हे @physics__wallah 'पढ़ो चाहे कहीं' वाले स्टॉप पर मेरी बस पहुंची या नहीं, कंडक्टर (हेल्पलाइन) को कहो कि बता तो दे! इतना आईवीआरएस हो रहे हो कि मन हो रहा ज्वाइनिंग से पहले ही वीआरएस ले जाएं
Dear Indians, your life has ZERO value.
FSSAI banned ORSL because it contains high sugar and does not comply with the WHO formula, as it is dangerous for health.
Then the ORSL company said, “Please, sir, we have ₹180 crore worth of stock. Please let us sell it.”
The court said, Okay, sell it.
So, this ₹180 crore stock of a big billionaire company has more value than the health of 140 crore Indians.
In 1971, a 17-year-old girl was sucked out of an airplane.
She fell over 10,000 feet to the ground. That's the height of 3 Empire State Buildings.
But what happened next was more unbelievable.
This is one of the wildest survival stories of all time:
During the Geeta Jayanti fair at Kurukshetra fair in Haryana yesterday, a RW group attacked Kashmiri stall owners while announcing not to buy from Muslim vendors. Thanks to local residents who immediately came to support the Muslim stall owner. They opposed & condemned the act.
पूरब से सूर्य उगा, बना उजियारा..
ये सरकारी एडवेर्टोरियल था।और बात हिन्दू मुस्लिम जगाने की न थी।
ये साक्षरता का सन्देश था।
●●
1985-90 का दौर था। जवाहर नवोदय विद्यालय शुरू हुए थे। सेंट्रल स्कूल, और राज्य सरकारो के स्कूल, मजबूत थे।
युवाओं में शिक्षा अच्छी थी, पर साक्षरता 65% ही थी। इस बेहतर करने को प्रौढ़ साक्षरता मिशन लांच हुआ। स्कूल ड्राप आउट और अनस्किल्ड लेबर्स को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया।
●●
प्रचार प्रसार दूरदर्शन कर रहा था। ये सरकारी टेलीविजन था। पर विज्ञापन में, स्कीम का चेहरा कोई नेता नही है।
PM-CM नहीं, मनोहर सिंह नाम के उम्रदराज अभिनेता लघु फ़िल्म में दिखते है। सुबह की सैर कर रहे हैं। एक किशोर को कुछ लिखता देखते हैं। फिर याद करते हैं-
कैसे इस अनाथ, कामगार बच्चे को छुटपन में पढ़ना सिखाया। आज वह पेंटर बन गया है। कुछ लिख रहा है। उनके चेहरे पर संतोष है, उल्लास है।
यही पूरब से सूर्य उगता सूर्य है।
उजियारा है।
https://t.co/n179dXp2b5
●●
टीवी पर एकता के सन्देश आते। भीमसेन जोशी सधी गाते है-
मिले सुर मेरा तुम्हारा,
तो सुर बने हमारा
सुर की नदियां,
हर दिशा से,
बह के सागर में मिलें
बादलों का रूप लेकर,
बरसें हल्के- हलके
ये पंक्तियां दोहराई जाती है- भारत की हर भाषा मे। अलग धुन, अलग अंदाज, अलग शब्द, लेकिन सन्देश एक ही- मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा...
और पूरी वीडियो में फिर कोई नेता नही। कलाकार है, लेखक, लोकगीत गायक है। विभिन्न प्रदेशो के खिलाड़ी, संगीतकार,आम लोग हैं।
ताजमहल है, मेट्रो रेल भी। भारत की प्रगति है, लोगो की एकता है। एक ही गीत, एक सन्देश है।
अंतिम अन्तरे में लता मंगेशकर का चेहरा है। उन्होंने तिरंगे बार्डर की साड़ी पहनी है। धुन बदलती है, हरे, सफेद और केसरिया पहने हुए, हंसते खिलखिलाते बच्चे दौड़ते है।
तीन पट्टियों में खड़े होते हैं। स्क्रीन पर तिरंगा दिखता है। धुन अब जय हे, जय जय जय जय हे की बज रही है।
https://t.co/bnVYjtkVX9
●●
हम बच्चो के लिए एक कार्टून फ़िल्म थी। एक चिड़िया, अनेक चिड़िया।
दाना चुगने आयी चिड़िया..
और फिर वो मिल जुलकर, जाल लेकर,
भागी चिड़िया- फुर्ररर।
एक और अनेक को आसान तरीके से समझाया था। पांच उंगलियां मुट्ठी बनती है-
बन गयी ताकत, बन गयी शक्ति
हम बच्चे थे, तो हमारा फेवरिट था।
https://t.co/LDtleU0iz4
●●
एक वीडियो स्वतंत्रता के 40 वर्ष पूरे होने पर फ्रीडम रन पर थी। मशाल लेकर दौड़ते हुए खिलाड़ी, सिने कलाकार, मशहूर लोग।
लुई बैंक्स का संगीत बैकग्राउंड में बजता है। सुनने में कुछ कुछ टॉप गन एंथम की तरह। लेकिन बड़ा पावन और झंकृत शान्ति देने वाला। अंत इसका भी राष्ट्रीय धुन पर होता है।
दिल बाग बाग हो उठता है।
https://t.co/i4tF1WSZz3
●●
सबसे मार्मिक था- सुन सुन सुन मेरे मुन्ने सुन..
जैकी श्रॉफ एक बच्चे को गोद मे खिला रहे हैं, गा रहे है- प्यार की गंगा बहे देश मे एका रहे..
फ़िल्म में उस दौर के सिने कलाकार हैं। हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली, मलयालम, तेलगु, तमिल, असमिया फिल्मों के कलाकार, और उनके बच्चे। मिलकर गा रहे है-
अब नही उजड़े सुहाग,
अब नही फैले ये आग...
फिल्माकंन नयनाभिराम है। गीत मर्मस्पर्शी है, और विषय है दंगे।
जी हां, उस वक्त भी दंगे थे।
और सरकार उन्हें रोकने की कोशिश करती। जनता को एका रखने की शिक्षा देता। सिने कलाकार मुफ्त इसमें काम करते। फिल्म्स डिवीजन ऐसे फिल्मों का ठेका देता।
यह काम सरकारी पैसे से होता। लोग पसन्द करते, गुनगुनाते। स्कूलों में इनपे ड्रामे बनते, बच्चे रोल प्ले करते।
https://t.co/oiKw0ZSEMO
●●
तब के बच्चे रहे लोगो के जेहन में वे गीत आज भी बसे हैं। मेरे जेहन में भी।
और आज भी सत्ता से, मीडिया से, टीवी से यही अपेक्षा होती है कि ऐसे संदेशे दे। खर्च करे मेरे पैसे, टीवी वालो को दे, जनजागरण में लगाये। देश मे एका लाये।
पर ये बीते दौर की बात है। विज्ञापन में नेता दिखते हैं।चौड़ी सड़कें, हाई राइज बिल्डिंग, सेना, एयरपोर्ट, प्लेन, वन्दे भारत दिखता है। निजी PR का एक्सरसाइज दिखता है।
गायब है तो एकता का संदेश।
नेता खुद होर्डिंग लगाता है-बंटोगे, तो कटोगे।
चुनाव आयोग को छोड़कर सबको पता है- यह मुसलमान के खिलाफ बोला गया जुमला है। दंगे का उकसावा है।
●●
दूरदर्शन सरकारी था, चैनल निजी है, मगर सरकारी गुलाम ही हैं। उनके मालिकान सरकारी पसन्द के प्रोग्राम देते हैं।
दिन रात नफरती बहस।
दूरदर्शन हो या निजी चैनल। यह उस दौर की सरकार के दिल की आवाज हैं। नेता की प्राथमिकता है, उसकी नीति है।
तो कौन जोड़ रहा था, कौन काट रहा है। किसने सुर मिलाए, कौन बांटना चाहता है, टीवी के कार्यक्रमो से ही अंदाज लगाइये।
@akhileshsi1 2019 में झामुमो के टिकट पर जुगसलाई से पहली बार विधायक चुनकर आए मंगल कालिंदी देश के 5वें सबसे गरीब विधायक थे। सब मिलाकर कालिंदी के पास सिर्फ 30 हजार रुपये थे। 2024 में दोबारा विधायक बने हैं। आज उनके पास करीब 72 लाख का घर, दो बड़ी गाड़ी और लाखों बैंक बैलेंस है।
नेहरू जी पर फैलाए १० झूठों की सच्चाई
------------------------------
● झूठ 1: पंडित जवाहरलाल नेहरू के कपड़े पेरिस में धुलते थे?
सच्चाई: पंडित नेहरू ने अपनी आत्मकथा में स्पष्ट लिखा है कि उनके बारे में इस तरह की बातें फैलाई जाती हैं। लेकिन एक बात तो यह है कि कोई कैसे हर रोज पेरिस से अपने कपड़े धुलवा सकता है। दूसरी बात यह है कि जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा हो और गरीबी की चपेट में हो तो इस तरह की बात सोचना भी अय्याशी है।
● झूठ 2:
नेहरू जी ने क्रांतिकारियों के लिए कुछ नहीं किया?
सच्चाई: पंडित नेहरू जेल में बंद भगत सिंह से मिलने गए और उनकी रिहाई के लिए पूरे प्रयास किए। चंद्रशेखर आजाद भी नेहरू जी के संपर्क में थे। उत्तर प्रदेश में सारे क्रांतिकारियों के अगुवा श्री गणेश शंकर विद्यार्थी नेहरू जी के नेतृत्व में ही काम कर रहे थे।
● झूठ 3:
सरदार पटेल को दरकिनार करके महात्मा गांधी ने पंडित नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया?
सच्चाई: महात्मा गांधी ने 1935 के बाद से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि जवाहरलाल नेहरू उनके उत्तराधिकारी हैं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी महात्मा गांधी ने यह बात कही थी। 1937 और 1946 के चुनाव में नेहरू जी कांग्रेस के निर्विवाद नेता थे और जनता की पहली पसंद इसलिए, उन्हें प्रधानमंत्री बनाया गया।
● झूठ 4:
कश्मीर के मुद्दे को पंडित नेहरू ने उलझा दिया?
सच्चाई: भारत की आजादी के काफी समय पहले से ही पंडित नेहरू का ध्यान इस बात पर था कि अगर पाकिस्तान की मांग उठती है तो मुस्लिम बहुल होने के कारण कश्मीर के पाकिस्तान में जा सकता है। इसलिए उन्होंने शेख अब्दुल्ला के माध्यम से कश्मीर की जनता को कांग्रेस पार्टी के साथ किया। यह पंडित नेहरू की कूटनीति ही थी जिसकी वजह से कश्मीर राज्य का भारतीय संघ में विलय हुआ।
● झूठ 5:
अक्सर कहा जाता है कि सरदार पटेल की कश्मीर के मामले में कोई भूमिका नहीं थी और नेहरू अकेले यह काम कर रहे थे?
सच्चाई: यह है कि पंडित नेहरू शेख अब्दुल्लाह से और सरदार पटेल राजा हरि सिंह से बातचीत कर रहे थे। कश्मीर का मिशन दोनों नेताओं का संयुक्त मिशन था।
● झूठ 6:
धारा 370 को लेकर नेहरू जी को दोष दिया जाता है?
सच्चाई: जिस दिन संविधान सभा में धारा 370 पास हुई उस दिन पं. नेहरु अमेरिका में थे। सरदार पटेल ने अपने दम पर कांग्रेसी संविधान सभा सदस्यों को समझा कर बिना किसी बहस के धारा 370 पास कराई। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भी धारा 370 का विरोध नहीं किया था।
● झूठ 7:
पंडित नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस की जासूसी कराई?
सच्चाई: पंडित नेहरू और सुभाष चंद्र बोस सच्चे दोस्त थे। बोस की मृत्यु के बाद पंडित नेहरू और सरदार पटेल ने गोपनीय रूप से उनकी पत्नी और बेटी को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जो लंबे समय तक गुप्त रूप से जारी रही। इसी सहायता को आज जासूसी के नाम से प्रचारित किया जाता है।
● झूठ 8:
पंडित नेहरू ने इंग्लैंड के प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था कि सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार किया जाएगा?
सच्चाई: यह पत्र पूरी तरह फर्जी है। इसमें ब्रिटेन की प्रधानमंत्री के नाम की स्पेलिंग तक गलत है। सच्चाई यह है कि पंडित नेहरू ने लाल किले में बंद आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का मुकदमा एक वकील की हैसियत से लड़ा और सारे कमांडरों और सैनिकों की रिहाई कराई।
● झूठ 9:
नेहरू जी ने इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बना कर वंशवाद को बढ़ावा दिया?
सच्चाई: पंडित नेहरू सबसे पहले अपना उत्तराधिकारी जयप्रकाश नारायण को और उसके बाद राम मनोहर लोहिया को बनाना चाहते थे। लेकिन दोनों नेता इसके लिए तैयार नहीं हुए। नेहरू जी के बाद उनके सबसे विश्वस्त लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने। नेहरु जी ने इंदिरा जी को प्रधानमंत्री नहीं बनाया।
● झूठ 10:
नेहरू जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की स्थाई सदस्यता ठुकरा दी?
सच्चाई: इस तरह के दावे भी सरासर झूठ है। पंडित नेहरू ने अपने जीवन काल में ही संसद में स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव कभी भारत के सामने नहीं आया। दूसरी बात ताइवान की जगह चीन को ही संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता मिलनी थी जो उसे पहले से हासिल थी।
#नेहरू_मिथक_और_सत्य
क़रीब पंद्रह अक्टूबर 2016 की बात है, अंशुमन (शारदा सिन्हा के पुत्र) का फ़ोन आया कि एक गाना है जिस पर वीडियो का सोच रहे हैं, मैंने बोला की मेरे पास भी एक छठ से संबंधित कहानी है जिसके लिए एक गाना चाहिए, कहानी में था कि एक बिहारी लड़के की पंजाबी पत्नी है, लड़के की माँ छठ नहीं कर रही है तो वो पंजाबी लड़की सोचती है की मैं छठ करूँ और पहली बार वो छठ करती है, फिर जब अंशुमन ने गाना भेजा तो उस गाने के बोल थे “पहिले पहिल हम कइनी छठी मइया बरत तोहार”, मैंने अंशुमन को बोला की ये गाना ईश्वर (godsend) ने भेजा है क्योंकि कहानी यही है जो गाने के बोल है l शारदा दीदी से 19 अक्टूबर के आस पास बात हुई कि ये वीडियो कैसे बनेगा, दीदी को मैंने बोला की दीदी आपके गाने पर अच्छा वीडियो बनाऊँगा जो लोग याद रखेंगे, लंबी बात हुई मैंने ये भी कहा कि छठ को लेकर एक पूरी फ़िल्म बनाएँगे दीदी, ख़ैर वो हो नहीं पाया, कहानी आज भी रखी हुई है । अब इस वीडियो को बनाने के लिए खर्च जिस सवाल से हमेशा जूझना पड़ता है, लेकिन Neetu ने कहा की तुम बनाओ पैसा आ जाएगा और उधर बैंगलोर के अशोक शर्मा जी और इधर मैं और नीतू ने काफ़ी जद्दोजहद के बाद पैसा जमा किया जिसमे शारदा दी ने भी कंट्रीब्यूट किया और एक हफ़्ते के अंदर 25 अक्टूबर को सुबह सात बजे से रात दो बजे तक लगातार शूटिंग करके एक दिन में शूटिंग किया हम लोगों ने और 30 अक्टूबर को वो गाना रिलीज़ कर दिया l मराठी कैमरामैन, उत्तर प्रदेश के एडिटर, केरल के कलरिस्ट और गुजराती स्टूडियो के मालिक की मदद से वो वीडियो बना । इस वीडियो में महिला कलाकार ने जो गहने पहने हैं वो माँ के असली गहने जो लॉकर से निकाल के लाये और जो वीडियो में लड़के की माँ की आवाज़ है वो मेरी माँ की आवाज़ है जो आगे के सीरीज में भी सुनाई देती है । ये “बेजोड़” चैनल का पहला गाना था l मुझे भी नहीं अंदाज़ा था कि लोगों को ये पसंद ऐसा आएगा l नहीं पता था की शारदा दी नहीं रहेंगी, वो हमारी स्मृतियों में हैं लेकिन उनकी आवाज़ हमेशा कानों में रहेगी l
https://t.co/08zQbOntov