🏏 विश्व कप 2026 | मेरी नज़र में भारत की परफेक्ट Playing XI 🇮🇳
टीम घोषित हो चुकी है… नाम सबके सामने हैं,
अब बात आती है सही 11 चुनने की — जो दबाव में खेले, मैच पलटे और ट्रॉफी उठाए।
मेरी राय में 2026 वर्ल्ड कप के लिए भारत की Playing XI कुछ ऐसी होनी चाहिए👇
👑 कप्तान – हार्दिक पांडया
🧤 ईशान किशन
💥 शिवम दुबे
🧊 रिंकू सिंह
⚡ अभिषेक शर्मा
🎯 तिलक वर्मा
🌀 अक्षर पटेल
🔁 वॉशिंगटन सुंदर
🔥 जसप्रीत बुमराह
💣 अर्शदीप सिंह
🧠 वरुण चक्रवर्ती
यह टीम है -
नाम नहीं, फॉर्म और फाइट मायने रखती है।
अगर 2026 में ट्रॉफी चाहिए, तो ऐसी ही टीम मैदान में उतरनी चाहिए 🇮🇳🏆
आपकी Playing XI क्या होगी?
कमेंट में बताइए… बहस होनी चाहिए 🔥
राष्ट्रीय अध्यक्ष जी,
नाम बदलने जैसे मुद्दों पर लड़ाई लड़ने के बजाय गाँव-गाँव जाकर संगठन को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत है। अपनी विचारधारा को फिर से जनता के बीच ले जाइए, उसे पूरे देश में मज़बूती से स्थापित कीजिए।
जब विचारधारा मज़बूत होगी और जनता का भरोसा वापस आएगा, तब सरकार भी बनेगी और नाम बदलने जैसे फैसले अपने-आप संभव हो जाएंगे।
अभी सबसे ज़रूरी है संगठन और विचारधारा का पुनर्जागरण।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जी,
नाम बदलने जैसे मुद्दों पर लड़ाई लड़ने के बजाय गाँव-गाँव जाकर संगठन को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत है। अपनी विचारधारा को फिर से जनता के बीच ले जाइए, उसे पूरे देश में मज़बूती से स्थापित कीजिए।
जब विचारधारा मज़बूत होगी और जनता का भरोसा वापस आएगा, तब सरकार भी बनेगी और नाम बदलने जैसे फैसले अपने-आप संभव हो जाएंगे।
अभी सबसे ज़रूरी है संगठन और विचारधारा का पुनर्जागरण।
आज संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @kharge जी सहित विपक्षी सांसदों ने प्रोटेस्ट मार्च निकाला।
लेकिन सवाल ये है कि ऐसे प्रोटेस्ट से कांग्रेस पार्टी को या देश को वास्तव में क्या हासिल होगा?
जब बड़ी संख्या में शासन के ख़िलाफ़ विरोध होता है, तब भी भारतीय जनता पार्टी वही करती है जो उसका मन होता है। बीजेपी विपक्ष को एक प्रतिशत भी महत्व नहीं देती। आप संसद में कितना भी प्रोटेस्ट कर लें, नारे लगा लें, उससे ज़मीनी हक़ीक़त नहीं बदलती।
अगर सच में लड़ाई लड़नी है तो वो सड़क से नहीं, ज़मीन से लड़ी जानी चाहिए। गाँव-गाँव जाकर संगठन मज़बूत करो, अपनी जड़ें फिर से खड़ी करो। क्योंकि आज सच्चाई ये है कि कांग्रेस की ज़मीनी पकड़ बहुत कमज़ोर हो चुकी है।
पहले संगठन मज़बूत होगा, तभी संघर्ष का कोई मतलब निकलेगा।
@Vishal_aawaj भईया,
साफ़ बताइए—क्या ऐसे प्रोटेस्ट से सच में कुछ हासिल होगा, या ये सिर्फ़ दिखावे की राजनीति है?
अनिल कुमार बादव जी के मानसिक असंतुलन जैसी स्थिति झलकती है। ऐसे में मज़ाक या राजनीति करने से बेहतर होगा कि उनके इलाज के लिए किसी उचित और अच्छे हॉस्पिटल की जानकारी दी जाए।
मानसिक स्वास्थ्य कोई मज़ाक नहीं है, समय पर इलाज और सही सलाह से ही स्थिति में सुधार संभव है। उम्मीद है उनके शुभचिंतक इस दिशा में ज़िम्मेदारी निभाएँगे।
बोलिए प्रभु श्री कृष्ण की जय। 🙏
चुनाव में हार-जीत अपनी जगह है, लेकिन मनोबल का टूटना या मज़बूत होना पूरी तरह मानसिक दृढ़ता पर निर्भर करता है। जहाँ एक ओर कुछ लोग हार को अंत मान लेते हैं, वहीं दूसरी ओर हज़ारों लोगों का मनोबल इसी संघर्ष से और मज़बूत हुआ है।
एक अकेले व्यक्ति ने पूरे बिहार में सही और ज़मीनी मुद्दों पर चुनाव लड़ा। यह लड़ाई सिर्फ़ बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसकी गूंज पूरे भारत में सुनाई दी। प्रशांत किशोर जी ने बिना किसी समझौते के जनता के सवालों को सामने रखा और उसी ईमानदारी से राजनीति की।
निश्चित रूप से, ऐसे संघर्ष और विचारधारा के साथ प्रशांत किशोर जी आने वाले समय में राजनीति के बड़े और मज़बूत चेहरे बन चुके हैं।
@PrashantKishor@ManojBhartiJSP
@DrLaxman_Yadav EWS के साथ गलत हो रहा है इतने कम सीट क्यों ओबीसी को इतना जदा..? मुख्यमंत्री जी को एक बार और सोचना चाहिए EWS को कम से कम 1400+ सीट देने का काम करे।
जब ‘वंदे मातरम्’ विदेश की धरती पर गूंज सकता है, तो अपने ही देश में उससे आपत्ति क्यों?”
सबसे पहले प्रधानमंत्री ताली बजाते हुए नजर आए जैसे वंदे मातरम् गुंजा।