नए संसद उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुलाया गया, तब कोई आपत्ति नहीं दिखी।
लेकिन बंगाल में ममता बनर्जी स्वागत को नहीं पहुँचीं तो शिष्टाचार याद आ गया।
क्या राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी पार्टी के पक्ष में दिखना ठीक है?
#WATCH | Darjeeling, West Bengal | President Droupadi Murmu says, "Today was the International Santal Conference. When I came here after attending it, I realised it would have been better if it had been held here, because the area is so vast... I don't know what went through the administration's mind... They said no, the place is congested. But I think five lakh people could gather here easily. But I don't know why they took us there... I don't know what went through the administration's mind that they chose a place for the conference where the Santal people couldn't go... I am very sad that the people here were unable to reach the conference because it was held so far away. Perhaps the administration had hoped that no one would be able to attend, and the President would simply turn around and leave... If the President visits a place, the Chief Minister and the Ministers should also come. But she did not... I am also a daughter of Bengal... Mamata Didi is also my sister, my younger sister. I don't know if she was angry with me, that's why this happened..."
(Source: Darjeeling District Administration)
@CommonBS786OM Isko sansad Bhavan ke udghatan mein nahin Bulaya Gaya to isko bezzati nahin lagta aur ek CM nahin isko receive ki to isko bhejti lagne Laga
यह कोई साधारण घटना नहीं है। इतिहास को शर्मसार करने वाला लम्हा है।
यह वह क्षण है जब इतिहास ने अपनी आँखें फेर लीं और अंतरराष्ट्रीय क़ानून ने ज़मीन पर गिरकर चुप्पी ओढ़ ली। यह गिरफ्तारी नहीं है। यह एक औपनिवेशिक छापा है, जो रात के सन्नाटे में नहीं, दिन-दहाड़े, कैमरों और सुर्ख़ियों के उजाले में अंजाम दिया गया।
एक संप्रभु देश का राष्ट्रपति अपने ही घर में, अपने ही बेडरूम में—पत्नी के साथ खींचकर बाहर निकाला जाता है। यह दृश्य किसी लोकतांत्रिक न्यायालय का नहीं, किसी साम्राज्यवादी विजय-उत्सव का है। जैसे सत्ता ने कहा हो: तुम्हारा चुनाव, तुम्हारी जनता, तुम्हारी ज़मीन—सब तभी तक मान्य हैं, जब तक वे हमें पसंद हैं।
संयुक्त राष्ट्र का चार्टर कहीं दूर किसी अलमारी में पड़ा रह जाता है। उसका अनुच्छेद संप्रभु समानता की बात करता है, मगर यहाँ समानता नहीं, केवल ताक़त बोल रही है। क़ानून नहीं चलता, टैंक चलते हैं; न्याय नहीं चलता, हवाई जहाज़ चलते हैं। न्यूयॉर्क की ओर उड़ान भरता यह अपमान केवल एक व्यक्ति को नहीं, एक पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बंधक बनाकर ले जाता है।
यह ‘कानून का राज’ नहीं है। यह शक्ति का राज है। वह शक्ति जो तय करती है कि कौन लोकतांत्रिक है और कौन तानाशाह; कौन मित्र है और कौन अपराधी। वही शक्ति जो कुछ देशों में राजशाही को स्थिरता कहती है और कुछ देशों में चुनी हुई सरकारों को अपराध। लोकतंत्र यहाँ एक शब्द नहीं, एक बहाना है, जिसे भू-राजनीति की ज़रूरत के हिसाब से मोड़ा जाता है।
आज वेनेज़ुएला है। कल कोई और होगा। जब किसी एक देश को यह अधिकार दे दिया जाए कि वह दूसरे देश के राष्ट्रपति को उठा ले तो दुनिया राष्ट्रों का समाज नहीं रहती। वह गिरोहों का मैदान बन जाती है। तब संयुक्त राष्ट्र केवल एक इमारत होता है, क़ानून केवल एक किताब और न्याय केवल भाषणों की सजावट।
सबसे शर्मनाक यह नहीं कि यह हुआ। सबसे शर्मनाक यह है कि यह खुलेआम हुआ। बिना झिझक, बिना शर्म, बिना किसी अंतरराष्ट्रीय सहमति के। जैसे इतिहास से कहा गया हो: देखो, हम कर सकते हैं।
और इतिहास देख रहा है चुपचाप, भारी मन से। यह दर्ज़ करते हुए कि इस दिन क़ानून चुप था, लोकतंत्र झुका हुआ था, और साम्राज्यवाद मुस्कुरा रहा था।
यदि यही न्याय है तो अराजकता को स्वीकार कर लेना ज़्यादा ईमानदार होगा। क्योंकि न्याय वही होता है, जो सब पर लागू हो—
वरना वह न्याय नहीं, सिर्फ़ ताक़त की कविता है, जिसे बंदूक की स्याही से लिखा गया है। गुंडों के भी कुछ उसूल होते हैं; लेकिन यहाँ तो वह भी नहीं है।
#Venezuela #venezuelalibre #venezuelainvasion
हमारे गांव सड़ेया में राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय का स्थिति देखिए
सड़ेया स्कूल के जितने भी शिक्षक हैं उनलोग सिर्फ अपने बच्चों के भविष्य के लिए आते हैं।
और सड़ेया स्कूल के सभी शिक्षक आते तो है स्कूल में लेकिन ओ अपने काम से आते हैं
और हाजरी (Finger) लगा कर सब शिक्षक अपने–अपने काम पर चले जाते हैं
सड़ेया स्कूल में जितने भी छात्र –छात्राएं आते है सब इधर– उधर खेलते कूदते रहते हैं दिन भर
बाकी के जितने शिक्षक स्कूल में बैठे रहते हैं सारे के सारे दिन भर मोबाइल चलाते रहते हैं फोन में लगे रहते हैं
और हां एक बात और यहां के स्कूल में ना तो शिक्षक टाइम से आते हैं और नहीं छात्र-छात्राएं टाइम से आते हैं
कोई टाइम टेबल नहीं है कोई रूटिंग नहीं है
सुबह में स्कूल का टाइम 9:00 से लेकर 12:00 तक है 12:00 बजे से लेकर 1:00 तक लंच टाइम है
लंच करने के बाद फिर 2:00 से 3:00 तक क्लास चलता है।
आज के दिन में हमारे गांव सड़ेया के स्कूल में किसी भी बच्चा से अगर पूछा जाए कि आपके स्कूल में कितने शिक्षक हैं बोलते हैं 11 शिक्षक है लेकिन अच्छा से पढ़ाई नहीं होता है हम लोग कितने बार सवाल भी पूछ चुके हैं पूछने के बाद छात्र-छात्राएं बताते हैं हम लोग के यह सब नहीं बताते हैं
स्कूल code–20021504201
आदरणीय देशवासियों मैं आपसे यही पूछना चाहता हूं कि यह जो स्कूल का तस्वीर हम आपके पास रिकॉर्ड भेजे हैं बताइए अगर ऐसे ही चलता रहेगा तो बताइए हमारे गांव के जितने भी छात्र छात्राएं हैं बताइए कि ऐसी स्थिति में आगे बढ़ पाएंगे
आदरणीय हमारे जितने भी पदाधिकारी झारखंड राज्य के हैं मैं सब से यही अनुरोध करना चाहता हूं कि हमारे झारखंड राज्य में जितने भी स्कूल है सरकारी राजकीय उत्क्रमित ऐसा भी स्कूल में सरकारी शिक्षक कम से कम पांच होना चाहिए
और कड़ी से कड़ी व्यवस्था लाया जाए
🙏🙏🙏🙏🙏
मैं भोला शंकर मेहता
ग्राम+पोस्ट–सड़ेया
थाना–हैदरनगर
पलामू (झारखंड)
पिन कोड़ –822115
उक्त वीडियो वायरल है जो झारखंड का बताया जाता है!
आधार कार्ड - पैन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - राशन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - बैंक अकाउंट से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - स्कूल की परीक्षा से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - गैस सिलेंडर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - मोबाइल नंबर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - नौकरी की हाजिरी से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य किया गया।
लेकिन आधार कार्ड मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) से नहीं जोड़ा गया…आखिर क्यों?
क्योंकि….
आधार से लिंक करने पर एक ही व्यक्ति के डबल / ट्रिपल वोट बंद हो जाएंगे…
एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नामों से किए गए वोट रद्द हो जाएंगे…
फर्जी नामों से मिलने वाले वोट खत्म हो जाएंगे।
जिस तरह राशन कार्ड से फर्जी नाम हट गए,
उसी तरह मतदाता सूची से भी फर्जी नाम हट जाएंगे।
सरकार पैन कार्ड को आधार से न जोड़ने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान कर रही है,
मतलब आपको हर जगह आधार कार्ड चाहिए —
लाडली बहना योजना हो या कोई अन्य सरकारी योजना,
लेकिन सिर्फ मतदान के लिए आधार कार्ड नहीं चाहिए?
लॉकडाउन के समय जब हमने सभी ने वैक्सीन लगवाई थी,
तब सरकार ने आधार कार्ड को वैक्सीन से भी जोड़ा था..वह काम तो बहुत तेज़ी से हुआ था।
पोस्ट को किसी भी राजनीतिक दृष्टिकोण से न देखते हुए स्वयं विचार करें।
झारखंड के शिक्षा मंत्री श्री रामदास सोरेन जी के निधन से अपूरणीय क्षति हुई है। 🙏
उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, बच्चों की शिक्षा की बेहतरी और राज्य में शिक्षा के प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनकी यह सेवाएँ सदैव याद की जाएँगी।
💐 #श्रद्धांजलि
@sunny_sharad झारखंड के शिक्षा मंत्री श्री रामदास सोरेन जी के निधन से अपूरणीय क्षति हुई है। 🙏
उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, बच्चों की शिक्षा की बेहतरी और राज्य में शिक्षा के प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनकी यह सेवाएँ सदैव याद की जाएँगी।
💐 #श्रद्धांजलि
@IrfanAnsariMLA Hello @grok kya tum bata sakte ho @IrfanAnsariMLA ko aisi kya majburi hai ki yah Jharkhand mein acche hospital banaa nahin sakte dusre rajya mein jana padta hai yahan ke logon Ko yah bhi batlana aisa swasthya mantri hone ka kya fayda hai Jharkhand ke logon ke liye
@IrfanAnsariMLA **"वाह मंत्री जी! दिल्ली के अपोलो अस्पताल का इतना विज्ञापन तो शायद खुद अपोलो ने भी ना किया होगा। झारखंड का स्वास्थ्य मंत्री होते हुए भी अपने मंत्री जी को इलाज के लिए दिल्ली भेजना पड़ा — ये आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है!
@TejYadav14 **सिर्फ TRE-3.0 ही नहीं,
TRE-2.0 का सप्लीमेंट्री रिजल्ट भी आना चाहिए।
सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता रखनी चाहिए।
रिक्तियों की हकीकत और नियुक्तियों के आंकड़े एक जैसे हों, तभी असली न्याय होगा।
#BPSC#Bihar#TRE2#TRE3#TeamTejPratapYadav
आज की सबसे बड़ी ताकत है– आवाज़ उठाना।
मध्यप्रदेश की लीला साहू ने सड़क की माँग की, सोशल मीडिया ने साथ दिया।
आज उनके गांव में सड़क बनाने का काम शुरू हो चुका है।
ये जीत हर उस इंसान की है जो चुप नहीं रहा।
#VoiceMatters#SocialPower#leelasahu
पूरे देश में स्कूल की किताबें एक जैसी होनी चाहिए।
ताकि प्राइवेट स्कूलों की किताबों का कालाबाज़ार बंद हो।
एक देश, एक पाठ्यक्रम, एक मूल्य।
शिक्षा व्यापार नहीं, अधिकार है।
#OneNationOneSyllabus#शिक्षा_सुधार"
"हमारे स्कूल में एक कमरा बनवा दो।
बारिश में भीगते हैं, धूप में जलते हैं।
बस छत चाहिए।"
बिहार की एक बच्ची की ये मांग है।
5 ट्रिलियन इकॉनमी का सपना देख रहे देश में
बच्चों के सिर पर स्कूल की छत तक नहीं है।
#EducationFirst#Bihar#SchoolForAll#GroundReality#EducationCrisis
2010 में चीन 4 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का देश बना.
लेकिन चीन ने 2008 में ही 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ा दी.
4 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था वाला देश बनते ही चीन ने 2018 तक अपने यहां गरीबी खत्म कर दी. और
48,000 किलोमीटर बुलेट ट्रेन का जाल पूरे देश में बिछा दिया. 2030 तक 60,000 किलोमीटर तक ले जाने का इरादा है.
देश 4 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बना है तो उसमें आम जनता को क्या लाभ मिल रहा है. जीवन स्तर में कोई सुधार तो नही हो रहा है. ट्रैन में लोग भेड़ बकरी की तरह सफर कर रहे हैं.
इसके बावजूद घमंड ऐसा की जैसे देश को सुपरपावर बना दिया है.