इलाहबाद में जितने छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं,
उनमें से दस फीसदी के पास भी अपनी
खुद की Bike नहीं होगी,
दाल भात, और सिर्फ आलू का चोखा खाकर उनका दिन, महीना, साल बीत रहा है,
अम्मा, बाबू खेत में खून जलाकर राशन भेजते हैं,
भाई दिल्ली, कलकत्ता, बम्बई की फैक्ट्री में लोहा पीटकर फीस का इंतज़ाम कर रहा है,
भर्तियां आ नहीं रही हैं,
पूर्वांचल, बुंदेलखंड के छात्र लगातार डिप्रेशन का शिकार होते जा रहे हैं,
बड़ी ख़बर—
यूपी PCS रिजल्ट निकलते ही सवालों में घिरा!
आखिर उन "12" का क्या हुआ?
न फ़ाइनल आंसर शीट, न स्कोर कार्ड, न कट ऑफ का पता!
ये कैसा PCS का रिजल्ट दिया?
उन 12 ऑब्जेक्शन पर क्या किया?
PCS के रिजल्ट पर उठे गंभीर सवाल!
पूरी ख़बर @TOPSecret24x7
https://t.co/R97avEVuvG
यदि बच्चे, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करते तो "माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, २००७" के तहत, बच्चों से संपत्ति वापस ली जा सकती है।
इस संबंध में जागरुकता बढ़नी चाहिए।
#Maintenance_and_Welfare_of_Parents_and_Senior_Citizens_Act_2007
प्रिय यंग एम्प्लॉयीज़
जो लोग एम्प्लॉयीज़ को 90 घंटे काम करने की सलाह दे रहे हैं कहीं वो इंसान की जगह रोबोट की बात तो नहीं कर रहे हैं क्योंकि इंसान तो जज़्बात और परिवार के साथ जीना चाहता है।
और आम जनता का सवाल ये भी है कि जब अर्थव्यवस्था की प्रगति का फ़ायदा कुछ गिने चुने लोगों को ही मिलना है तो ऐसी 30 ट्रिलियन की इकोनॉमी हो जाए या 100 ट्रिलियन की, जनता को उससे क्या। सच्चा आर्थिक न्याय तो यही कहता है कि समृद्धि का लाभ सबको बराबर से मिले, लेकिन भाजपा सरकार में तो ये संभव ही नहीं है।
साथ ही सलाह देनेवाले भूल गये कि मनोरंजन और फ़िल्म उद्योग भी अरबों रुपए इकोनॉमी में जोड़ता है। ये लोग शायद नहीं जानते हैं कि एंटरटेनमेंट से लोग रिफ़्रेश्ड, रिवाइव्ड और री-एनर्जाइज़्ड फ़ील करते हैं, जिससे वर्किंग क्वॉलिटी बेटर होती है।
ये लोग न भूलें कि युवाओं के सिर्फ़ हाथ-पैर या शरीर नहीं, एक दिल भी होता है जो खुलकर जीना चाहता है और बात घंटों काम करने की नहीं होती बल्कि दिल लगाकर काम करने की होती है।क्वांटिटी नहीं, क्वॉलिटी ऑफ़ वर्क सबसे ज़रूरी होता है। सच तो ये है कि युवाओं की रात-दिन की मेहनत का सबसे ज़्यादा लाभ सबसे ऊपर बैठे हुए लोगों को बैठे-बिठाए मिलता है, इसीलिए ऐसे कुछ लोग ‘90 घंटे काम करने’ जैसी इंप्रैक्टिकल सलाह देते हैं। आज जो लोग युवाओं को ये सलाह दे रहे हैं, वो दिल पर हाथ रखकर बताएं कि ये विचार उन्हें तब आया था क्या जब वो युवा थे और आया भी था और उन्होंने अपने समय में अगर 90 घंटे काम किया भी था तो फिर आज हम इतने कम ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी तक ही क्यों पहुँचे।
वर्क एंड लाइफ़ का बैलेंस ही मानसिक रूप से एक ऐसा स्वस्थ वातावरण बना सकता है, जहाँ युवा क्रिएटिव और प्रॉडक्टिव होकर सही मायने में देश और दुनिया को और बेहतर बना सकते हैं।
अगर भाजपाई भ्रष्टाचार ही आधा भी कम हो जाए तो अर्थव्यवस्था अपने आप दुगनी हो जाएगी। जिसकी नाव में छेद हो उसकी तैरने की सलाह का कोई मतलब नहीं।
आपका
अखिलेश
उत्तर प्रदेश विधानमंडल में 2020-21 के लिए प्रशासनिक पदों की भर्ती प्रक्रिया को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा "चौंकाने वाला घोटाला" करार दिया जाना, भ्रष्ट योगी सरकार के लिए करारा तमाचा है।
इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में, हर पाँचवे उम्मीदवार का किसी न किसी अधिकारी या नेता से करीबी संबंध होना, उन उम्मीदवारों की उम्मीदों को ठेस पहुंचना है, जो अपनी मेहनत और परिवार के भरण-पोषण के लिए सरकारी नौकरी की तलाश में थे। यह सरकार पर गंभीर सवाल उठाता है कि वह किसके लिए काम कर रही है? आम जनता के लिए या अपने करीबी अधिकारियों और नेताओं के लिए?
रामभद्राचार्य द्वारा माननीय विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना जी से अपने चेले को नौकरी देने की बात क्या इसी घोटाले की बानगी है?
भाजपाई "बटोंगे तो कटोंगे" का नारा देकर आम जनता को तो बाँट रहे हैं और सरकारी नौकरियाँ अपने परिवार और रिश्तेदारों को बाँट रहे हैं।
योगी सरकार ने 'भाई-भतीजावाद' के साथ ही जातिवाद का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है, और इसने मेहनती युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का रास्ता और कठिन बना दिया है।
जब इसके विरोध में युवा सड़क पर उतरता है तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं? क्या यही है भाजपा का 'मिशन रोजगार'?
#UPRecruitmentScam #भ्रष्टाचार
यूपी में भ्रष्टाचार की पोल एक के बाद एक खुलती जा रही है.
यूपी के RO/ARO भर्ती में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. 38 अधिकारी, मंत्री, सचिवों के बेटे-बेटियां, एग्जाम एजेंसी के मालिक की पत्नी भी RO बनी. हाईकोर्ट ने इस भर्ती घोटाले की जांच के आदेश CBI को दिए हैं.
क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा भर्ती में भी धांधली?
2020-21 में भर्ती आई. 186 पद. 2.5 लाख आवेदन.
नियुक्ति मिली तो पता चला कि रिश्तेदारों का भंडारा हो गया. हर पांचवें पद पर किसी नेता, अधिकारी के रिश्तेदार का सेलेक्शन हुआ है.
@RTIExpress सर ने अपनी रिपोर्ट में धागा खोल दिया है. सब नेताओं अधिकारियों के नाम लिखे हैं. अब देखने वाली बात ये है कि मामला भाषणों वाले जीरो टॉलरेंस से आगे बढ़ता है या नहीं?