हर मैदान में तुम बेखौफ लड़ो,
वक्त से पहले मौत नहीं आने वाली है।
जय श्री राधे कृष्णा 🙏!! Politics is a great force in itself.
Twit is my personal view 🤔🙏🙏
सुनो @abp न्यूज़, मैं कोई कॉsल गर्ल या प्रॉस्टिट्यूsट नहीं हूँ.
जब भाजपा का आईटी सेल मेरा हौ���ला नहीं तोड़ पाया तो तुम जैसे गोदी मीडिया को कमान सौंप दी?
पहले भाजपा के नेता बेटियों की इज्जत ख़राब करते थे, अब तुम लोग भी बेटियों की इज्जत लूटोगे? इतनी हिम्मत? इतनी बेशर्मी? ये बात यहीं खत्म नहीं होगी @abp
बेटियों का सम्मान तुम लोगों के लिए खेल का सामान हो गया है?
@narendramodi @NCWIndia
बिहार में आज हर जगह लूट , फिरौती , मर्ड��� आम बात हो गया है , इस bh@ri के सम्राट सरकार से बेहतर पालतू बूढ़ा सही था , कम से कम इस प्रकार आम घटनाएं तो कम होती थी ।
बिहार को बर्बाद करने में हमारे प्रिय राजकुमार @yadavtejashwi भाई का भी कम योगदान नहीं है।
@Wangchuk66 आप अ��ना भूख हड़ताल तोड़ दीजिए , ये हिजड़ों की सरकार है , और ये जनता सब भरवां है जिसके लिए आप अपना जान मत दीजिए , आप बहुत खास हो हमारे लिए , इस देश के लिए और सबसे जरूरी अपने परिवार के लिए। 🙏🙏
अब इंक��ाब होगा,
बिहार की डकैती का हिसाब होगा। ✊🏻🔥
मोदी-शाह की गोद में बैठे चोर चुनाव आयोग के खिलाफ संघर्ष अब और भी जोरदार होगा।
तमाम विपक्ष के पार्टी को एकजुट होके देश के सर्वोतम पद पर बैठे गद्दार और तड़ीपार को गद्दी से उखाड़ फेंकना होगा ।
कंचना यादव और प्रियंका भारती जी को हार का जिम्मेदार बताने वाले के आइडियल भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला और संबित पात्रा जैसे लोग हैं।
असल में इनलोगों का विरोध करने वाले लोग वहीं हैं जो RJD के समर्थक नहीं रहे हैं। उन्हें समस्या इनके पिछड़ों-दलितों के लिए बेबाकी से बोलने से है।
ये मेरा 11 अक्टूबर का बयान है।
ध्यान से सुनिये।
चुनाव लड़ने की औपचारिकता तो सबने पूरी की लेकिन जीत का प्रमाण पत्र तो पहले ही अज्ञानेश कुमार ने मोदी को दे दिया था।
बिहारवासियों को गमछा लहराने और कट्टा की बात करने वाला ऐसा नेता चाहिए जो दस हज़ार खाते में भिजवा दे…
…उन्हें रोजगार और विकास से पहले म���ोरंजन चाहिए.
#BiharElections2025
जब कोई “भीमटी” कहता है तो “भीम” का नाम गूंजता है , जब कोई “नीलचट्टी” कहता है तो नीला रंग याद आता है जो समता और सामाजिक न्याय का प्रतीक है।
ये शब्द हमें मज़बूत करते हैं। हम महिलाओं से ना कोई हमारी आवाज़ छीन सकता है, ना समाज और ना ही समाज का ��मर्थन।
चाहे मैं हूँ, “कंचना यादव” हों या “सारिका पासवान” तीनों बहुजन महिलाएं हैं, जिन्होंने बेड़ियों में बंधने से इनकार किया है।
बाबा साहब ने हमारी बेड़ियों से हमें मुक्त किया, उन बेड़ियों में हम दुबार�� क़ैद नहीं हो सकते।
नफ़रत, हिंसा, पितृसत्ता और जातिवाद के ख़िलाफ़ “उलगुलान” था, है और जारी रहेगा।
We can be defeated but cannot be destroyed. We’ll rise from own ashes and wipe out the casteist and communal forces.
Together we stand , together we rise.