आज उन कई महान हस्तियों व सेलीब्रिटीओ को UNFOLLOW और साथ ही साथ BLOCK भी किया जो...
" Followback मिल ने बाद पीछे से थोड़े दिनों बाद unfollow कर देते है"
GDP 7.8% से बढ़ रहा है, तो इसका क्रेडिट तो दोगे ना कि आज दलित भाई 92% केस प्रूव भी नहीं कर पाता है, पर 75% पैसा अवश्य पा जाता है, ताकि वो उन पैसों का कुछ काम कर सके।
GDP 7.8% तो है, और मैं इसको सेलिब्रेट भी करता हूँ, लेकिन लोग मोदी जी का वह परिश्रम नहीं देख रहे कि मार्केट में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए केवल मनरेगा के माध्यम से पैसे नहीं दे रहे, बल्कि उन्होंने मोदी एक्ट के माध्यम से केवल केस करने मात्र पर लाख रुपये देने की व्यवस्था कर दी है।
कुछ लोग इससे जलते हैं कि ये तो मोदी एक्ट को वैपोनाइज़ करना हो गया, ये तो मोदी जी चाह रहे हैं कि लोग फ़र्ज़ी केस करें! अरे, मैं तो मोदी जी से कहता हूँ कि जो लोग ये कहें कि कोई दलित झूठ बोल रहा है, या फ़र्ज़ी केस करता है, या OBC वाले अधिक फँसते हैं जैसी बेकार की सत्य बातें कहें, उन पर भी मोदी एक्ट में संशोधन करके कोई धारा लगा देनी चाहिए।
हाथ में पैसे हों तो लिक्विडिटी रहती है, बाज़ार में पैसा जाता है, जबकि सवर्णों के घर में वो पैसा पड़ा रहता है। वो वकील को लाख-दो लाख देता है केस लड़ने के लिए और टैक्स देता है, ताकि मोदी जी इनका स्किल इंडिया चलाते रहें। दोनों तरफ़ से पैसे सवर्ण देता है, जिससे राष्ट्र निर्माण होता है।
अब बताइए कि मोदी जी की इस महान मुहिम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ये एक पैटर्न है, इसकी जाँच होनी चाहिए। अब एक दलित वकील की धन-उगाही की जाँच होगी? कहीं ऐसा तो नहीं कि जज मनुवादी था?
जज भले मनुवादी निकल जाए, लेकिन भाजपा के नेता अब अंबेडकरवादी बनते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के केदारनाथ जी ने निशु को, जिसने मोदी की तेरहवीं मनाने की बात की थी और समोसे बाँट रही थी, गाइज़, उससे कहा है कि न केवल वो उसके साथ हैं, बल्कि स्वतंत्र भारद्वाज प्रकरण में मोदी जी भी उनके साथ हैं।
मोदी जी, कहाँ आप नेहरू के 17 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहने वाले रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए आतुर हैं और यहाँ आपकी ही पार्टी के नेता आपकी तेरहवीं मनाने वालों के साथ खड़े हो रहे हैं।
This is the type of people SC/ST act has enabled👇
They are conspiring to trap me in SC/ST act & trying to find ways on how to make my life "miserable".
& The language shows their perversion too.
Anonymity gives them a shield to express their hate without fear. But remember these people are amongst us.
Anyways, the tweets are being archived and forwarded to respective police stations and my team of lawyers.
Will deal with them according to Baba Saheb ka Sanvidhan.
Jai Bhim✊
क्यों भाई @samrat4bjp कुशवाहा, ये आपका जात-भाई है तो ये हगता रहेगा? शिवम मिश्रा के लिए जातिवादी @BJP4Bihar सरकार ने बिहार से दिल्ली तक पुलिस भिजवा दिया, लेकिन उसी @bihar_police को ये वीडियो नहीं दिख रहा क्योंकि ब्राह्मणों का नरसंहार होगा, तभी तो भाजपा बड़ी बनेगी!
सिर्फ शब्दों को पढ़िए, और ब्राह्मणों के बारे में सोंच देखिए।
@Uppolice क्या कुछ कार्यवाही होगी? या फिर सिर्फ ब्राह्मणों पर चुन चुनकर कार्यवाही होगी?
आज के समय में इस देश का सबसे ज्यादा शोषित और पीढ़ित ब्राह्मण समाज है जिसके हक में कोई बोलने को तैयार नहीं है? लेकिन यदि ब्राह्मण प्रतिक्रिया कर दे तो फिर कानून की बांहें बड़ी बड़ी हो जाती हैं।
कभी सोचा नहीं था कि हमें मोदी जी का विरोध करना पड़ेगा… 💔
लेकिन परिस्थितियाँ ही ऐसी बना दी गईं कि आज आवाज़ उठाना मजबूरी लग रहा है।
हम विरोध के लिए नहीं,
समानता और न्याय के लिए बोल रहे हैं। 🇮🇳
#Modi#BJP#Justice#India
SC/ST बेटी का रेप होता है तो उसे ₹8 लाख सरकारी मुआवजे के रूप में मिलता है।
लेकिन वहीं GC/OBC वर्ग की बेटियों के साथ अगर रेप होता है तो उसे कुछ नहीं मिलता।
बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में भी भेदभाव???
इसी को कहते हैं "जातिवाद"!!
औऱ ये और कोई नहीं, बल्कि सरकार करती है!!
मोदी एक्ट पर कुछ तथ्य और आँकड़े
एक पार्टी चाटुकार का वीडियो देखा जिसमें उक्त व्यक्ति, पत्रकार @23pradeepsingh जी को ज्ञान दे रहा है कि उन्होंने जो 'मोदी एक्ट' के बारे में दलित नागरिकों द्वारा पैसों की उगाही की योजना पर टिप्पणी की, वह ग़लत है।
बिल्कुल नहीं! प्रदीप जी ने जो कहा वह तथ्यात्मक रूप में उचित है क्योंकि न तो 1989 के मूल क़ानून में, न ही 2018 के मोदी संशोधन में इस बवासीर एक्ट में किसी भी तरह की '75% दिए पैसों की रिकवरी' का कोई भी प्रावधान है ही नहीं।
हाँ, कभी-कभी कोर्ट को लगता है कि ये कुछ ज़्यादा ही हो गया तो वह आदेश दे सकती है, परंतु लाखों ऐसे केस के 99% मामलों में कोर्ट सरकार द्वारा चार्जशीट फाइल होने तक दी गई धनराशि की कोई रिकवरी नहीं करवाती। उसके लिए आरोपित को बाद में केस फाइल करना होता है, और अधिकांश समय लोग कोर्ट के झंझट में नहीं पड़ना चाहते।
यह केस मोदी एक्ट के सेक्शंस के तहत नहीं होता, वह अन्य IPC/BNS के माध्यम से होगा। यानी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। 3(1)(p), 3(1)(q) या 3(2)(i)–(ii) में स्पष्ट रूप से 'फ़र्ज़ी केस, फ़र्ज़ी साक्ष्य, फ़र्ज़ी सूचना' देने पर आप पर केस बनेगा, लेकिन यह प्रावधान केवल SC/ST लोगों के लिए है, ना कि अन्य भुक्तभोगियों के लिए। और यह मोदी जी ने ही 2015 में संशोधन करके डाला है। यानी, SC/ST पर केस करने के लिए यदि आपने ग़लत सूचना, प्रमाण का प्रयोग किया तो उसे सुरक्षा है, आपको नहीं।
उक्त चटुआ महोदय से आग्रह है कि हमें पुनः वीडियो में जन-गण-मन की धुन बजा कर समझाएँ कि नियम 12(4), 12(7) अथवा किसी अन्य एनेक्सर में 'ऑटोमैटिक रिकवरी' की बात है क्या? साथ ही, यह भी बताएँ कर्नाटक, इलाहाबाद एवं एकाध अन्य हाई कोर्ट के अलावा कुल कितने ऐसे केस हैं जिसमे कोर्ट्स ने ऐसे स्टार्ट-अप योजना के लाभार्थियों से अठन्नी भी वसूली है? आज तक कुल ऐसी रिकवरी 10-20 करोड़ भी नहीं होगी।
आपकी सूचना हेतु बता दूँ कि 8-10% कन्विक्शन रेट वाले इस कानून ने 2018 के बाद से 2024 तक 5.7 लाख लोगों के लिए ₹3650 करोड़ रुपए बाँटे हैं। 2.88 लाख केस पेंडिंग हैं कोर्ट्स में लेकिन पैसे 75% तक दे दिए जाते हैं।
₹3650 करोड़ का आँकड़ा केवल कन्विक्शन के बाद का नहीं है, यह आँकड़ा FIR, चार्जशीट के स्तर तक दी गई 75% धनराशि के साथ है। तो आप स्वयं कैलकुलेट कीजिए कि इसमें कितने हज़ार करोड़ झूठे केस करने वालों को दे दिए गए।
पहले UGC से मार रहे थे,अब SC-ST एक्ट से
एक और नया कांड स्टार्ट किया है
14 साल की SC/ST लड़की खड़ी करो और फेक
पॉस्को केस डाल दो सुवर्णा के ऊपर
संविधान का मिस यूज करना सभी नीले कबूतरों
को चंद्रशेखर रावण ने सिखाया है
ये वीडियो देखो।
ये भाषण नहीं है। ये एक सवर्ण का गुस्सा है, जो सालों से दबता आया है।
पूरी तैयारी की।
CUET में दोस्त से ज़्यादा मार्क्स आए।
फिर रिजल्ट आया — सीट उस दोस्त की हो गई, जिसके नंबर कम थे।
वजह एक कागज़: जाति।
उस पल उसे पहली बार पता चला कि दोस्ती में जाति छिपी हुई थी।
मार्क्स नहीं चले। मेहनत नहीं चली।
चली सिर्फ कैटेगरी।
अब सोचो उस रात का दर्द —
किताबें पूरी, नींद पूरी, फिर भी दरवाज़ा बंद।
और सामने वाला अंदर चला गया, क्योंकि सिस्टम ने जन्म को नंबर से बड़ा मान लिया।
ये लड़की किसी से शादी नहीं मांग रही।
किसी का मंदिर नहीं तोड़ रही।
बोल रही है — जो सच में गरीब है, उसको दो।
मुसलमान हो, नीची जाति हो, कोई हो — जरूरत हो तो दो।
लेकिन जो पहले से आगे निकल चुका है, वो बार-बार उसी कोटे में क्यों बैठे?
पिता घर-घर पूजा करने जाते हैं ताकि दूसरों का भला हो।
घर में रामायण पढ़ती है।
फिर भी उस पर ठप्पा लग जाता है — “सवर्ण संस्कार”, “जातिवादी”।
दर्द ये है:
मेहनत का अपमान।
मेरिट का मजाक।
और एक युवा का ये अहसास कि देश में अंक से पहले सरनेम तौला जाता है।
रिजर्वेशन खत्म करो — ये मांग नहीं।
मांग ये है:
मदद जरूरत से मिले, सिर्फ जन्म से नहीं
क्रीमी लेयर हर वर्ग पर लागू हो
एक परिवार बार-बार न खाए
खाली सीटें मेरिट पर खुलें
व्यवस्था की ईमानदार समीक्षा हो
जो पीछे है, उसे उठाओ।
जो आगे बढ़ चुका है, उसे कोटे का चेहरा मत बनाओ।
और जो लड़की रात भर पढ़कर भी बाहर खड़ी रह गई — उसका दर्द मत हंसाओ।
ये सवर्ण अहंकार नहीं।
ये एक छात्र का टूटना है।
#ReservationReform #NeedBasedNotCasteBased #CUET
बीजेपी से आज के समय में सबसे ज्यादा नफरत उनका खुद का वोटर करता है?? और ये नफरत इतनी हो गई है कि वो लोग अब किसी @BJP4India वाले नेता का चेहरा तक देखना नहीं चाहते!