उम्मीद है जल्द ही देविका रानी और उनके गाँव के हज़ारों लोगों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव आएगा।
क्योंकि लालार गाँव में ₹36.42 करोड़ की लागत से एक पुल बनने वाला है...
सुनिए पन्ना के विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने NewsPotli से क्या कहा...
हर बारिश के मौसम में मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का ललार गांव दुनिया से कट जाता है..
केन नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का इकलौता रास्ता पानी में डूब जाता है. करीब 1,500 से 2,000 लोगों की पढ़ाई, इलाज, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी कई महीनों तक प्रभावित रहती है..अब गांव के लिए उम्मीद की किरण जगी है.
पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने NewsPotli को बताया कि यहां ₹36.42 करोड़ की लागत से पुल बनाया जाएगा.. अगर यह पुल बनता है, तो यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि गांव की जिंदगी बदलने वाला रास्ता साबित होगा..
न्यूज पोटली ने ललार गांव की समस्या को प्रमुखता से उठाया था पूरी ग्राउंड रिपोर्ट #NewsPotli के YouTube चैनल पर देखिए - https://t.co/eF3SBgPyEp
#madhyapradesh #panna #bridge @Mithileshdhar
अगर आज आपको पैसों की जरूरत पड़ जाए और आपके सामने तीन विकल्प हों— बैंक, साहूकार और रिश्तेदार... तो आप किससे उधार लेना पसंद करेंगे?
NABARD की ताजा रिपोर्ट में गांवों की अर्थव्यवस्था, बचत, कर्ज और लोगों की आर्थिक स्थिति को लेकर कई बड़े खुलासे किए गए हैं।
देखिए..
क्या भारत के गांव आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं?
ग्रामीण परिवारों की बचत क्यों घट रही है? आखिर गांव के लोग बैंकों की बजाय रिश्तेदारों और साहूकारों से कर्ज लेना क्यों पसंद कर रहे हैं?
NABARD की ताजा रिपोर्ट में ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
पूरी रिपोर्ट देखें..👇
https://t.co/uHZ4wsZ8fe
#NewsPotli #ruraleconomy @NABARDOnline
अगर सरकार दलहन उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है, तो PM-AASHA योजना में तुअर, उड़द और मसूर की तरह मूंग और अन्य दलहनों को भी 100% MSP पर खरीद के दायरे में क्यों नहीं शामिल करती?
@ChouhanShivraj@CMMadhyaPradesh
मूंग की 100% MSP पर खरीदी, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सरल व पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा और उससे जुड़े किसान संगठन नर्मदापुरम से भोपाल तक पदयात्रा कर रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीदी उनकी पूरी उपज की नहीं हो रही, जिससे उन्हें मजबूरी में फसल कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। वहीं किसान नेताओं ने कहा कि पदयात्रा में शामिल होने जा रहे किसानों को कई जगह पुलिस रोक रही है। इसके बावजूद उनका कहना है कि आंदोलन जारी रहेगा।
#NewsPotli #madhyapradesh #moong #MSP
" सबसे बड़ी बात है कि घर से आने-जाने के लिए ...घर से निकलने के लिए ही कोई सुविधा नहीं है..घर से जैसे ही निकलो तो घुटनों तक पानी रहता है....."
मध्य प्रदेश का पन्ना जिला जो पूरी दुनिया में हीरे के लिए जाना जाता है. इसी जिले में इसके मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर ललार गांव को हर साल 4 से 5 महीने एक तरह के कैद में में रहना पड़ता है. कैद इसलिए क्योंकि केन नदी के किनारे बसा यह गांव नदी में पानी बढ़ने की वजह से शहर से कट जाता है..
पूरी रिपोर्ट देखिए... https://t.co/Xh4zZ9RjBp
#NewsPotli #madhyapradesh #panna @DrMohanYadav51@CMMadhyaPradesh@JansamparkMP@CollectorPanna@ChouhanShivraj@ks_chauhan23
विकासशील भारत की एक तस्वीर...
राज्य- मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री- @DrMohanYadav51
जिला- पन्ना
गांव- ललार
सुविधाएं- न सड़क, न शिक्षा, न रोजगार, न इलाज... यहां के युवाओं की शादियां तक नहीं हो पातीं... सबसे बड़ी समस्या यह है कि मानसून के दौरान यह गांव 3 से 4 महीने तक देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाता है.
रिपोर्ट- @Mithileshdhar
Video - https://t.co/ROlDC5gyHr
'कोई भी सुविधा नहीं है... पीछे जंगल है, आगे नदी है और नदी में एक नाव है बस...'
आज़ादी के इतने सालों बाद भी मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के ललार गांव के लोग ऐसी ज़िंदगी जीने को मजबूर हैं..
पूरी रिपोर्ट देखिए... और इसे ज़िम्मेदारों तक ज़रूर पहुंचाइए..
@DrMohanYadav51
इस तस्वीर में जो बटन, फोटोफ्रेम और तरह-तरह के सजावटी सामान आप देख रहे हैं, ये सभी मरे हुए भैंसों की सींगों से बनाए गए हैं..
उत्तर प्रदेश के संभल में सींगों से बना यह काम “कचरे से कमाई” का शानदार उदाहरण है. अच्छी बात यह है कि ये उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं और मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि समय के साथ खुद ही गलकर मिट्टी में मिल जाते हैं. यहां की सदियों पुरानी कला, जिसे स्थानीय भाषा में ‘सींग का काम’ कहा जाता है, अब गांव की गलियों से निकलकर दुनियाभर के बाजारों तक पहुंच चुकी है.
आज संभल के ये उत्पाद अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में निर्यात हो रहे हैं। सरकार की ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना के तहत भी इस कला को बढ़ावा मिल रहा है. यह न सिर्फ परंपरा को बचा रही है, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही है.
आखिर कैसे बनते हैं ये अनोखे उत्पाद? पूरी प्रक्रिया जानने के लिए यहां देखें—https://t.co/As9k8UI7Bh
#NewsPotli #uttarpradesh #organicproducts
यह वीडियो मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की इच्छावर तहसील के बालोंदिया गांव की है।
आपको बता दें कि जल जीवन मिशन की वेबसाइट के मुताबिक यहां 163 परिवार रहते हैं।
रिकॉर्ड में 2021 में 4 परिवारों को FHTC (हर घर नल कनेक्शन) दिए जा चुके हैं , लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गांव में एक भी घर तक नल का कनेक्शन नहीं पहुंचा है।
एक और ख़ास बात यह गांव DA-JGUA के तहत चिन्हित है। 2 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘धरती आभा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हजारों जनजातीय गांवों में बुनियादी सुविधाएं....जैसे पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में सुधारना करना है।
लेकिन बामलदड़ जैसे गांवों की स्थिति बताती है कि योजनाओं के दावे और जमीनी सच्चाई के बीच अभी भी बड़ा अंतर है, और लोगों का संघर्ष अब भी जारी है।
पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें - https://t.co/zJEFNkoaB2
रिपोर्ट -@Jay_Misra
एडिट - @srivastavam4686
#NewsPotli #Madhyapradesh #tribalpeople
@BJP4MP@GovernorMP@CMMadhyaPradesh@PMOIndia@TribalArmy@HansrajMeena
Two years ago, in April 2024, I shot this video of 7-year-old Sandhya fetching water from this very well exactly two years ago.
Today, in 2026, two years have passed, but the situation in Balondiya village of Ichhawar tehsil in Sehore district, Madhya Pradesh, remains unchanged.
Watch my ground report from the tribal villages of Madhya Pradesh.
Link: https://t.co/6ZpSPvMWIv
@PotliNews@DrMohanYadav51 #MadhyaPradesh #jaljeevanmission
क्या किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्यों न MSP तय करने के लिए C2 फॉर्मूला अपनाया जाए.
इस बुलेटिन में हम समझेंगे कि A2+FL और C2 में क्या अंतर है और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें क्या कहती हैं?
न्यूज पोटली के इस साप्ताहिक एग्री बुलेटिन में हम इसपर विस्तार से बात करेंगे...
इसके अलावा महाराष्ट्र प्याज संकट, हरियाणा किसानों को गेहूं खरीद के नियमों में केंद्र की बड़ी ढील, MP में सैटेलाइट सर्वे का 'खलनायक' अवतार और साथ में मौसम के हाल पर भी बात होगी...
पूरी बुलेटिन यहाँ देखें - https://t.co/8t4xmUiSSI
#NewsPotli #agribulletin @Mithileshdhar #MaharashtraThisWeek #MSP #supremecourt #haryana #weatherupdate
एक तरफ है बिहार का जिला रोहतास और दूसरी तरफ है झारखंड का पलामू जिला… बीच में बहती है सोन नदी… और इनके बीच पिस रहे हैं दोनों तरफ रहने वाले लोग.
आपको बता दें कि बिहार से झारखंड जाने के लिए लोग पहले ट्रैक्टर से लगभग 4 से 5 किलोमीटर का सफर तय करके सोन नदी के किनारे पहुंचते हैं..आप वीडियो में देख सकते हैं कि यह सफर कितना खतरनाक और जोखिम भरा है. फिर वहां से नाव के सहारे नदी पार करके झारखंड के पलामू पहुंचते हैं.
अब सवाल यह है कि जिस देश में बुलेट ट्रेन की बात हो रही है, एशिया के बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होने जा रहा जेवर एयरपोर्ट बन रहा है, आधुनिक मेट्रो और बस स्टेशन तैयार हो रहे हैं… उसी देश में कुछ लोग आज भी ऐसे जोखिम भरे सफर करने को मजबूर हैं.
पूरी रिपोर्ट आप यहाँ देखिए - https://t.co/nxbXUvezIl
@BJP4Bihar@samrat4bjp@NitishKumar@HemantSorenJMM@RanchiPIB@JharkhandCMO@BJP4Jharkhand@JmmJharkhand@officecmbihar@RohtasDistrict@DC_Palamu@jmm_palamu@nitin_gadkari@PMOIndia@iChiragPaswan@yadavtejashwi #NewsPotli #bihar #jharkhand #groundreport
ट्रैक्टर की सवारी…🚜
आपके हिसाब से ट्रैक्टर पर ज्यादा से ज्यादा कितने लोग बैठ सकते हैं...पांच, दस, पंद्रह या इससे भी ज्यादा?
यहां देखिए, इस जुगाड़ू ट्रैक्टर पर 35 से 40 लोग सवार हैं.. और यह कोई एक-दो किलोमीटर का सफर नहीं, बल्कि 7 से 8 किलोमीटर का सफर तय करते हैं, वह भी बलुई मिट्टी में.. यह कोई एडवेंचर नहीं, बल्कि यह इनकी मजबूरी है.
झारखंड-बिहार सीमा पर सोन नदी किनारे रहने वाले लोग सालों से ऐसे ही मुश्किल हालात में जी रहे हैं.
देखिए पूरी रिपोर्ट - https://t.co/bQQSfEUIzR
#NewsPotli #bihar #jharkhand #tractor #sonriver
रोज़ करीब 5 किलोमीटर दूर से सब्ज़ी बेचने के लिए सोन नदी के इस पार से उस पार जाना… सिर्फ इसलिए कि कुछ कमाई हो सके और रोज़ी-रोटी चल सके.
सोचिए, इस इलाके के लोग कितनी मुश्किल ज़िंदगी जी रहे हैं.
पूरी रिपोर्ट #NewsPotli के YouTube चैनल पर देखें
एक सफर ऐसा भी…
यह सफर झारखंड और बिहार के बॉर्डर का है। एक तरफ बिहार का रोहतास जिला है, तो दूसरी ओर झारखंड का पलामू जिला, और दोनों के बीच बहती है सोन नदी। लेकिन नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला पुल काफी दूर है, इसलिए लोगों को इस पार से उस पार जाने के लिए लंबा और जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है।
इसका असर यहां के लोगों की पढ़ाई-लिखाई, शादी-ब्याह, इलाज और रोजमर्रा की ज़िंदगी पर साफ दिखता है। लोग लगातार अपने मंत्री और विधायक से सड़क और पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है।
आप खुद देखिए #NewsPotli का यह ग्राउंड रिपोर्ट @AShukkla के साथ.
पूरी रिपोर्ट यहां देखें - https://t.co/eviPKpBmtq
#BiharGovernment #jharkhand #GroundReality @samrat4bjp@HemantSorenJMM@BJP4Bihar@JharkhandCMO
लखनऊ के विकासनगर में बुधवार शाम 5:30 बजे भीषण आग लगी। 30 से ज्यादा सिलेंडर फटे, 250 से ज्यादा झुग्गियां जलकर राख हो गईं। 20 घर खाली कराए गए। 20 दमकल गाड़ियों ने 3 घंटे में आग पर काबू पाया। ये तस्वीरें आग बुझने के बाद की हैं। तस्वीरें तबाही का मंजर बयां कर रही हैं।
"हमारे पास कुल एक एकड़ जमीन है.. हम साल भर में 10–12 फसलें ले लेते हैं..हम गेहूं, गन्ना और धान की खेती नहीं करते, फिर भी एक साल में 2.5 से 3 लाख रुपये कमा लेते हैं. "
यह कहना है उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के किसान इंद्रजीत मौर्य का, जो देश के उन 86 प्रतिशत किसानों में शामिल हैं, जिनके पास एक या डेढ़ एकड़ जमीन होती है.
इंद्रजीत मौर्य अपनी खेती में हर वो तरीके अपनाते हैं, जिससे लागत कम किया जा सके...जैसे हैंडमेड पॉलीहाउस, मल्टीलेयर फार्मिंग, मल्चिंग और कम लागत में जुगाड़ से बनाए गए मचान. वे अपने खेतों में गौमूत्र से बने कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं.. सर्दियों में बेहतर अंकुरण के लिए वे खुद पॉलीहाउस तैयार करते हैं.
इतना ही नहीं तकनीक के साथ-साथ उनकी मार्केटिंग भी खास है. ज्यादा मुनाफे के लिए वे सब्जियों की अगैती खेती करते हैं..न्यूज़ पोटली से बातचीत में उन्होंने बताया कि वे खीरे की तुड़ाई सुबह करीब 3 बजे करते हैं, जिससे उन्हें बाजार में 3-4 रुपये तक ज्यादा दाम मिल जाता है.
देखिए वीडियो- https://t.co/48VWiK0dN0
अब सवाल यह है कि अगर आप एक या डेढ़ एकड़ में धान, गेहूं और गन्ने की पारंपरिक खेती करते हैं, तो साल भर में कितनी कमाई हो पाती है?
कमेंट में बताइए......
#NewsPotli #farming #kisan #uttarpradesh #marginalfarmers #marketingtips #vegetables
किसानों को मुफ्त में खेती की सलाह देकर 7-8 करोड़ का टर्नओवर, मध्यप्रदेश के युवा किसान स्वप्निल चौधरी, बुरहानपुर में किसानों के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं। MNC की नौकरी छोड़कर किसानी शुरू की, आज खेती और उससे जुड़े बिजनेस से वो करोड़ों का कारोबार कर रहे। अपनी सैलरी से कई गुना ज्यादा बचा रहे।
#NewsPotli की #takniksetarakki सीरीज में देखिए
कैसे किसान ने इतना बड़ा बिजनेस खड़ा किया?
किस फसल की खेती से उन्हें ये मुकाम हासिल हुआ?
वो तरीका जिससे दूसरे किसान की ज़िंदगी में भी तरक्की आ सकती है?
वीडियो देखिए - https://t.co/6kjrtBSPGB
#NewsPotli #madhyapradesh #dripirrigation #agripreneur @minmpkrishi@ChouhanShivraj@JainIrrigation@Anil_JISL@DrMohanYadav51
इस वीडियो में जानिए केले की खेती का पूरा हिसाब-किताब और एक ऐसे किसान की कहानी, जिसने कर्ज से निकलकर सफलता हासिल की.. मध्य प्रदेश के धार के किसान गौरव मंषाराम जाट पर कभी 20 लाख रुपये का कर्ज था, लेकिन आज वे वैज्ञानिक तरीके और एक्सपोर्ट पर फोकस करके करोड़ों का टर्नओवर कर रहे हैं.
आपको बता दें कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक है, लेकिन इसका बहुत कम हिस्सा ही निर्यात होता है..ऐसे में किसान अपनी कमाई कैसे बढ़ाएं? यह भी इस वीडियो में समझाया गया है...
केला लगाने से लेकर एक्सपोर्ट क्वालिटी उत्पादन तक की पूरी जानकारी दी गई है... और बताया गया है कि ज्यादा उत्पादन नहीं, बल्कि अच्छी क्वालिटी पर ध्यान देकर प्रति एकड़ ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है..
देखिए वीडियो- https://t.co/YmnPJob2d0
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किन्नू की मांग भारत में तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ इसकी खेती भी लगातार बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 4.73 लाख हेक्टेयर में किन्नू उगाया जाता है, जिसमें पंजाब और हरियाणा का बड़ा हिस्सा है..
यह फसल यहां इसलिए ज्यादा पसंद की जा रही है क्योंकि यह मौसम के हिसाब से फिट बैठती है, कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है और धान-गेहूं से ज्यादा मुनाफा देती है.
इस वीडियो में मिलिए हरियाणा के सिरसा के किसान रोहित विश्नोई से, जिन्होंने किन्नू के साथ तरबूज की सहफसली शुरू की और आज इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं..
वीडियो लिंक - https://t.co/jJ4FnTCzYP
रिपोर्ट- @mohdjalish
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