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The @timesofindia दो खबरों में इतना भेदभाव क्यों?
लड़की जनरल कैटेगरी (राजपूत समाज) से है तो उसकी जाती नहीं लिखोगे? जब दलित होती है तब तो उछल उछल कर जाती लिखते हो।
हमारे लिए दलित लड़की भी बहन है हमारी, लेकिन इतना भेदभाव क्यों?
निर्लज्ज नेताओ, यदि सामाजिक न्याय करना है तो इस नीचता को दंडित करो. जातिवाद का विष समाप्त करो और उसे हवा देनेवाले ऐसे नीच पत्रकारों को दण्डित करो.
चाटुकार संतों के पीछे छिपकर अपनी धूर्तता से कब तक बचोगे.
अपना धर्म नहीं निभाओगे तो कर्मफल बहुत भयानक होगा. बचोगे नहीं.
बिहार के सारन में दसवीं कक्षा की छात्रा का सामूहिक बलात्कार हुआ है। सोशल मीडिया पर आरोपित पासवान समाज के बताए जा रहे हैं, और लड़की को कहीं ब्राह्मण, तो कहीं राजपूत समाज का बताया जा रहा है। न्यूज में यह डिटेल कहीं नहीं दिख रही है।
पाँचों बलात्कारियों की पहचान स्थानीय लोगों के रूप में ही हुई है, जिन्होंने बलात्कार के पश्चात पीड़िता को जीवित ही कुएँ में फेंक दिया। आधे घंटे तड़पने के उपरांत उसकी मृत्यु हो गई।
संभवतः, कल सुबह तक इन अपराधियों के नाम और इस जघन्य कृत्य के पीछे की नीयत पता चल सके। बिहार और रेप शब्द लिखने से लगातार कई समाचार मिल रहे हैं। यह भयावह है। @bihar_police और @samrat4bjp जी, ये किस मोड़ पर ले आए हैं अपराधी बिहार को?
आरंभ में दो-चार बुल्डोजर दिखा कर सम्राट जी शांत पड़ गए क्या?
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के सारन में राजपूत बच्ची को पाँच पासवान लड़कों ने खींचा, रेप किया और मरने के लिए कुएँ में फेंकने के पश्चात् व्हाट्सएप पर स्टेटस लगाया कि ‘दुल्हन बना कर ले जाएँगे’।
जब रुचि तिवारी को उसके ब्राह्मण होने के कारण पुलिसकर्मियों के सामने से दिल्ली में, भरी दोपहरी में खींचा गया था, मैंने तब भी कहा था कि अगली वारदात खुल्लमखुल्ला रेप और हत्या की होगी। वह आज हो गई है।
प्रदीप भारद्वाज को बाथरूम में बंद कर अग्निशामक चला कर मारने का प्रयास रुचि तिवारी के रेप/हत्या के प्रयास के कुछ ही दिनों के भीतर हुआ। दोनों में ही, मुझे संदेह है कि पुलिस ने अटेम्प्ट टू मर्डर या रेप के चार्ज लगाए होंगे।
जब पुलिस मूक हो जाती है, सत्ता पक्ष सामान्य वर्ग को सताने की नई नीतियों के आविष्कार में व्यस्त रहता है, तब ऐसे ही सवर्ण समाज की बच्चियाँ सत्ताधीश की जातिवादी कुंठा की बलि चढ़ जाती हैं।
@narendramodi जी, 22 से 47 नहीं, 87 कर दो, पर क्या उत्तर दोगे इस बच्ची की माँ को? @BJP4India के नेताओं, तुम्हारी मूक सहमति ऐसी क्रूरता को जनती है।
यही कारण है कि हमारी लड़ाई केवल UGC रोलबैक की नहीं है, हमारी लड़ाई इस तंत्र से है जिसने सामान्य वर्ग की बच्चियों को रेप-हत्या का सामान बना दिया है, जिसमें हमारी सुनवाई है ही नहीं।
राजपूत-ब्राह्मण-भूमिहार-लाला आदि को ले कर घृणा इतनी मेनस्ट्रीम हो गई है कि किसी पासवान समाज के दलित-पीड़ित-शोषित-वंचित को लगता है कि सवर्ण बच्ची का रेप करना, उसके पूर्वजों के साथ हुए कथित अपमान का उचित बदला है।
उसे इसी सरकार ने यह हथियार थमाया है कि दीवारों पर लिखे नारों के मुँह तक पहुँचने, और देश छोड़ने के नारों से कब्र खुदने की बात तक, सवर्णों के प्रति घृणा सामान्यीकृत की जा चुकी है। ये नारे अब केवल नारे नहीं हैं, ये नारे दिल्ली में लगते हैं, बिहार में फोन पर देखे जाते हैं और किसी बच्ची को इस दुष्कृत्य का शिकार बना दिया जाता है।
आप ही बताइए, मैं केवल यूजीसी रोल बैक पर कैसे रुक जाऊँ?
Here is a good news.
As per reports, MOHAMMAD Zeeshan, one of the zombies involved in the dastardly attack on Salim Vastik has been eliminated by @Uppolice.
The instructions of @myogiadityanath are clear. The punishment to all perpetrators will be exemplary.
तुमने मुझे भाजपा का दास माना, यह तुम्हारी समस्या है
दो बकचोदियाँ भाजपा के कंटेंट ग्रुप में चल रही हैं:
१. PM मोदी ने जो ओबीसी में मुस्लिम आरक्षण की बात की वह तो 1784 या 1498 से ही है जब वास्को डी गामा भारत आया था।
२. मैं यूजीसी पर बोलते बोलते अब फॉरेन विजिट, सर्वोच्च नागरिक सम्मान और बिल गेट्स की वैक्सीन पर क्यों कटाक्ष कर रहा हूँ।
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पहले विषय में मेरा उत्तर यह है कि जब पीएम ओबीसी में मुस्लिम के होने पर छाती ठोकते हैं और उनकी पार्टी कर्नाटक और महाराष्ट्र में मुसलिम को मजहबी आधार पर आरक्षण देने पर बवाल करती है, तो यह दोगलापन है।
यदि आपको मुसलमानों को आरक्षण से बाहर रखना है तो ओबीसी से बाहर करो। नहीं करना है तो ये टेक्निकल बकलोली मत करो कि मजहबी में नहीं देंगे पर जातिहीन इस्लाम में जातियाँ बना कर उन्हें हिन्दू ओबीसी के कोटे का आरक्षण दे देंगे।
दूसरे विषय में यह कहना है कि मैं भाजपा का दास नहीं हूँ, स्वतंत्र पत्रकार हूँ। मेरा मन करेगा मैं यूजीसी पर पचास दिन तक लिखूँगा, मैं मोदी को मिलने वाले नागरिक सम्मान पर भी मजे लूँगा और मैं बिल गेट्स जैसे दरिंदों के सरकारी एक्सेस पर भी बोलूँगा।
तुम यह तय करोगे कि मैं यूजीसी पर बोलते-बोलते अन्य विषयों पर न बोलूँ? मान लेते हैं कि मैं मोदी से एकदम घृणा करने लगा हूँ, तो क्या यह तुम बताओगे कि मुझे घृणा करना चाहिए या नहीं? कैसे-कैसे तर्क ले आते हैं लोग!
भाई मेरे, मैं जब भाजपा के समर्थन में लिखता हूँ और वामपंथियों को पेलता हूँ, तो तुम मुझे अकारण ही ‘भाजपाई’ मान लेते हो। तुम्हें लगता है कि मैं पार्टी के समर्थन में हूँ, जबकि मैं केवल अपने विवेक के आधार पर नीतियों का समर्थन करता हूँ। किसी पीएम के विजन और क्रियान्वयन का समर्थन करता हूँ। वही पत्रकार का कार्य है।
तुम अपनी आशाएँ क्यों बढ़ा लेते हो कि अब मैं पार्टी का दास हो जाऊँ? ‘पर आपको कर्नाटक पुलिस से…’ हाँ बचाया, पर क्यों बचाया? क्योंकि मैं दस साल से पार्टी और नेता की सकारात्मक नीतियों के समर्थन में लिखता रहा, जिसके प्रतिफल में यूपी पुलिस से ले कर कई भाजपा नेताओं ने लिखा-बोला।
दस वर्ष का निवेश था मेरा, फिर भी हायकोर्ट में केस लड़ने में दो लाख रुपए मेरे गए। पंजाब में केस हुआ, दो-दो बार, कहाँ थी पार्टी? बंगाल में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी? बिहार में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी? तेलंगाना में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी?
हर केस में औसतन दो-तीन लाख लगे हैं, कितने केस के बारे में तुम या तुम्हारी पार्टी जानती है? कितने के बारे में किसी ने लिखा या बोला? नहीं लिखा क्योंकि मैंने कभी सहयोग माँगा नहीं। मैं जानता हूँ कि जो मैं लिख और बोल रहा हूँ, वह मेरा अपना विवेक है, पार्टी ने मुझे लिखने नहीं बोला, तो मैं यह आशा क्यों रखूँ कि पार्टी मेरा सहयोग करे?
मुझे न तो किसी ने बनाया है, न फंड किया है, इसलिए मुझसे यह आशा क्यों रखना कि मैं पार्टी या संघ की आलोचना न करूँ, चालीसा पढूँ? हाँ, मेरे नाम पर कोई पार्टी से फंड ले रहा है, और इसके बारे में आप जानते हैं, तो आप यह आशा कर रहे हैं कि यह तो पाला हुआ कुत्ता है, भौंक क्यों रहा है मालिक पर, तो मैं बता दूँ कि उस दलाल को पकड़ो क्योंकि मैंने कोई पैसा नहीं लिया है।
मैं पार्टी के पैसे लेने का मतलब जानता हूँ: अपनी स्वतंत्रता पर कुल्हाड़ी मारना। पाँच लाख ले कर आँख मूँद लेना वैसे विषयों पर जिस पर बोलना आवश्यक है। मुझसे वह संभव नहीं है, इसलिए मैं लूसिफर के लिए डॉक्टर फॉस्टस नहीं बनना चाहता। मुझे नहीं चाहिए तुम्हारी यह डील।
जो पार्टी वामपंथियों की सास के मरने पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कार्यालय से शोक संदेश भेजती हो, और मेरी माँ के देहांत पर अपने ट्रोलों से भद्दी गालियाँ दिलवाती है, या चुपचाप देखती है, वह मुझसे यह आशा रखती है कि मैं पीएम का उपहास न करूँ, सरकार और बिल गेट्स के इतिहास पर न लिखूँ?
मैंने जो लिखा वह दुर्भावना नहीं है, बिल गेट्स जैसों के इतिहास को ले कर है। वह व्यक्ति संदिग्ध है। भाजपा की आरक्षण की नीतियाँ संदिग्ध हैं, उनका कथित इस्लाम विरोध संदिग्ध है, उनकी कथनी-करनी का अंतर संदिग्ध है।
तुमने मुझे भाजपा का दास माना, यह तुम्हारी समस्या है। मेरा समर्थन नीतियों का है, विजन का है, एक्जीक्यूशन का है। और हाँ, मैंने यह नाम, यह स्थान और यह दर्शक-पाठक-श्रोता अपने परिश्रम से बनाए हैं।
जो मेरी आय है वह मेरे शब्दों के आधार पर, याचक वृत्ति से, क्यूआर कोड लगा कर भिक्षाटन कर के अर्जित किया है। वही मुझे पालता है। मेरे नाम से पेट पालते दलालों के घर और कार को देख कर मुझे ईर्ष्या नहीं होती क्योंकि जो मेरे प्रारब्ध में होगा वही होगा।
यदि तुम्हें ऐसा लगता है कि पार्टी ही पाल रही है तो (तुम्हारे अनुसार) जो दे रहे थे, मत दो।
24 वर्ष पहले, आज ही के दिन, 1000 से अधिक राक्षसों ने 59 हिंदुओं को, जिनमें बच्चे और महिलाएँ थीं, जलाकर मार डाला था
क्यों?
क्योंकि उन राक्षसों को लगता था कि कोई "दल्ला" उन्हें लड़कियाँ पेश करेगा.
और मोहन भागवत कहते हैं कि हम सब एक ही हैं, केवल पूजा पद्दति ही तो बदली है
🤬
महाराज जी कहीं अगले चुनाव में लोग आप को ही साफ़ ना कर दें
उन्नाव से जहाँ से आप चुने गए हैं, वहाँ की स्वर्ण जानता का आप को प्रतिशत पता है? https://t.co/2LpkqbFHam
जब आप किसी समाज की बेटी को उठाने का गाना DJ पर बजायेंगे तो उस समाज के लोग आपको मारेंगे ही …
ठाकुरो ने जो किया वो एकदम सही किया ।
तमाशा बना दिया है समाज का ?
कभी पंडित जी बेटी ,कभी यादव जी की बेटी कभी ठाकुर की बेटी ?
पहले तो ऐसा गाना बनाने वालों को सामाजिक रूप से चौराहे पर लाठी पड़नी चाहिए ।
सरकार ने तय किया है कि उन्हें यदि गाली खानी ही है तो सुप्रीम कोर्ट वाले विषय पर खा लेते हैं क्योंकि UGC इनसे सँभल नहीं रहा। यदि ऐसा नहीं है तो SC के CJI द्वारा एक पैराग्राफ पर थर्मोन्यूक्लियर मोड में जाने का और कोई मतलब है ही नहीं।
जज साहब भी जानते हैं कि इस पैराग्राफ में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अनुचित है, या पढ़ाया नहीं जाना चाहिए। सरकार जैसे रेंगने लगी है, ताकि हम सब उसे पेलें, उसका औचित्य केवल UGC से ध्यान भटकाना है।
कोई बात नहीं, हम UGC पर कल पुनः लिखेंगे। एक-एक SC/ST एक्ट के कारण हो रही घटना पर लिखते रहें। 8 मार्च को जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में भी चलेंगे। ये दो कौड़ी के डायवर्सन टैक्टिक्स नहीं चलेंगे। याद रखना, हम वो हैं जो तुम्हारा नैरेटिव चलाते रहे हैं, हमे चूतिया मत बनाओ NCERT के नाम पर। हम बनेंगे नहीं।
क्या न्यायपालिका यह धमकी दे रही है कि उसके भ्रष्टाचार पर कोई बात न करे? ये संविधान के रक्षक हैं या तानाशाही चल रही है देश में? मैं करूँगा इस पर चर्चा, हजार बार करूँगा।