खेर! अच्छी बात है माता-पिता के प्रति आदर सम्मान श्रद्धा का भाव होना ही चाहिए, परन्तु इसे जीवन में भी आत्मसात करें सिर्फ WA स्टेटस और फेसबुक पोस्ट तक ही सीमित ना रहे।