इश्क़ के लिए कोई दलील नहीं चाहिए - और जब बात आक़ा ए करीम से इश्क़ की हो तो फिर - हमारे इमाम ने फरमा दिया
शिर्क ठहरे जिसमे ताज़ीम ए नबी
उस बुरे मज़हब पे लानत कीजिए
PMO summoned Meta officials yesterday under the pretext of PM Modi's video takedown. But the real motive was to tighten the grip around Genz & anti-govt content.
Anything remotely critical of PM Modi gets taken down instantly, even if you don't name him.
Several of my Instagram posts have been restricted in India, where I satarized him without taking his name.
PM Modi was never a tolerate person, but now his insecurity is increasing with his age. He loves it when people call him tough, but fears of being mocked. Meta seems to get along with him atleast for now.
#MetaCensorsIndia
दोनों स्थितियों का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे तो माहौल और ठीक होगा :
इंदिरा गांधी ने 1971 में अमेरिका के गले पर पैर रखकर बांग्लादेश को आजाद करवाया था। अमेरिका इंदिरा गांधी से चिढ़ता था, राष्ट्रपति निक्सन और CIA चीफ किसिंजर उन्हें गाली देते थे। मैं दावा नहीं करता, लेकिन हो सकता है कि अमेरिका ने इंदिरा गांधी को हटाने का सोचा हो।
लेकिन अभी वाला तो लेटा हुआ है अमेरिका के पैरों में। ट्रंप की धमकी से सीजफायर किया, ट्रेड डील करी, ईरान युद्ध में गूंगा बनकर बैठा रहे। ऐसी कठपुतली को अमेरिका क्यों हटाएगा। जिसके गले में एक सिक्का लटकाकर, करोड़ों के हथियार बेचे जा सकते हैं, उसे कोई विदेशी ताकत क्यों ही हटाएगी। वो तो इसको चौथी बार भी लाना चाहेंगे
बचकानी बात है यह।
गीतांजलि कॉल देकर ख़ुद संसद मार्च से ग़ायब रहीं, बच्चे पिटे।
कल तक सोनम माँग कर रहे थे कि विपक्ष मिलने आए और सदन में मुद्दा उठाने का वादा करे, आ
सदन में मुद्दा न उठाने देने पर राहुल संघर्ष में उतरे तो गीतांजलि उसका विरोध कर रही हैं।
आंदोलन पर किसी का ठेका नहीं होता, वह विपक्ष के नेता हैं उन्हें अपने तरीके से मुद्दा उठाने का हक़ है।
पति-पत्नी बार-बार सरकार से अपना गठजोड़ साबित कर रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान जी,
आप इस्तीफा मत दो। आपकी कोई गलती नहीं है। गलती उससे ही होती है, जो कोई काम करता हो। आपको तो अपने मंत्रालय का कोई काम करने का अधिकार ही नहीं है।
बस आप देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दो कि ऊपर से फाइलें आती हैं, मैं बिना पढ़े दस्तख़त करके आगे बढ़ा देता हूँ। बताओ कि मेरी तो बंगाल चुनाव में ड्यूटी लगी थी, मुझे तो NEET की फुल फॉर्म भी नहीं पता।
रेलों का उद्घाटन रेल मंत्री नहीं करता,
सड़कों का उद्घाटन परिवहन मंत्री नहीं करता,
एयरपोर्ट का उद्घाटन उड्डयन मंत्री नहीं करता
परीक्षा पे चर्चा शिक्षा मंत्री नहीं करता,
मेडल विजेताओं से चर्चा खेल मंत्री नहीं करता,
विदेशी दौरे विदेश मंत्री नहीं करता
पर्यावरण मंत्री पेड़ नहीं लगाता
लेकिन जब भी कोई घटना हो जाती है, आप लोग मंत्रियों से जवाब माँगने लग जाते हो, इस्तीफे की बात करते हो।
उसका नाम ही भूल जाते हो, जो एक अकेला सबके मंत्रालय चला रहा है।
क्या ये अच्छी बात है?
मुझे नहीं पता ऐसी ख़बर बड़ी या ब्रेकिंग क्यों नहीं ... क्योंकि ग़रीब का बच्चा है? बंडा का मामला है? जिसे आप मैप में भी खोज नहीं पाएंगे!
ख़ैर बंडा सरकारी अस्पताल में 19 महीने के बच्चे की आंखों में डॉक्टर ने कफ साफ करने वाला ड्रॉप डाल दिया उसके आंखों की रोशनी चली गई है...
Here are the Indians celebrating the win of Ireland over India in the T20
Now imagine if this were a Muslim family, they would have been branded as traitors & a case would have been filed against them.
This is the difference!!
अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल 72 डालर पर आ गया है।अमेरिका - ईरान युद्ध के चलते पेट्रोल और डीज़ल पर भारत में लगभग 8 ₹ की बढ़ोतरी की गई थी।जब कच्चा तेल 100 $ पर पहुँच गया था।तो क्या अब देश की जनता को राहत मिलेगी !
क्रूड ऑयल का दाम $80 से नीचे आ चुका है। लेकिन पेट्रोल-डीजल का दाम अब कम नहीं होगा। कल ही झारखंड में विधायक खरीदे हैं, महाराष्ट्र वाले सांसदों का अभी हिसाब करना है।
इससे अच्छा चंपत राय हमारे प्रधानमंत्री होते तो ईरान से तेल चुरा-चुराकर आधे दाम पर बेचते बाजार में।
भारत सरकार को बताना चाहिए कि जो भारत सरकार ख़ुद देश में विदेशी निवेश के लिए दुनिया के देशों की तरफ़ देखती रहती है आख़िर वो किस तरह से और कितना निवेश अमेरिका में करने जा रही है? आख़िर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी के सामने पर बोला है तो इस पर एक श्वेत पत्र तो जारी होना ही चाहिए।
सांसद क्या भाव है ?
कहाँ के साहब ? कैसा फ्लेवर चाहिए पंजाबी, बंगाली या फिर मराठी ?
बंगाली और मराठी का बताओ ?
बंगाली की 4 करोड़ डाउन पेमेंट और बाकी 36 महीने के लिए एक करोड़ प्रति महीना की आसान किस्तों पर, मराठी का फिक्स 15 करोड़ सीधे टेबल पर
दोनों जगह जनता ने चुना है फिर लोकतंत्र के दो भाव क्यों?
आप रास्ता भटक गए शायद,ये मंडी है, लोकतंत्र नहीं।यहाँ जरूरत के हिसाब से बोली लगती है।