@mkoirala@dipak_gyawali "सही कुरा हो। जसले बुझ्छ, उसैलाई बढी पीडा हुन्छ। नबुझ्नेले त फर्केर पनि हेर्दैन। तर आफूलाई बुझ्ने र सम्मान गर्ने मान्छेका लागि अघि बढ्नु नै राम्रो हुन्छ।"
हनुमान चालीसा हमारे जीवन को भीतर से बदलने की शक्ति रखती है। तेज़ भागती ज़िंदगी, बढ़ता तनाव और अस्थिर मन—इन सबके बीच यदि कोई सरल उपाय है जो मन को थाम सके, तो वह है हनुमान चालीसा का नियमित पाठ।
हनुमान चालीसा केवल पढ़ी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है—और जो इसे महसूस करता है, वही इसके वास्तविक प्रभाव को समझ पाता है।
#hanumanchalisa
तेहिं कलिकाल बरष बहु बसेउँ अवध बिहगेस।
परेउ दुकाल बिपति बस तब मैं गयउँ बिदेस॥
भुसुंडी जी ने कहा हे पक्षीराज! उस कलिकाल में मैं बहुत वर्षों तक अयोध्या में रहा। एक बार वहाँ अकाल पड़ा, तब मैं विपत्ति का मारा विदेश चला गया।
श्रीरामचरित मानस उत्तरकांड
जय श्री सियाराम🙏🙏
शुभ दिवस
जो काली के हैं, वे महाकाल से अलग नहीं।
माँ काली और महाकाल दो अलग शक्तियाँ नहीं, एक ही अनंत सत्य के दो स्वरूप हैं।
महाकाल समय के स्वामी हैं, और महाकाली उस समय से भी परे आदिशक्ति।
जो माँ काली की शरण में आता है, वह महाकाल की कृपा से भी वंचित नहीं रहता।
जहाँ शक्ति है, वहाँ शिव हैं। जहाँ शिव हैं, वहाँ शक्ति अवश्य है।
इन दोनों को अलग-अलग देखने वाला केवल रूप देखता है, तत्त्व नहीं।
इसलिए जो काली का हो गया, वह महाकाल से कभी अलग नहीं हो सकता।
उसके जीवन में भय नहीं, केवल विश्वास रहता है; अंधकार नहीं, केवल जागृति रहती है।
जय महाकाल। जय महाकाली। 🖤🔱
आषाढी वारी आणि एकादशी निमित्त साकारलेले श्री विठ्ठल-रुक्मिणी यांचे रंग खडू पासून फलकलेखन.
कला, संस्कृती आणि भक्तीचा सुंदर संगम. 🚩
“पंढरीची वारी निघाली… विठुरायाच्या भेटीची ओढ लागली!” 🚩
कलाकार : राहुल बागुल
#वारी#आषाढीवारी#पंढरीची_वारी