देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी अपने शीर्ष नेतृत्व के दिये गये आश्वासन की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। अब क्या ये भी डबल इंजन की टकराहट के कारण हो रहा है।
तुरंत गिरफ़्तारी हो!
भाजपाई तो अपने वचन के भी सगे नहीं हैं।
भरोसे का विलोम भाजपा!
UGC नियमों से समस्याएँ:
१. कैम्पस में पुलिस का इन्वॉल्वमेंट पूरे कॉलेज परिसर को एक एक्टिव क्राइम सीन बना देता है। बच्चे हँसी-मजाक तक करने से कतराएँगे। जहाँ कॉलेज प्रशासन का मुख्य ध्येय, किसी कथित अपराध पर (जो जघन्य/हिंसक न हो), बच्चों को पंद्रह दिन का निलंबन जैसा होता है, वहाँ अब पुलिस को घुसेड़ा जा रहा है। इंटेंट में ही दोष है कि कोई भेदभावपूर्ण टिप्पणी एक गंभीर अपराध माना जा रहा है। हालाँकि ब्राह्मणों की कब्र खोदने और चार जूते मारना आज तक अपराध नहीं बना और कॉलेज में जाति पूछने वाले स्वघोषित प्रोफेसर सरकार के सलाहकार हैं।
२. कॉलेज में बच्चे स्कूल के यूनिफ़ॉर्म युग से बाहर आ कर, स्वच्छंदता का अनुभव करते हैं। यह उनके लिए स्वयं को अभिव्यक्त करने का पहला मुक्त अवसर होता है। इन नियमों ने बच्चों के बोलने, उपहास, व्यंग्य आदि को प्रभावी रूप से सीमित कर दिया है।
३. यह जातिवादी छात्र संगठनों के लिए द्वेष आधारित निशानदेही और केस करने का एक मार्ग बन जाएगा। जो अभी ‘जूते चार’ की डफली पीट रहे हैं, वो ऐसी जातियों के बच्चों को सीधे जेल में भेजने के लिए हर झूठ का प्रयोग करेंगे।
४. सरकार के सामाजिक न्याय मंत्रालय का अपना सर्वेक्षण बताता है कि SC/ST Act में औसत कनविक्शन की दर केवल 8% है। OBC सर्वाधिक आरोपित वर्ग है जो जातिगत अपराधों में 81% भागीदारी करता है। 2200 से अधिक कालेज कैम्पसों में पूरे वर्ष में केवल 378 जातिवादी भेदभाव के केस आए। फिर लॉजिक क्या है कि इस नियम को लाया जाए? एक झूठ फैलाया गया कि दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है, आँकड़े सपोर्ट नहीं कर रहे, और आप नियम पर नियम बनाए जा रहे हैं?
५. पिछले 15 वर्षों में सोशल मीडिया से ले कर कॉलेज राजनीति में सर्वाधिक विषैली जातिगत टिप्पणी का केन्द्र ब्राह्मण/सवर्ण रहे हैं। चाहे कॉलेज की दीवारें हो या छात्र संगठनों के नारे, सवर्णों के देवता, जातियाँ, प्रतीक और ग्रंथों के नाम पर भयावह टिप्पणियों को हम हर दिन देखते हैं। फिर ‘विशेषकर’ शब्द को नियमों में जोड़ते समय इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखा गया?
६. झूठे केस में फँसने पर, पुलिस तक बात जाने पर, अकादमिक समय के नष्ट होने पर, उचित जुर्माने का प्रावधान क्यों नहीं है? यदि कोई बच्चा झूठे आरोप के कारण आत्महत्या कर ले तो कौन उत्तरदायी होगा? कैम्पस में आत्महत्याओं की संख्या जातिवादी टिप्पणियों के केस से अधिक है। आजकल के बच्चे भविष्य की चिंता, माता-पिता से भय आदि के कारण ऐसे कदम उठा लेते हैं।
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यह पूरी नियमावली इंटेंट के स्तर पर ही घटिया है। कैम्पस अभिव्यक्ति का अड्डा होना चाहिए, जातिवादी विद्वेष का नहीं। जिस बात के रैम्पेंट होने के कोई प्रमाण नहीं, उससे प्रोटेक्शन को ले कर नियम किस जीव ने बनाए?
कैम्पस मित्रता के अंकुरन के लिए होता है, हेड-हंटिंग के लिए नहीं। यहाँ दीर्घकालिक दोस्ती बनती है, अल्पकालिक राजनीति नहीं।
इसकी समीक्षा हो। उचित प्रावधान रहें। हर जाति को जातिवादियों से सुरक्षा मिले। पुलिस की इन्वॉल्वमेंट केवल गंभीर हिंसा की स्थिति में हो। केस के निराकरण तक आरोपी-आरोपित पर कार्रवाई न हो। फर्जी केस पर, उसी केस के लिए प्रस्तावित दंड का दूना दंड मिले।
@ugc_india@BJP4India@nishikant_dubey@dpradhanbjp@narendramodi@EduMinOfIndia
@POTUS@White Heavy shelling has also taken place in the Akhnoor, Rajouri, and RS Pura sectors.
What kind of 'ceasefire' have you negotiated? And why shouldn’t we respond with ten times the intensity?"
@realDonaldTrump@marcorubio
"Minutes after you announced the ceasefire, Pakistan began firing across the border. The Mata Vaishno Devi Temple has been targeted. Multiple blasts have been reported in Srinagar. Drones have been shot down in Pokhran, Rajasthan, and in Baramulla
@Bhaktavatsulu1@ShekharGupta@sukriti_vats Let me help you out
Considering number of men and women to be equal for simplicity in calculation...only 9.75 percent of jain eat non-veg(according to this survey)
Rest 90.25 prefer veg
Got your answer?
Or else I will simplify it further for your understanding
@ranvijaylive Sawaal to ye v ho sakta h bhaiya ki 89 case jispe darj ho usko baar baar jamanat kaise mil jaa raha h?
Yaha log saalo saal ek galat case me jail me sadte rahte hain r koi sunta nahi unka
बलात्कार की रपट लिखाने गई 13 साल की बच्ची के साथ दरोगा द्वारा बलात्कार भारत के लोकतंत्र पर लगा कलंक है। ललितपुर के थाने में मौजूद हरेक पुलिसकर्मी को निलंबित करके पूरे थाने पर कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री जी, कृपया इस कलंक को पोंछने के लिए सख्त कदम उठाइये।
My quest to be a meaningful participant in democracy & help shape pro-people policy led to a 10yr rollercoaster ride!
As I turn the page, time to go to the Real Masters, THE PEOPLE,to better understand the issues & the path to “जन सुराज”-Peoples Good Governance
शुरुआत #बिहार से
"Is this jihad? Is this their piety?”
“After a point, all I begged of them was not to take me on the cold, hard floor – my back couldn’t take it, and the unborn baby in me would die, I told them. But they didn’t listen."
https://t.co/MjDkzHqLRC