कितनी बार कितने एनवायरनमेंटलिस्ट बता चुके हैं कि कबूतरों को दाना नहीं डालना चाहिए,
लेकिन हमको तो पुण्य कमाना है, पड़ोसी के पुण्य हम ज्यादा कैसे होने दें?
🚨 IIT Madras Director बताई Telegram की सच्चाई !
प्रो. वी. कामकोटी (IIT Madras Director) ने लाइव डेमो देकर दिखाया कि Telegram पर PDF कैसे बदला जा सकता है — मूल टाइमस्टैंप वही रहता है, लेकिन अंदर का कंटेंट पूरी तरह बदल जाता है।
पेपर लीक के फर्जी वीडियो और दस्तावेज़ इसी तरह बनाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा — “Telegram को foolproof evidence मत मानो, बहुत सावधानी बरतें।”
क्या Telegram पर चल रही पेपर लीक वाली अफवाहें भी इसी तरह की manipulation हैं?
सरकार का Telegram पर temporary ban सही कदम लगता है या नहीं?
आपकी राय क्या है?
#Telegram #PaperLeak #IITMadras #NEET #ExamScam
छात्रों की पीड़ा
@alokrajRSSB जी से निवेदन है कि आप विद्यार्थी हित में ध्यान दें।
जिन्होंने LDC का फॉर्म भर दिया है। पहले उनका RSCIT सर्टिफिकेट बार बार प्रयास करने पर भी अपलोड नहीं हो रहा था।
और अब बोर्ड ने EDIT APPLICATION का विकल्प देकर 300₹ लूटने का धंधा शुरू कर दिया है।
Best message of 2025... बच्चों को बताने से नहीं वो अपने माता पिता के कार्यकलापों से और हैबिट्स से सब सीखते हैं। माता पिता बच्चे के पहले टीचर होते हैं। अपने दोस्तों से शेयर करो जिनके छोटे बच्चे हैं।
Chandrayaan-3 Mission:
'India🇮🇳,
I reached my destination
and you too!'
: Chandrayaan-3
Chandrayaan-3 has successfully
soft-landed on the moon 🌖!.
Congratulations, India🇮🇳!
#Chandrayaan_3#Ch3
श्री राम जन्मभूमि पर चले भव्य मंदिर निर्माण कार्य प्रगति का एक चलचित्र।
अयोध्या जी में बन रहा यह दिव्य मंदिर पूरे विश्व पटल पर युगों- युगों स्मरणीय रहेगा।
विज्ञान भी करती है सनातन का अनुसरण
जाने 12 ज्योतिर्लिंग के रहस्य को
देखें कि हमारी परंपराओं के पीछे विज्ञान कितना गहरा है।
जिस संस्कृति से हम पैदा हुए, वही सनातन है।
विज्ञान को परंपरा का आधार पहनाया गया है ताकि यह प्रवृत्ति बने और हम भारतीय हमेशा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।
आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में केदारनाथ से रामेश्वरम तक एक ही सीधी रेखा में बने महत्वपूर्ण शिव मंदिर हैं। आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसी कौन सी विज्ञान और तकनीक थी जो हम आज तक समझ नहीं पाए?
उत्तराखंड के केदारनाथ, तेलंगाना के कालेश्वरम, आंध्र प्रदेश के कालेश्वर, तमिलनाडु के एकम्बरेश्वर, चिदंबरम और अंत में रामेश्वरम मंदिर 79°E 41'54" रेखा की सीधी रेखा में बने हैं।
ये सभी मंदिर प्रकृति के 5 तत्वों में लैंगिक अभिव्यक्ति दिखाते हैं जिन्हें हम आम भाषा में पंचभूत कहते हैं।
पंचभूत का अर्थ है पृथ्वी, जल, अग्नि, गैस और अवकाश। इन पांच सिद्धांतों के आधार पर इन पांच शिवलिंगों की स्थापना की गई है।
तिरुवनैकवाल मंदिर में पानी का प्रतिनिधित्व है,
आग का प्रतिनिधित्व तिरुवन्नामलाई में है,
काल्हस्ती में पवन दिखाई जाती है,
कांचीपुरम और अंत में पृथ्वी का प्रतिनिधित्व हुआ
चिदंबरम मंदिर में अवकाश या आकाश का प्रतिनिधित्व!
वास्तुकला-विज्ञान-वेदों का अद्भुत समागम दर्शाते हैं ये पांच मंदिर
भौगोलिक दृष्टि से भी खास हैं ये मंदिर इन पांच मंदिरों का निर्माण योग विज्ञान के अनुसार किया गया है
और एक दूसरे के साथ एक विशेष भौगोलिक संरेखण में रखा गया है।इसके पीछे कोई विज्ञान होना चाहिए जो मानव शरीर को प्रभावित करे।
मंदिरों का निर्माण लगभग पांच हजार साल पहले हुआ था, जब उन स्थानों के अक्षांश को मापने के लिए उपग्रह तकनीक उपलब्ध नहीं थी।
तो फिर पांच मंदिर इतने सटीक कैसे स्थापित हो गए? इसका जवाब भगवान ही जाने।
केदारनाथ और रामेश्वरम की दूरी 2383 किमी है।ये सभी मंदिर लगभग एक समानान्तर रेखा में हैं। आखिरकार, यह आज भी एक रहस्य ही है,किस तकनीक से इन मंदिरों का निर्माण हजारों साल पहले समानांतर रेखाओं में किया गया था।
श्रीकालहस्ती मंदिर में छिपा दीपक बताता है कि यह हवा में एक तत्व है। तिरुवनिक्का मंदिर के अंदर पठार पर पानी के स्प्रिंग संकेत देते हैं कि वे पानी के अवयव हैं। अन्नामलाई पहाड़ी पर बड़े दीपक से पता चलता है कि यह एक अग्नि तत्व है।
कांचीपुरम की रेती आत्म तत्व पृथ्वी तत्व और चिदंबरम की असहाय अवस्था भगवान की असहायता अर्थात आकाश तत्व की ओर संकेत करती है।अब यह कोई आश्चर्य नहीं है कि दुनिया के पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच लिंगों को सदियों पहले एक ही पंक्ति में स्थापित किया गया था।
हमें अपने पूर्वजों के ज्ञान और बुद्धिमत्ता पर गर्व होना चाहिए कि उनके पास विज्ञान और तकनीक थी जिसे आधुनिक विज्ञान भी नहीं पहचान सका।
माना जाता है कि सिर्फ ये पांच मंदिर ही नहीं बल्कि इस लाइन में कई मंदिर होंगे
जो केदारनाथ से रामेश्वरम तक सीधी लाइन में आते हैं। इस पंक्ति को 'शिवशक्ति अक्षरेखा' भी कहते हैं, शायद ये सभी मंदिर 81.3119° ई में आने वाली कैलास को देखते हुए बने हैं!?
इसका जवाब सिर्फ भगवान शिव ही जानते हैं
आश्चर्यजनक कथा 'महाकाल' उज्जैन में शेष ज्योतिर्लिंग के बीच दूरी देखें।
उज्जैन से सोमनाथ -777 किमी
उज्जैन से ओंकारेश्वर -111 किमी
उज्जैन से भीमाशंकर -666 किमी
उज्जैन से काशी विश्वनाथ -999 किमी
उज्जैन से मल्लिकार्जुन -999 किमी
उज्जैन से केदारनाथ -888 किमी
उज्जैन से त्र्यंबकेश्वर -555 किमी
उज्जैन से बैजनाथ -999 किमी
उज्जैन से रामेश्वरम -1999 किमी
उज्जैन से घृष्णेश्वर - 555 किमी
हिंदू धर्म में कुछ भी बिना कारण के नहीं किया जाता है।
सनातन धर्म में हजारों वर्षों से माने जाने वाले उज्जैन को पृथ्वी का केंद्र माना जाता है।इसलिए उज्जैन में सूर्य और ज्योतिष की गणना के लिए लगभग 2050 वर्ष पूर्व मानव निर्मित उपकरण बनाए गए थे।
और जब एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने 100 साल पहले पृथ्वी पर एक काल्पनिक रेखा (कर्क) बनाई तो उसका मध्य भाग उज्जैन गया। उज्जैन में आज भी वैज्ञानिक सूर्य और अंतरिक्ष की जानकारी लेने आते हैं।