1/2 सत्यमेव जयते.!
आज माननीय हाईकोर्ट ने मुझे 240 दिन जेल में रहने के बाद जमानत दी है.! इस दौरान जितने भी शुभचिंतकों ने मेरा, समरावता गाँव वासियों और जेल में बंद रहे अन्य साथियों का न्याय की लड़ाई में साथ दिया; उन सभी का तहेदिल से धन्यवाद.!
बाप विधायक @roat_mla जी का वह भाषण जिसके लिए जनता हमें सदन में भेजी है ,
ग़जब का वक्तव्य दिया है विधायक महोदय ने नेता इसलिए जीत कर आते हैं इनके यह प्रभाव रखते हैं
अपने #आदिवासी समाज के लिए क्या दिया डबल इंजन की सरकार ने ।
@DrKirodilalBJP
राजस्थान पटवारी भर्ती:
● स्वर्ण कोटा (General) : 447 पद
● सुदामा कोटा (EWS) : 405 पद
● ओबीसी (OBC) : 303 पद
● अनुसूचित जाति (SC) : 229 पद
● अनुसूचित जनजाति (ST) : 176 पद
● अति पिछड़ा वर्ग (MBC) : 162 पद
क्या यही सामाजिक न्याय है?
#भजनलाल_जातिवादी_है
जब एक ओर देश संविधान लागू होने की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, वहीं दूसरी ओर तथाकथित धार्मिक राज्य के नाम पर मनु के विधान को लागू करने की साजिश रची जा रही है।
क्या ग़ज़ब नौटंकी चल रही है, एक तरफ़ प्रधानमंत्री @narendramodi जी द्वारा संविधान पर सिर पटक - पटक कर संविधानवादी होने का दावा किया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ़ प्रयागराज के महाकुंभ में हिंदू राष्ट्र के लिए संविधान का प्रारूप को सामने लाया जा रहा है।
भारत का संविधान स्वतंत्रता, समानता और न्याय की गारंटी देता है। इसे मनुस्मृति और चाणक्य नीति जैसे पुराने और भेदभावपूर्ण नियमों से बदलने की कोशिश करने की बात करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह आधुनिक भारत की संकल्पना के खिलाफ है।
मनुस्मृति, जो जातिगत एवँ लैंगिक भेदभाव और सामाजिक असमानता का प्रतीक है, को आधार बनाना भारत के संविधान द्वारा प्रदान किए गए मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। यह कमजोर वर्गों, महिलाओं और समाज के हर उस व्यक्ति के अधिकारों पर हमला है, जिसे संविधान ने समानता का अधिकार दिया है।
यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है। यह देश को विभाजित करने, कमजोर वर्गों को उनके अधिकारों से वंचित करने और धार्मिक उन्माद फैलाने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। यह विभाजनकारी और असमानता बढ़ाने वाला कदम है।
डबल इंजन सरकार को जवाब देना चाहिए कि इस संविधान विरोधी कृत्य को अंजाम देने वाले तथाकथित धर्माचार्य के यहां आपके डिप्टी CM क्या करने गए थे? क्या मुख्यमंत्री योगी @myogiadityanath का बार-बार प्रयागराज में प्रवास इस एजेंडे का हिस्सा था? अगर ऐसा नहीं है तो संविधान विरोधी सोच रखने वाले इन देशद्रोहियों पर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही?
कान खोलकर सुन लो संविधान विरोधियों भारत का संविधान हमारी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और लोकतंत्र की नींव है। इसे कमजोर करने की कोशिश @AzadSamajParty@BhimArmy_BEM के संविधानवादी कार्यकर्ता किसी कीमत पूरी नहीं होने देंगे। यह देश संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर ही प्रगति करेगा, न कि किसी धर्म आधारित राष्ट्र की अवधारणा से। संविधान को कमजोर करने की हर कोशिश नाकाम होगी।
(संविधान-विरोधियों, ध्यान रहे – भारत का भविष्य धर्म और जाति के नाम पर नहीं, बल्कि समानता, स्वतंत्रता और न्याय के आधार पर लिखा जाएगा।)
जय भीम, जय भारत, जय संविधान।
"स्थान, समय, राज्य और सरकारें बदलती हैं, पर दलितों की दशा नहीं।"
राजस्थान के बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी थाना क्षेत्र के भाखरपुरा गांव में दलित युवक के साथ हुई इस अमानवीय घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। युवक के हाथ-पैर बांधकर उसे पेड़ से उलटा लटकाकर जिस तरह बर्बरता पूर्वक उसकी पिटाई की गई, वह न केवल मानवता को शर्मसार करने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दलितों पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
हर चुनाव में हर राजनीतिक दल दलितों के अधिकारों और उनके उत्थान की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। परंतु सत्ता में आने के बाद यही वादे खोखले साबित होते हैं। दलितों के साथ अत्याचार, शोषण और भेदभाव की घटनाएं समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी असमानता को उजागर करती हैं।
जब तक राजनीतिक दलों की नीतियों में वास्तविक इच्छाशक्ति नहीं आएगी, तब तक "विकास" और "न्याय" के दावे दलित समाज के लिए सिर्फ खोखले शब्द बने रहेंगे। दलितों को न्याय तभी मिलेगा जब सत्ता में बैठे लोग उनके अधिकारों को सिर्फ वोट बैंक के चश्मे से नहीं, बल्कि इंसानियत के नजरिए से देखना शुरू करेंगे या दलित ही सत्ता में नहीं आ जाते।
अब वक्त आ गया है कि समाज जागें, अन्यथा यह व्यवस्था परिवर्तन का सपना हमेशा अधूरा रहेगा। दलितों को नारों के बहकावे में आने की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि सत्ता पर कब्ज़ा करने की आवश्यकता है क्योंकि हमारे परम पूज्य बाबा साहेब ने कहा था, "राजनीतिक सत्ता वो चाबी है, जिससे सभी समस्याओं का समाधान संभव है।"
@KraantiKumar दिल दहला देने वाला कुकृत्य किया गया है। ललाट पर गहरे जख्म का निशान दिख रहा है। जो पत्रकार जोखिम उठाकर सत्य सामने लाने की कोशिश करता है, उसका ऐसा हश्र अति निन्दनीय और पीड़ादायक है।
#JusticeForMukeshChandrakar