Biggest L of Hindus:
1. पशु बलि को जीव हिंसा की श्रेणी में रखना।
२. वेदलाक्षण गौओं को जेनेटिकली मॉडिफाई होने देना।
३. गायों का नगर में पन्नी कूड़ा खाने देना।
४. संध्या पूजन गायत्री संस्कार आदि का त्याग।
४. स्त्रियों की नग्नता और चरित्रहीनता को प्रोत्साहन
हिंदुओं ने पांच सौ साल राम मंदिर बनाने के लिए संघर्ष किया , अब अगले पचास साल इसे लालचियों से मुक्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
सरकार को दोष देना बंद कीजिए। राम मंदिर की चोरी के लिए जनता जिम्मेदार है।
जनता चोर का समर्थन कर रही है और अपने प्रिय नेता के चरण चाटने के लिए मंदिर का और शंकराचार्य का अपमान कर रही है।
चारों शंकराचार्यों की अध्यक्षता में नए मंदिर ट्रस्ट का गठन हो। पुराने ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को अकेले नज़रबंद करके, उनके कम्युनिकेशन डिवाइसेज़ जब्त करके CBI द्वारा जांच हो जिसका प्रतिदिन का progress बुलेटिन मीडिया को सार्वजनिक किया जाए। दोषियों को सश्रम कारावास की सजा मिले।
जनता नेता को मालिक मान बैठी है जबकि लोकतंत्र में असली मालिक जनता होती है, सांसद -विधायक - मंत्री बस जनता के नौकर होते हैं।
जनता अपने नौकरों से काम नहीं ले पा रही है।
देखिए और सुनिए राम मंदिर पर मेरा विमर्श।
मुसलमानों में वजू, परिक्रमा, काबा में सिला वस्त्र नहीं पहनना, माला जाप, पाँच समय उपासना, मदरसा की रीति कहाँ से आई? हिन्दुओं से।
इतना ही नहीं, हिजाब (पर्दा) भी हिन्दुओं से सीखा अन्यथा विशेषज्ञ बताते हैं कि अरब में उस समय जहालत थी।
हिन्दुओं की हर रीति में संशोधन करके अपनाया है।
It is not the first time when Hanuman Ji has been made of by the Party involved, they made a kite of his Swaroop. It’s well known they don’t take Gods Swaroop seriously, they are atheist and use them as prop but demeaning Hanuman ji twice?
हनुमान जी को अपने आगे नचा रहे हैं , जैसे गब्बर ने बसंती को नचाया था।
लेकिन अंग्रेजों के परम मित्र आंबेडकर जी के सामने झुक कर नतमस्तक हो रहे हैं।
ब्राह्मण इनकी विष्ठा के लड्डू खाकर प्रसन्न होकर अपने शंकराचार्य को गरिया रहा है।
ये सब ना बीजेपी की गलती है ना किसी अन्य की।
इसमें मोदी जी को दोष देना बंद कीजिए।
सब कलयुग का प्रभाव है।
नारायण नारायण !!!
भारत की स्वतंत्रता के समय भी पंडितों पर दबाव डालकर मुहूर्त निकलवाया गया था। यह सार्वजनिक तथ्य है।
उन दिनों इस निमित्त अशुभ काल था परन्तु ब्राह्मणों को बाध्य किया गया तब उन्होंने थोड़ा उत्तम घंटेभर का समय दिया जिसमें भारत को स्वतंत्र घोषित किया गया।
पूज्य नृत्य गोपाल दास जी महाराज के पुराने समाचार कोई साझा करें। हमें मिल नहीं रहे हैं।
उन्होंने श्रीराम मंदिर बनने के पश्चात कार्य एवं व्यवस्था को लेकर चिंता प्रकट की थी, समाचार में आया था। उसके पश्चात एक दिन समाचार आया कि उनपर मीडिया से संवाद करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
ऐसा नहीं है कि स्त्रीयाँ ही दोषी है, अभी एक व्यक्ति की जानकारी मिली है, विश्वस्त सूत्रों से। व्यक्ति अपने स्वभाव से कुटिल था, पर बहुत महीन।वह विवाह तोड़ता अधिक अमीर लड़की प्राप्त करने के लिए। सीधी लड़की ही उसका शिकार हुई।
सड़ी हुई कानून व्यवस्था के शिकार हुए भरत तिवारी के समर्थन में बोलते हुए जगद्गुरु स्वामी श्री निग्रहाचार्य जी महाराज ने सड़ी हुई कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई और कई गंभीर सवाल भी उठाये, उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून का पालन पुलिस खुद नहीं कर रही है । कानून व्यवस्था के पालन की जिम्मेदारी सिर्फ आम जनता की है क्या ??
#निग्रहाचार्य #Nigrahacharya #Jagadguru
यद्यपि अब महानगरों की विवाहित नारियों में बिंदी का प्रचलन कम हो गया है, पर रामायण काल में उनकी शोभा माथे पर सिंदूरी बिंदी लगाने से ही होती थी।
Although urban married women are now rarely seen with a sindūr bindi, during Rāmāyaṇan era it was recognised as enhancing their grace.
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर में मर्यादा का उल्लंघन हुआ। मान्य संन्यासी, संत, आचार्य बाहर बैठे ताली बजाते रहे और प्रधानमंत्री जी गर्भगृह में प्रवेश कर सरकारी योजना के पत्थर की भांति लोकार्पण कर रहे थे।
मंदिरों में प्रतिष्ठित विग्रह भले ही चलें-बोलें नहीं परन्तु उनसे बड़ी परिधि में धर्म सुरक्षित रहता है।
प्राणविहीन मूर्तियों को पूजने के कारण Pagan और Buddhist नष्ट हो गए। मूर्तिपूजा में प्रमाद उचित नहीं है।
Captain Shubham Gupta, 9 PARA SF.
Even after his heartbeat stopped, his fingers didn't leave the trigger mode.
You can't do much for him,
Just Be the Indian worth dying for.
कोई आपकी प्यास बुझाने के लिए पानी पिला सकता है परन्तु पानी बन नहीं सकता। ईश्वर से बड़ा सेवक कोई नहीं है। वह आपके लिए पानी बन गया, अन्न बन गया, सब कुछ बन गया। ईश्वर आपके देह का इतना ऊँचा सेवक है।
यह सब क्यों? आत्मस्वरूप को जान सकें, तृप्त होकर भजन कर सकें, ईश्वर से प्रेम कर सकें।
लोग कहते हैं कि ईश्वर कैसा निर्दयी है जो नवजात को रोग देता है, किसी को दरिद्र बनाता है इत्यादि।
वास्तव में वह एक ईश्वर ही है। रोगी के रूप में ईश्वर कष्ट सहता है, दरिद्र के रूप में ईश्वर भूखा रहता है। हर रूप में एकमात्र ईश्वर व्यक्त है, यह जगत ईश्वरनिरपेक्ष नहीं है।
श्रीमद्भागवत के अनुसार वेदों में स्पष्टतः सगुण ब्रह्म का ही निरूपण किया है, यद्यपि वेद इस माध्यम से निर्गुण ब्रह्म तक पहुँचने का प्रयत्न करते हैं।
Srīmadbhāgwat confirms that Veda-s describe Saguṇa Brahma only - though it culminates in Nirguṇa Brahma.
२/३
क्या श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट जो जमीनें 8 गुना दाम देकर खरीद लिया करती थी उसके लिए ट्रस्ट के एकाउंट से पैसा चंपत राय जी अकेले निकाल सकते थे क्या? जमीन खरीदने का प्रस्ताव तो Board of Trustees में रखकर अनुमोदन कराना पड़ता होगा ना? भवन निर्माण के इंचार्ज नृपेंद्र मिश्र जी बताते होंगे ना कि खरीदी जा रही जमीन भवन निर्माण के काम की है या नहीं? 20-22 करोड़ के पेमेंट करने के लिए कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से भी अनुमति लेनी पड़ती होगी ना? सिर्फ भवन निर्माण का काम देखने वाले नृपेंद्र मिश्र जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है उसका तो पता रखते होंगे ना?
प्रेस विज्ञप्ति: गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) —
बरेली में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत
*‘देवी रूप में “भारत माता” का विकास वेद, पुराण, रामायण या महाभारत में नहीं — नए प्रतीक गढ़े जा रहे हैं’*
*‘दो तरह के हिन्दू: एक वेद-शास्त्र-गुरु को मानने वाले, दूसरे नए-नए भगवान गढ़ने वाले’*
*‘रोक-टोक रहित धर्म एक license है जो समाज को नीचे गिराता है’*
*‘सच्ची भारत माता भूमि है — और उसका चल रूप गौमाता है’*
*‘गाय भाईचारे की माता है, विधानसभा प्रतिनिधि नियुक्त हुए — हिन्दू और मुसलमान दोनों की’ “पशु” शब्द कभी रक्षण के लिए था — आज विश्व के सामने अपमान बनकर दिखाया जा रहा है’*
जिला: बरेली, उत्तर प्रदेश |
मूल मंत्र: "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ"
*"देवी रूप में भारत माता किसी वेद, किसी पुराण, किसी रामायण या महाभारत में नहीं है — नए प्रतीक गढ़े जा रहे हैं। सच्ची भारत माता तो भूमि ही है, और उसी भूमि का चल रूप गौमाता है।" — ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’*
बरेली में ऐतिहासिक 81 दिवसीय 'गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)' (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’ ने सामूहिक संकल्प कराया। बरेली जनपद में जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" के साथ गौ रक्षा का संकल्प लिया।
‘देवी रूप में “भारत माता” का विकास वेद, पुराण, रामायण या महाभारत में नहीं — नए प्रतीक गढ़े जा रहे हैं’
महाराजश्री ने प्रसारित किए जा रहे एक चित्र की ओर ध्यान दिलाया — एक शेर, और उसके सामने भारतीय परिवेश में एक स्त्रीस्वरूप, जिसके हाथ में डंडा और उस पर झंडा, "देवी भारत माता" के रूप में प्रस्तुत है। ऐसी देवी-रूप भारत माता, उन्होंने कहा, कहीं नहीं आती — न वेद में, न पुराण में, न रामायण-महाभारत में, न किसी शास्त्र में। फिर भी यदि यह जनता के सामने रखा जा रहा है, उन्होंने कहा, तो इसका अर्थ है कि नए प्रतीक गढ़े जा रहे हैं और नई उपास्य वस्तुएं स्थापित की जा रही हैं — और कल्पना से प्रसूत किसी देवता में, उन्होंने पूछा, कौन सी शक्ति होगी?
‘दो तरह के हिन्दू — एक वेद, शास्त्र और गुरु को मानने वाले, दूसरे नए-नए भगवान गढ़ने वाले’
महाराजश्री ने दो प्रकार के हिन्दू बताए। एक, उन्होंने कहा, वेद-शास्त्र प्रमाण और ऋषियों को मानने वाले, जिन्होंने बिना पक्षपात, जन-जन के वर्ण से जीवन चलाते हुए कल्याण के लिए मार्ग बताया — और उसी उचित मार्ग पर चल कर हमारे पूर्वजों ने कल्याण पाया। दूसरे न वेद मानते हैं, न शास्त्र, न गुरु, न चरित्र, और नए-नए भगवान गढ़ते रहते हैं; ऐसे नए हिन्दुओं द्वारा, उन्होंने कहा, कल्पित भारत माता तथा नए-नए शक्तिपीठ और देवता खड़े किए जा रहे हैं — एक नया धर्म चुपचाप खड़ा किया जा रहा है और जनता धीरे-धीरे उसमें खींची जा रही है।
‘रोक-टोक रहित धर्म एक license है जो समाज को नीचे गिराता है’
पुराना धर्म, महाराजश्री ने कहा, रोक-टोक से भरा है — यह करो, यह मत करो, छोटी-छोटी बातों में भी अनुशासन; जो नया धर्म लाया जा रहा है उसमें कोई रोक-टोक नहीं — जैसे चाहो रहो, यहाँ तक कि चरित्र रक्षा की भी आवश्यकता नहीं। धर्म के नाम पर मिला ऐसा license, उन्होंने कहा, समाज को ऊपर नहीं, नीचे ही गिरा सकता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों ने, और पहले भारतीय संविधान ने भी, समलैंगिक संबंधों को अपराध माना था, जिसे अब अपराध-मुक्त कर दिया गया है, और विवाह तथा संबंधों संबंधी कानूनों में भी इस देश में परिवर्तन हुए हैं — उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे मार्ग से भारतीय संस्कृति उन्नत होगी या पतित?
‘सच्ची भारत माता भूमि है — और उसका चल रूप गौमाता है’
सच्ची भारत माता, महाराजश्री ने समझाया, भूमि है — धरती है — जो हम सबको एक समान भूमि से जोड़ती है और जिसे हमारी परंपरा सदा माता मानती आई है। जैसे भगवान कृष्ण के दो रूप हैं, चल और अचल — अचल मंदिर में विराजमान, चल संन्यासी रूप में घर-घर विचरण करता हुआ — वैसे ही धरती माता के दो रूप हैं: अचल रूप धरती है, और उसका चल रूप गौमाता है। जब धरती पर अत्याचार असह्य हो गया, उन्होंने सुनाया, तब भूमि ने गाय का रूप धारण कर अपनी पीड़ित संतानों की पुकार लेकर प्रभु के पास जाकर निवेदन किया; भूमि गाय है, सच्ची भारत माता है — कल्पना से गढ़ी हुई आकृति नहीं।
समझ नहीं आता अधिकांश हिंदुओं को यह छोटी सी बात समझ क्यों नहीं आती.?
आंध्र प्रदेश के देवस्थानम मंत्री ए. रामनारायण रेड्डी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के 'श्रीवाणी ट्रस्ट' के फंड का उपयोग शिरडी साईं बाबा के मंदिरों के निर्माण के लिए नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने इसके पीछे का धार्मिक कारण बताते हुए कहा कि प्राचीन हिंदू शास्त्रों और वैदिक ग्रंथों में शिरडी साईं बाबा का उल्लेख आदि देवताओं के रूप में नहीं है। 'श्रीवाणी ट्रस्ट' विशेष रूप से पूरे भारत में भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के मंदिरों के निर्माण और उनके रखरखाव के लिए समर्पित है, इसलिए इसका पैसा तय मानकों के अनुसार ही खर्च होगा।