मस्क अंबानी को प्रधानमंत्री लिख रहे हैं। भारत की सरकारी फैक्ट चेकर PIB खंडन भी नहीं कर रही है। पूरी भारत सरकार मस्क के आगे चुप है। मंत्री चुप हैं। मस्क अंबानी को नहीं, प्रधानमंत्री मोदी को चैलेंज कर रहे हैं। उनका यह पोस्ट कॉरपोरेट वॉर का इशारा नहीं करता है बल्कि प्रधानमंत्री पद और दफ्तर की गरिमा की ऐसी तैसी कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी भी चुप हैं। यहाँ विपक्ष ज्ञानेश कुमार चोर है का नारा लगाने के लिए जंतर-मंतर जाना चाहता है तो उसे रोक दिया जाता है। जेन ज़ी को दिल्ली आने से रोक दिया जाता है। सारी ताकत विपक्ष पर दिखा रहे हैं, दो लाइन किसी मंत्री से लिखा नहीं जा रहा है कि मस्क जी हम जिस मंत्रिमंडल के मेंबर हैं, उसके प्रधानमंत्री तो नरेंद्र मोदी हैं। आप भूल सुधार कर लीजिए।प्रधानमंत्री पद की गरिमा को मुद्दा बनाने वाली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही ट्वीट कर देना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, अंबानी नहीं। गोदी मीडिया के ऐंकरों को चिल्लाना चाहिए कि मस्क ग़लती सुधार लो, वरना इस दीवाली फुलझड़ियों को छोड़ टेस्ला के ख़िलाफ अभियान चलाने लगेंगे। सब चुप है। दूसरों को चुप कराने वाले चुप हैं।
जिस मस्क को कभी भारत में जेल जाने से डर लगता था, उस मस्क को क्या हुआ है? क्यों पिनक गए हैं, चिंता की बात होनी चाहिए। सूचना प्रसारण मंत्रालय के मंत्री को एक्स के किसी मैनेजर को बुलाकर पूछना चाहिए कि तुम्हारे मालिक नरेंद्र मोदी को छोड़ अंबानी को कैसे प्रधानमंत्री लिख रहे हैं? यह शपथ कब हुआ है? फोटो दिखाओ? मस्क, अंबानी, अदाणी, सरकार इन सबके बीच जो हो रहा है, उनके बीच सही बात क्या है, किसी को पता तो है नहीं। कौन किसे मैनेज कर रहा है, पर्दे के पीछे के पर्दे के पीछे कौन-कौन है, यह जान लेने से क्या बदल जाता है। मगर प्रधानमंंत्री अंबानी हैं, ये कब बदल गया? राहुल गांधी तो वोट चोरी को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और ज्ञानेश कुमार के प्रोजेक्ट तक ही देख पा रहे हैं, इसके ऊपर का भी मामला है क्या?
वैसे इस प्लेटफार्म के लिए मस्क आपका शुक्रिया। ठीक है सरकार के कहने पर आप भी पोस्ट हटा देते हैं लेकिन आदमी अपनी बात तो लिख पा रहा है। अगर एक्स करोल बाग के किसी टाइकून का प्लेटफार्म होता तो हम लोगों के प्लेटफार्म के आगे बैरिकेड लगवा देता और डिलीट कर देता। इसलिए आपके पोस्ट पर इधर के उद्योगपति लोग भी चुप हैं। आसान नहीं है आपकी तरह लब-लब कुछ भी बोल देना। इधर सारा आंत्रोपन्योरशिप सरकार से लाइसेंस, ठेका, ज़मीन वाले प्रोजेक्ट लेने में लगा रहता है। ज़िलाधिकारी से लेकर सचिव के चक्कर काटने में लगा रहता है। एक प्रोडक्ट ढंग का नहीं बनता। अपने प्रोडेक्ट को ग्लोबल लेवल पर पहुंचाने के बजाए 24 घंटा इसी में लगे रहते हैं कि सरकार से क्या मिल सकता है। आपको भी वही झेलना पड़ेगा। आप भारत आओ, दीवाली का टाइम है, गिफ्ट-विफ्ट लेकर आओ, बात समझो, आप देखना यही मंत्री लोग आपके साथ कैसे फोटो खिंचाते हैं। आओ तो सही, पूरी सरकार बिछी मिलेगी। मुस्कुरा दोगे पीएम साहब को देख कर तो गोदी मीडिया हेडलाइन बना देगा। अपनी वैल्यू समझो आप। कॉकरोच दिल्ली आ गए हैं और आप उधर से ही पोस्ट फायर किए जा रहे हो। COME.
इसीलिए मस्क जी, भारत के प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र मोदी है। अंबानी नहीं है। भारत में आपकी जीवनी हिन्दी में भी छप चुकी है। आपकी माँ मेय मस्क जी की किताब जब औरत सोचती है, राजकमल प्रकाशन से छप चुकी है।आप एक मामूली पॉलिसी निर्णय को लेकर पिनके हुए हैं, यहां तो करोड़ों लोगों के वोट काट दिए गए हैं। वोट का अधिकार छीन लिया गया है। बात को समझो आप। सोशल मीडिया की तरह वोटर को ब्लॉक कर दिया जाता है। नेता प्रतिपक्ष को धक्का दिया जाता है। स्टार लिंक लेकर आ भी गए होते तो क्या हो जाता, आपका भी आज सीपी और चार किलोमीटर के दायरे में बंद रहता। अच्छा हुआ है आप नहीं आए। वैसे अगर स्टार लिंक का कोई पर्सनल लिंक है तो व्हाट्स एप पर भेज देना। आज जंतर-मंतर से वीडियो अपलिंक करना है। बच्चों को प्यार देना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से भी। हम लोग डर जाते हैं मगर प्यार ज़रूर करते हैं। ख़ुश रहिए।
Dear Prime Minister Ambani,
Please accept my humble apologies for not realizing that you are the real boss of India.
Naturally, you would prefer to maintain your monopolistic exploitation of the great people of India, but would you nonetheless consider allowing Starlink to compete?
There are many areas of India, as there are in all countries, with no Internet access, which denies children the opportunity for education and for small businesses the opportunity to sell their goods to a global market. Starlink would change their lives for the better.
Thank you 🙏
Unfortunately, we are being blocked by certain oligarchs in order to maintain their monopolistic chokehold on the Indian people. You can guess who they are …
This is a crime against the people of India!
"मोदी सरकार को मालूम था कि एक दिन चुनाव आयोग के भीतर का खेल बाहर आएगा और जनता चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार करने की मांग करेगी। इसीलिए दिसंबर 2023 में मोदी सरकार ने कानून बनाया कि चुनाव आयुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। यह कानून तब बना जब दोनों सदनों के 141 सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। सदन में कोई विपक्ष ही नहीं था। अब समझ में आ रहा है कि वह कानून किसलिए बनाया गया था।"
The Election Commission of India is under fire like never before.
The SIR has struck 13 crore names off draft rolls, putting the EC at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.
HOWEVER, what nobody knew: through that same period, some of the sharpest questions were being asked from inside.
Out today, after months of work. Our #ExpressInvestigation 🧵
(1/10)
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव में बेईमानी और बेशर्मी की सारी हदें भाजपा सरकार ने पार कर दीं। नगरीय निकायों में अपने बोर्ड बनाने के लिए सारी मर्यादाओं और नियम-कानूनों को भाजपा सरकार ने तार-तार कर दिया। पूरा प्रदेश स्तब्ध है, राजस्थान में कभी ऐसा होगा यह सोचा भी नहीं जा सकता था। भाजपा सरकार ने सरकारी मशीनरी, पुलिस और पूरा प्रशासन लगाकर लोकतंत्र की खुलेआम लूट की है। शायद ही कोई निकाय बचा हो जहाँ भाजपा ने सत्ता और धनबल के दम पर जनमत को कुचलने का प्रयास न किया हो।
राजस्थान में एक-एक पार्षद के लिए 2-2 करोड़ रुपये तक की बोली लगाई गई। कांग्रेस पार्षदों को कभी उनके घर को अवैध बताकर नोटिस भेजा गया, कभी उनके प्रतिष्ठानों को सील किया गया, नए-नए मुकदमे दायर कर पुलिस के सामने पेश होने के नोटिस थमाए गए, बाड़ेबंदी में रुके पार्षदों के कैंप में पुलिस भेजकर उन्हें जबरन उठाया गया। भाजपा सरकार के इन कुकर्मों के कारण कल रात 12 बजे तक राजस्थान हाईकोर्ट को सुनवाई कर चुनाव से जुड़ी याचिकाओं का निस्तारण करना पड़ा, जिसमें भाजपा सरकार को अदालत से करारा तमाचा लगा।
यह सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस के जरिए भी यहाँ के निर्वाचित पार्षदों को भाजपा के पक्ष में ले जाने का काम किया गया। अब तक जिस तरह की हॉर्स ट्रेडिंग और एजेंसियों के दुरुपयोग की तस्वीरें हम पश्चिम बंगाल में देख रहे थे, वही घिनौना खेल अब राजस्थान के अपने निकाय चुनावों में खुलकर सामने आ गया है।
आज नगरीय निकाय चुनाव के दिन भी मथानिया, पावटा, तिजारा, कुचेरा, हनुमानगढ़, गंगानगर, अलवर, निम्बाहेड़ा समेत पूरे राजस्थान से जो दृश्य सामने आए, वे चीख-चीखकर लोकतंत्र की हत्या की गवाही दे रहे हैं। जब नगरीय निकाय चुनावों में यह हाल है, तो साफ है कि आने वाले पंचायत चुनावों में भाजपा सरकार इससे भी आगे जाकर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर सकती है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, आपसे प्रदेश को ऐसे कृत्यों की उम्मीद नहीं थी। अब आपका और आपकी सरकार का नाम राजस्थान के इतिहास में लोकतंत्र की हत्या करने वाले मुख्यमंत्री और सरकार के रूप में दर्ज हो चुका है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि राजनीतिक मामलों में काफी हद तक निष्पक्ष माने जाने वाले राजस्थान के नौकरशाह और पुलिस के कई अधिकारी भी पहली बार भाजपा सरकार के साथ मिलकर इस पाप में शामिल हो गए। संविधान की शपथ लेने वाले अधिकारियों को विचार करना चाहिए कि क्या ऐसे कुकृत्यों में शामिल होने के लिए वे राजकीय सेवा में आए थे? समय आने पर हर एक की जवाबदेही तय होगी, ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
@RavindraBhati__ कुछ लोगों के स्वार्थ से
निर्दलीय उम्मीदवारों पर जनता का विश्वास नहीं टूटना चाहिए।
निर्दलीय होना सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं,
जनता के भरोसे और अपने सिद्धांत पर कायम रहना है।
क्योंकि हर निर्दलीय बिकाऊ नहीं होता।
इस विषय को भी राज्यसभा में उठाया जाए बड़े भाईसाहब ।
मैं 26 साल वार्ड 47 में रहा, 1000–1500 घरों तक खुद पहुँचा और ईमानदारी से चुनाव लड़ा।
चुनाव से पहले कहा गया था—“70 से ज्यादा वोट नहीं आएंगे।”
नतीजा आया तो संख्या देखकर मैं ही नहीं, मेरे साथ खड़े लोग भी हैरान रह गए।
ईवीएम की गड़बड़ी की बातें पहले सुनी थीं, आज अपने परिणाम के बाद सवाल खुद महसूस किए हैं।
हार का दुख नहीं है, लेकिन अपने वोटों के साथ क्या हुआ—इसका जवाब जरूर चाहिए।
यह मेरी हार-जीत नहीं,मतदाता के विश्वास का सवाल है।
@ashokgehlot51@Mahendra_Luni@INCRajasthan@RahulGandhi
@ashokgehlot51@GovindDotasra@INCRajasthan@INCIndia in Ward 47 Kudi bhagtasni Jodhpur you gave ticket to your candidate of ward 50 in my ward 47.
This is not acceptable.
I will fight election independently.
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री @BorisJohnson ने तो @narendramodi को फट्टू बता दिया!
नेहरू में हिम्मत थी, मोदी शॉर्टकट ढूंढते हैं।
नेहरू के पास दूरदर्शी सोच थी, मोदी झुक जाते हैं।
UK के पूर्व PM बोरिस जॉनसन ने बताया कि #महारानी ने उनसे कहा था कि 1952 में PM नेहरू ने उनसे कहा था कि भारत हमेशा रूस के साथ रहेगा।
अब #मोदी को देखिए, वे कैसे USA के सामने झुक गए। मोदी के राज में भारत को रूस, वेनेज़ुएला वगैरह के साथ व्यापार करने के लिए US से इजाज़त लेनी पड़ती है।
USA के कहने पर मोदी UPI पर टैक्स लगाते हैं ताकि वीज़ा और मास्टरकार्ड के हितों की रक्षा हो सके; USA भारत को ईरान के साथ व्यापार न करने का आदेश देता है और भारत के लिए सीज़फायर का फ़ैसला भी USA ही करता है।
मोदी भारत के लिए एक आपदा हैं। इतिहास उन्हें भारत के सबसे कमज़ोर PM के तौर पर याद रखेगा।
बोरिस जॉनसन को मोदी गुजरात घुमाने ले गए थे और बुलडोजर पर बैठाया था।