सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
देश की आज़ादी, सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं वीर शहीदों को कोटिशः नमन। #independanceday
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Please resolve it.
@BPCLLPG@Bharat_Gas@BPCLimited
@RPSC1 SI भर्ती 2021 के फॉर्म एडिट करने के दौरान Sign By Default OTR से इंग्लिश वाला साइन ले रहा हैं जबकि मेरा हिंदी में साइन हैं।
कृपया आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करावे।
नव्या मीणा ने र��जस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 12वीं कला वर्ग की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.60% अंक (498/500) प्राप्त कर पूरे राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
नव्या मीणा, उनके माता-पिता तथा विद्यालय के समस्त स्टाफ को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
सरकारी विद्यालय की छात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि संसाधनों की कमी के बावजूद मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के बल पर बड़ी से बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
यह उपलब्धि उन सभी ��िद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हुए बड़े सपने देखते हैं।
ख़ामनेई अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अंत तक अपने देश को नहीं छोड़ा। ना बंकरों में छिपे, ना किसी दूसरे देश से मदद की भीख मांगी, ना अपने लोगों के साथ विश्वासघात किया। सत्ता और संघर्ष के बीच खड़े रहना ही नेतृत्व की असली पहचान होती है�� इतिहास गवाह है कुछ लोग पद से नहीं, अपने रुख से याद किए जाते हैं।
जब दूसरे अधिकारी रील बनाते हैं तब SDM सुरेश जी का विरोध करने वाले अन्य रील अधिकारियों की रील का 'Status' लगाते हो।
यह ट्रोलिंग नहीं, तुम्हारी कुंठित मानसिकता है जिसे एक दलित समाज के बेटे का आत्मविश्वास बर्दाश्त नहीं हो रहा।
क्या यह ट्रोलिंग वाकई जलन के चलते हैं या फिर यह सफलता की उस चमक से तकलीफ है जो सदियों पुराने सामाजिक ढाँचे को चुनौती दे रही है ??
@sdmsureshkm_
बात एक ऐसी औरत की, जिसका नाम कंचन बाई मेघवाल था। नीमच जिले का रानपुर गांव। एक आंगनवाड़ी केंद्र। वहां भोजन बनाती थीं। बच्चों के लिए। एक दिन, अचानक मधुमक्खियों का झुंड। बच्चे खेल रहे थे। चीखें। अफरा-तफरी। मौत बह���त करीब थी। कंचन बाई भाग सकती थीं। बच सकती थीं। लेकिन उन्होंने नहीं भागा। उन्होंने तिरपाल उठाया। मेट उठाया। बच्चों को ढांका��� एक-एक करके उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाया। खुद खड़ी रहीं। डंक लगते गए। हजारों डंक। दर्द बढ़ता गया। लेकिन उनका ध्यान सिर्फ बच्चों पर था। 20 मासूम बच्चे बच गए।
कंचन बाई नहीं बचीं। अब सवाल यह है—
जब एक औरत अपनी जान देकर 20 बच्चों की जान बचा ले, तो सरकार क्या करती है? चार लाख रुपये।
बस। चार लाख।
उसी मध्य प्रदेश में, जहां जहरीले कफ सिरप से बच्चे तड़प-तड़प कर मरते हैं। जहां दूषित पानी से लोग मरते हैं�� जहां बड़े-बड़े घोटाले होते हैं, हजारों करोड़ की बातें होती हैं। वहां एक मां, एक कार्यकर्ता, जो रोज़ बच्चों के लिए रोटी बनाती थी, उसकी मौत पर... चार लाख। शहादत का दर्जा? नहीं।
सरकारी नौकरी परिवार को? नहीं।
आजीवन पेंशन? नहीं।
बस चार लाख। और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा। सवाल पूछिए—
क्या चार लाख में एक मां की कीमत आंक�� जा सकती है?
क्या 20 बच्चों की जिंदगी बचाने वाली औरत को सिर्फ 'मानवीय आधार' पर चार लाख देकर सरकार का फर्ज़ पूरा हो जाता है? सोचिए।
अगर यह कोई बड़ा अफसर होता। कोई नेता का रिश्तेदार होता। कोई मशहूर शख्सियत होती। तो क्या होता?
मिलियन-मिलियन में मुआवजा।
शहीद का दर्जा।
स्मारक।
घोषणा।
परेड। लेकिन कंचन बाई?
एक आंगनवाड़ी में काम करने वाली। दलित समुदाय से। गरीब परिवार से। कमाऊ सदस्य। पीछे लकवाग्रस्त पति। तीन बच्चे। उनकी कीमत... चार लाख। यह सिर्फ एक घटना नहीं है।
यह एक पैटर्न है।
यह बताता है कि हमारी व्यवस्था में असली नायक कैसे माने जाते हैं।
जो बड़े-बड़े भाषण देते हैं, उन्हें सम्मान।
जो चुपचाप जान देते हैं, उन्हें चार लाख। कंचन बाई ने ममता दिखाई।
सरकार ने क्या दिखाया? संवेदनहीनता।
या फिर... हिसाब-किताब। आप बताइए।
क्या यह ठीक है?
क्या यह न्याय है? कंचन बाई मेघवाल।
नाम छोटा।
काम बड़ा।
जिंदगी छोटी।
बलिदान अमर। हम सबको सोचना चाहिए।
क्योंकि अगली बार... कोई और कंचन बाई होगी।
और फिर... चार लाख? नमस्कार।"
कंचन बाई ने साबित कर दिया—
असली शहादत चुप होती है।
लेकिन असली शर्म भी चुप नहीं रहनी चाहिए।
सरकार से कहिए—
शर्म करो।
यह इंसानियत का सौदा नहीं है।
यह बलिदान का हिसाब-किताब नहीं है। और हमसे कहिए—
चुप मत रहो।
यह सिर्फ कंचन बाई की कहानी नहीं।
यह हमारी व्यवस्था की नंगी सच्चाई है।
जो चुपचाप जान देते हैं, उन्हें चार लाख।
जो शोर मचाते हैं, उन्हें पद्म।
3. और जब मूल वेबसाइट से ही प्रमाण पत्र अपलोड किया जा रहा फिर भी एरर जद का तद हैं।
4. इस प्रकार की असहज व्यवस्था का फिलहाल के लिए रोके।
@8PMnoCM@alokrajRSSB@JATbera1
OTR के कारण लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य इस कदर अधर में हैं कि परीक्षा हेत�� आवेदन करने दिया जा रहा हैं।
1. प्रमाणपत्र Digilocker पर उपलब्ध होने के बाद भी सत्यापन में खासा समय लग रहा हैं।
2. मैनुअली अपलोड करने पर सही से स्कैन करने का एरर आ रहा हैं।
#OTR #RSSB
OTR के चक्कर में बेरोजगारों की हालात खराब हो रही है एक ईमानदार मेहनती अभ्यर्थी भी आवेदन नहीं कर पा रहा है।
पहले CET 2025 का आयोजन ना करवाकर और अब OTR व आवेदन की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल बनाकर आवेदन को रिजेक्ट व कम करने का नया तरीका अपनाया जा रहा है।
◾क्या यह आवेदनों की संख्या कम करके बेरोजगारी घटाने का नया तरीका है ??
‘सभी के लिए एआई’ — 6 निःशुल्क कोर्स, अब पूरी तरह हिंदी में।
एआई सीखें, वो भी बिना किसी कोडिंग या पूर्व एआई ज्ञान के। आईआईटी मद्रास के ‘सभी के लिए एआई’ के तहत 6 कोर्स - एआई फॉर एजुकेटर्स, एआई इन फिजिक्स, एआई इन केमिस्ट्री, एआई इन अकाउंटिंग, क्रिकेट एनालिटिक्स विद एआई और एआई/एमएल यूजिंग पायथन— अब मुफ़्त और हिंदी में उपलब्ध हैं।
इस ऐतिहासिक पहल को संभव बनाया है आईआईटी मद्रास के डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म SWAYAM Plus ने, ताकि भाषा कभी भी सीखने में बाधा न बने।
देशभर के विद्यार्थी, शिक्षक और प्रोफेशनल्स अब अपनी चुनिये भाशा में एआई की बुनियादी समझ से लेकर वास्तविक ज���वन में उसके उपयोग तक सीख सकते हैं।
आईआईटी मद्रास इकोसिस्टम के विशेषज्ञों द्वारा डिज़ाइन किए गए ये कोर्स रियल डेटा, केस स्टडी और प्रैक्टिकल लर्निंग पर आधारित हैं— जो सीखने के साथ-साथ रोज़गार-योग्यता और स्किल्स भी बढ़ाते हैं।
📅 26 जनवरी 2026 तक रजिस्ट्रेशन खुले हैं
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📩 प्रश्न या कॉलबैक के लिए: [email protected]
यह सिर्फ एक कोर्स लॉन्च नहीं, बल्कि एआई शिक्षा को सच में “सभी के लिए” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
@iitmadras
@alokrajRSSB माननीय लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल है। CET हर साल होने के सपने दिखाए थे लेकिन अब क्या देखना पड़ रहा हैं! इतने पदों पर होने वाली भर्ती को पात्रता परीक्षा के समय पर आयोजन नहीं होने की वजह से वंचित किया जाना उचित नहीं है।
#LDC_से_पहले_CET_करवाओ
राजस्थान एकीकृत शिक्षक महासंघ (@RESMA_7) का #प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने पर संगठन और शिक्षा जगत के महानुभावों को दिल से धन्यवाद 🙌🙏
पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कर्मचारियों और बेरोजगारों के हितों की रक्षा हेतु प्रयासरत रहूंगा @JATbera1@Dadarwal7
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी रिपोर्ट पेश की है जिससे अरावली का दायरा सिमट गया है। अरावली राजस्थान का केवल पर्वत नहीं, हमारा 'रक्षा कवच' है। केंद्र सरकार की सिफारिश पर इसे '100 मीटर' के दायरे में समेटना, प्रदेश की 90% अरावली के 'मृत्यु प्रमाण पत्र' पर हस्ताक्षर करने जैसा है।
सबसे भयावह तथ��य यह है कि राजस्थान की 90% अरावली पहाड़ियाँ 100 मीटर से कम हैं। यदि इन्हें परिभाषा से बाहर कर दिया गया, तो यह केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि कानूनी कवच हटाना है। इसका सीधा मतलब है कि इन क्षेत्रों में अब वन संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होगा और खनन बेरोकटोक हो सकेगा।
पहाड़ की परिभाषा उसकी ऊँचाई से नहीं, बल्कि उसकी भूगर्भीय संरचना (Geological Structure) से होती है। एक छोटी चट्टान भी उसी टेक्टोनिक प्लेट और पर्वतमाला ��ा हिस्सा है जो एक ऊंची चोटी है। इसे अलग करना वैज्ञानिक रूप से तर्कहीन है।
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां (रिज) भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। इन छोटी पहाड़ियों को खनन के लिए खोल दे��े का मतलब दिल्ली और पूर्वी राजस्थान तक रेगिस्तान को खुद निमंत्रण देना है।
अरावली की चट्टानी संरचना बारिश के पानी को रोकती है और उसे जमीन के भीतर भेजती है। ये पहाड़ियाँ पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज का काम करती हैं। इन्हें हटाने का मतलब पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे उत्तर-पश्चिम भारत में सूखे को निमंत्रण देना है।
अरावली वह दीवार है जो पश्चिम से आने वाली जानलेवा 'लू' (Heat Wave) और थार रेगिस्ता��� को पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में घुसने से रोकती है।
यह फैसला पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि खनन माफियाओं के लिए 'रेड कार्पेट' है। थार के रेगिस्तान को दिल्ली तक जाने का निमंत्रण देकर सरकार आने वाली पीढ़ियों के साथ जो अन्याय कर रही है, उसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
विडंबना ये है कि सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई इसलिए शुरू हुई थी ताकि अरावली को स्पष्ट रूप से पहचा��ा और बचाया जा सके। लेकिन केंद्र सरकार की जिस सिफारिश को कोर्ट ने माना, उसने अरावली के 90% ��िस्से को ही तकनीकी रूप से 'गायब' कर दिया।
मैं सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करता हूं कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को देखते हुए अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे। यह फैसला सीधा विनाश को निमंत्रण देने वाला है।
#SaveAravalli
आज शेयर मार्केट के नाम पर पूरे देश को सपनों में बेचा जा रहा है।
Groww, Zerodha, Upstox, Angel One जैसी ऐप्स करोड़ों कमा चुकी हैं , लेकिन जिन गरीब और मिडिल क्लास लोगों ने इन ऐप्स पर भरोसा कर अपना खून-पसीने का पैसा लगाया , वे अब अपने लाल पड़े ग्राफ को हरा होने का इंतज़ार कर रहे हैं — या कर्ज़ में डूबे बैठे हैं।
लोगों को सीखो , कमाओ , अमीर बनो के नाम पर लुभाया गया ,
लेकिन सच्चाई यह है कि हर ट्रेड में फंड हाउस, ब्रोकरेज और ऐप मालिक ही मुनाफा कमा रहे हैं।
आम आदमी बस चार दिन हरा ग्राफ देखकर खुश होता है,
और पाँचवें दिन मार्केट गिरते ही उसकी नींद , सुकून और पूंजी सब उड़ जाती है।
इन ऐप्स ने इन्वेस्टमेंट की आज़ादी का नारा दिया ,
पर असल में ये सिस्टम है जो हर क्लिक पर आपका पैसा खींचता है — टैक्स , चार्ज , ब्रोकरेज , हर कदम पर काट।
लोग स��चते हैं शेयर मार्केट में अमीर बनेंगे , पर हकीकत ये है कि 80% रिटेल इन्वेस्टर को घाटा होता है।
लालच में मत पड़ो — कोई ऐप या स्टॉक तुम्हें फ्री में पैसा नहीं देने वाला।
अपने पैसे को वहीं लगाओ जहाँ जोखिम कम हो,
जमीन, छोटा बिज़नेस या रियल एसेट कम से कम वहाँ ग्राफ लाल नहीं होता, मेहनत का फल मिलता है।